IND v SA 2019ः रिध्दिमन साहा ने कहा कि वे टीम में वापसी कर बेहद खुश है, मौका

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IND v SA 2019ः ऋषभ पंत के साथ अपनी प्रतिद्वंदीता पर बोले रिद्धिमान साहा, प्लेइंग इलेवन में जगह पर कही ये बात 

IND v SA 2019ः ऋषभ पंत के साथ अपनी प्रतिद्वंदीता पर बोले रिद्धिमान साहा, प्लेइंग इलेवन में जगह पर कही ये बात

लंबे समय से टीम से बाहर चल रहे रिद्धिमन साहा को भारतीय क्रिकेट टीम के चयनकर्ताओं ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ होने वाले टेस्ट मैच में मौका दिया। भारतीय टीम की तरफ से मिले इस मौके के बारे में अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए रिद्धिमन साहा ने कहा कि मुझे टीम की तरफ से जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, मैं उसमें खुद को खरा उतारना चाहता हूं, ताकि मैं टीम के लिए बेस्ट प्रदर्शन कर सकूं, मैच में ऋषभ पंत की मदद कर सकूं।

विकेटकीपिंग के रूप में चयनकर्ताओं की पहली पसंद हैं साहा

रिध्दिमन साहा

धोनी के विकेटकीपिंग के बाद अगर किसी और की विकेट कीपिंग को बेहतर समझा जाता है तो वह हैं रिद्धिमन साहा लेकिन साल 2018 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेलते हुए, उनकों अंगुठे में चोट लग गई, उसके बाद आईपीएल के दौरान कंधें की सर्जरी से गुजरना पड़ा था। जिसके लिए उन्हें काफी वक्त तक क्रिकेट से दूरी बनाकर रखनी पड़ी। जिसके बाद अब उन्होंने साल 2019 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट मैच में खेलने का मौका मिला है।

रिध्दिमन साहा

लंबे समय तक क्रिकेट से दूरी बनाकर रखने को लेकर साहा ने कहा

“जब मैं छोटा था, मैं टीम में अपनी जगह को लेकर कभी असुरक्षित नहीं था। न ही मुझे ऐसा लगा कि यदि मैं अपना स्थान खोता हूं तो मैं इस पक्ष में वापस नहीं आ सकता हूं। जब भी मुझे मौका मिला मैंने हमेशा अच्छा करने की कोशिश की। जब माही भाई चले गए, तो उसके बाद मैंने अपने खेल में बेहतर प्रदर्शन किया, जब तक मैं खुद चोटिल नहीं हुआ।”

साहा ने कहा कि किसी भी खेल को खेलने की एक उम्र होती है

रिध्दिमन साहा

दाएं हाथ के बल्लेबाज ने अपनी बात रखते हुए कहा

“उस समय मेरे कोच और परिवार वाले काफी निराश थे, कि मुझे बाहर बैठना पड़ा जब मेरे लिए सब कुछ सही हो रहा था। खेल में चोट लगना आम है। लेकिन उम्र मायने रखती है। 20 के दशक में एक खिलाड़ी तेजी से ठीक हो जाता था, लेकिन मेरे जैसे किसी व्यक्ति के लिए जो 30 साल से ऊपर का है, शरीर को प्रतिक्रिया देने में समय लगता है। लेकिन मैं किसी टीम में अपना स्थान खोने के बारे में बुरा महसूस में अपना समय नहीं गंवाना चाहता हूं। बचपन से ही मैंने सकारात्मक दृष्टिकोण अपना था और मैंने पुनर्वसन के दौरान सकारात्मक रहना शुरू कर दिया है। चोट की सर्जरी की आवश्यकता है। अन्यथा, मुझे नहीं पता होता कि क्या हुआ होगा। “

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