अगर महेन्द्र सिंह धोनी होते आरसीबी के कप्तान, तो दिखता ये बड़ा फर्क

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आईपीएल 2019

IPL 2019- क्या होता अगर विराट कोहली की जगह महेंद्र सिंह धोनी होते रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के कप्तान? ये होते बदलाव 

IPL 2019- क्या होता अगर विराट कोहली की जगह महेंद्र सिंह धोनी होते रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के कप्तान? ये होते बदलाव

इंडियन प्रीमियर लीग के 12वें सीजन में भारतीय क्रिकेट के दो सबसे सफलतम कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी और विराट कोहली अपनी-अपनी टीमों की बागडोर संभाल रहे हैं। एक तरफ जहां विराट कोहली की कप्तानी वाली आरसीबी की टीम लगातार हार कर बॉटम पर हैं, तो वहीं दूसरी तरफ धोनी की सीएसके शानदार प्रदर्शन कर टॉप पर है।

धोनी की टीम टॉप पर तो कोहली की टीम बॉटम पर

आखिर भारत के दो सबसे बेहतरीन कप्तानों की टीम के प्रदर्शन में इतना फर्क कैसे है। ये एक जरूर सोचने वाली बात है। ऐसा तो बिल्कुल नहीं है के चेन्नई सुपर किंग्स मजबूत टीम है और आरसीबी की टीम कमजोर…

तो फिर ये फर्क जरूर सवाल खड़े करता है। जहां विराट कोहली अब तक कप्तानी के रूप में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहे हैं तो वहीं धोनी कप्तानी में ऐसे खरे उतर रहे हैं जहां उनके सामने हर विरोधी टीम पस्त हो रही है।

अगर धोनी होते आरसीबी के कप्तान….

जेहन में ये बात भी आने लगी है कि अगर आरसीबी की कमान महेन्द्र सिंह धोनी संभाल रहे होते तो क्या आरसीबी इसी स्टेज पर होता। शायद नहीं… क्योंकि धोनी और विराट की कप्तानी में कुछ फर्क जरूर है। तो आपको हम दिखाते हैं वो फर्क जिससे धोनी के आरसीबी के कप्तान होने पर नहीं होता ऐसा हाल….

धोनी करते हैं खिलाड़ियों के कौशल पर भरोसा, कोहली नहीं दिखा पाए भरोसा

ऐसा नहीं होता है कि आपको हर मैच में जीत मिल जाए। क्योंकि सामने वाली टीम भी जीत के लिए खेलती है। अब जब हार मिले तो टीम में बदलाव जीत की गारंटी नहीं बन सकता। क्योंकि अपनी टीम और खिलाड़ियों पर भरोसा सबसे बड़ी बात है।

लेकिन विराट कोहली आईपीएल में ऐसा नहीं कर पाते हैं। विराट कोहली हर मैच में कुछ ना कुछ बदलाव करते नजर आते हैं यानि जाहिर है उन्हें अपने खिलाड़ियों पर भरोसा नहीं है तो वहीं धोनी अपने खिलाड़ियों को लगातार मौका देना जानते हैं यानि धोनी का भरोसा अपने खिलाड़ियों पर पूरा होता है।

धोनी कूल माइंड से लेते हैं फैसले, कोहली आक्रमकता में लेते हैं गलत फैसले

विराट कोहली एक आक्रमक खिलाड़ी और कप्तान है ये पूरा क्रिकेट जगत जानता है लेकिन हर बार आप आक्रमकता से फैसले नहीं ले सकते हैं। क्रिकेट के मैदान में कुछ ऐसी स्थिति आती है जब आपको ठंडे दिमाग से फैसले लेने होते हैं। ऐसा विराट कोहली और महेन्द्र सिंह धोनी की कप्तानी में फर्क को दर्शाता है।

जहां एक तरफ कोहली हर फैसले में अपने आक्रमकता की झलकियां दिखा ही देते हैं तो वहीं धोनी स्थिति के आधार पर बहुत ही कूल होकर फैसले लेते हैं।

माही अपनी टीम को लेकर चलते हैं साथ, कोहली नहीं कर पाते ऐसा

क्रिकेट किसी एक खिलाड़ी का खेल नहीं बल्कि एक टीम का खेल होता है जिसमें 11 खिलाड़ी होते हैं। कप्तान को सफलता के लिए अपनी टीम को साथ लेकर चलना सबसे अहम है। लेकिन इस स्थिति में विराट कोहली आरसीबी के लिए वो काम नहीं कर पा रहे हैं।

तो वहीं महेन्द्र सिंह धोनी सीएसके की टीम को जिस तरह से साथ लेकर चलते हैं वो सफलता की गारंटी है। इसी सीजन में दोनों ही कप्तानी में अंतर देखा गया। आरसीबी जब केकेआर के खिलाफ खेल रही थी तब सिराज ने फुल लैंथ नो बॉल डाली तो सिराज को अकेला छोड़ दिया गया लेकिन अगले ही दिन जब दीपक चाहर ने ऐसी ही गेंद डाली तो कप्तान धोनी ने पास जाकर समझाया। ये फर्क धोनी और कोहली की कप्तानी में नजर आता है।

कोहली अपनी ही रणनीति पर नहीं होता विश्वास, धोनी हर प्लान में करते हैं भरोसा

किसी की भी सफलता का सबसे बड़ा मूल मंत्र होता है खुद में विश्वास, जब खुद पर भरोसा नहीं होता है तो टीम पर भरोसा कैसे दिखेगा। ऐसा ही हाल इस सीजन में विराट कोहली के साथ हो रहा है। उनकी रणनीति पर खुद कोहली भरोसा नहीं कर पा रहे हैं जिससे उनकी हर चाल नाकाम हो रही है।

तो वहीं जब महेन्द्र सिंह धोनी की बात करें तो वो जो रणनीति विरोधी टीम के लिए तैयार करते हैं चाहे जो हो जाए खुद का भरोसा कामय रहता है। तभी तो वो सफलता हासिल कर रहे हैं।

धोनी-कोहली की कप्तानी में है रात-दिन का फर्क

महेन्द्र सिंह धोनी और विराट कोहली दोनों ही भारत के शानदार कप्तानों में से एक हैं। आईपीएल में कप्तानी के अनुभव की बात करें तो जहां धोनी 11वें सीजन में कप्तानी कर रहे हैं तो वहीं कोहली भी ये कप्तानी के रूप में 7वां सीजन खेल रहे हैं। ऐसे में अनुभव में तो दोनों ही जबरदस्त हैं।

फिर भी दोनों की कप्तानी में काफी बड़ा फर्क है। एक और जहां धोनी कप्तानी कौशल से सीएसके को 3 बार खिताब दिला चुके हैं तो वहीं विराट कोहली को अभी भी पहले खिताब का इंतजार है। ऐसे में साफ कह सकते हैं कि धोनी-कोहली की कप्तानी में अंतर तो है।

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