विश्वकपः ये है वो खिलाड़ी जो विश्व कप टीम के महत्वपूर्ण खिलाड़ी रहे है

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ये हैं भारतीय क्रिकेट इतिहास की ऑल टाइम विश्व कप की टीम, जो दुनिया की किसी भी टीम को आसानी से दे सकती हैं मात 

ये हैं भारतीय क्रिकेट इतिहास की ऑल टाइम विश्व कप की टीम, जो दुनिया की किसी भी टीम को आसानी से दे सकती हैं मात

ऑल-टाइम इंडिया क्रिकेट विश्व कप XI, वन डे इंटरनेशनल क्रिकेट में एक बहुत ही रोमांचक टीम होगी. वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया के साथ, भारत एकमात्र ऐसी दूसरी टीम है जिसने दो बार विश्व कप जीता है. कपिल देव के महान नेतृत्व में, भारत 1983 में विश्व कप जीतने वाला पहला राष्ट्र बना.

फिर 28 साल बाद महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में 2011 में विश्वकप जीता. दो विश्व कपों में शानदार प्रदर्शन करने वाले कई खिलाड़ियों के साथ, यह एक सर्वकालिक भारत एकदिवसीय विश्व कप एकादश के लिए एक कठिन चयन है. इतिहास को देखते हुए, अंतिम एकादश उच्च कैलिबर के बल्लेबाजों, महान ऑलराउंडरों और शानदार गेंदबाजों से बनी होगी.  मेगा इवेंट और एकदिवसीय फॉर्म से पिछले प्रदर्शनों को ध्यान में रखते हुए, यहां भारत क्रिकेट विश्व कप एकादश है.

सचिन तेंदुलकरः

सचिन तेंदुलकर ने वैसे तो छह बार विश्वकप टीम में शामिल रहे. 45 मैचों में तेंदुलकर ने 2278 रन बनाए थे, जिससे वह विश्व कप इतिहास में सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी बन गए. इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 88.98  भी अभूतपूर्व रहा. इन मैचों में उनका औसत भी 56.95 रहा. 

सचिन ने 1992 के टूर्नामेंट में 18 साल की उम्र में विश्व कप की शुरुआत की.2003 क्रिकेट विश्व कप में 673 रन बनाए, लेकिन फाइनल में टीम के हारने के बाद सभी आश्चर्यचकित हुए क्योंकि वह एक टीम के रुप में टीम इंडिया ने अच्छा प्रर्दशन किया था. हालांकि, 2011 में विश्व कप उठाने का उनका सपना सच हो गया, इस बार फाइनल में भारत ने श्रीलंका को 6 विकेट से हराकर विश्वकप को अपने नाम कर लिया. मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत ने अपने घरेलू दर्शकों के सामने मेगा इवेंट जीता. 2011 के विश्व कप में, वह नौ मैचों में 53.55 के औसत से रन बनाए थे. 

वीरेन्द्र सहवागः

इस क्रम में सबसे ऊपर सचिन का साथ देने के लिए सलामी बल्लेबाज0 का टीम में होना बहुत जरुरी है. विश्व कप मैचों में, सहवाग ने 22 मैचों में 38.31 की औसत से 794 रन बनाए. इस दौरान उनका  स्ट्राइक रेट 106.17 रहा. विश्व कप में, उनके नाम पर दो शतक और तीन अर्द्धशतक हैं.

अपने समय के वह बेहतरीन खिलाड़ियों में जाने जाते थे, वह कितनी भी अच्छी गेंद को खराब बनाने में माहिर थे. वह 2011 क्रिकेट विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा थे. विश्व कप के 10 वें संस्करण में, उन्होंने आठ मैचों के दौरान कुल 380 रन बनाए. इस दौरान 122.58 की स्ट्राइक रेट से उन्होंने रन बनाए.  2011 के टूर्नामेंट के पहले ग्रुप बी मैच में उनका उच्चतम विश्व कप 175 का स्कोर बांगलादेश के खिलाफ था.

शिखर धवनः 

बाएं हाथ के बल्लेबाज शिखर धवन सलामी जोड़ी के बाद बल्लेबाजी करने के लिये आते हैं. 2015 क्रिकेट विश्व कप में अपनी शुरुआत करते हुए,  शिखर आमतौर पर एक सलामी बल्लेबाज हैं, वह इस स्थिति में समान रूप से खेल सकते हैं.

केवल आठ विश्व कप मैचों में वह पहले ही 412 रन बना चुके हैं. धवन विश्व कप में भारत के सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी थे. उस टूर्नामेंट में धवन ने दो शतक और एक अर्धशतक बनाया था. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उनका 137 का उच्चतम स्कोर 2015 क्रिकेट विश्व कप में आया था.

मोहिंदर अमरनाथः

चौथे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए एक सक्षम ऑलराउंडर, मोहिंदर अमरनाथ एक अच्छा विकल्प है. पारी के स्थिरता प्रदान करने के लिए वह अतच्छे खिलाड़ी के तौर पर जाने जाते है. वह मैच की स्थिति को भांपते हुए बल्लेबाजी करने में समर्थ है.

एकदिवसीय विश्व कप मैचों में केवल एक अर्धशतक होने के बावजूद, उनका 80 रना का उच्चतम स्कोर बहुत मायने रखता है. 1983 के टूर्नामेंट के 14 वें मैच (ग्रुप बी) में वेस्टइंडीज के खिलाफ आया.

1983 क्रिकेट विश्व कप में, पटियाला में जन्मे खिलाड़ी ने बल्ले के साथ 29.65 की औसत से आठ मैचों में 237 रन बनाए.लेकिन ज्यादातर लोग अमरनाथ को उनकी 26 गेंदों की 80 रन की पारी के लिए और 3-12 की जीत के लिए फाइनल में वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की  जीत के रूप में याद करते हैं. उन्हें इस प्रर्दशन के लिए मैन आफ दे मैच से भी नवाजा गया था.

विराट कोहलीः 

इस समय के सचिन तेंदुलकर कहे जाने वाले विराट कोहली और इससमय भारतीय टीम के कप्तान वविराट कोहली पांचवे नंबर पर बल्लेबाजी करने के लिए आते, उन्होंने 2011 क्रिकेट विश्व कप में एक शानदार शुरुआत की, बांग्लादेश के खिलाफ अपने पहले मैच में नाबाद शतक बनाया.

2011 के क्रिकेट विश्व कप अभियान के दौरान, विराट ने मध्य क्रम में बल्लेबाजी में अहम योगदान दिया. 2011 के फाइनल में, उन्होंने गौतम गंभीर (97) के साथ एक महत्वपूर्ण 75 की साझेदारी करते हुए, उपयोगी 35 बनाए.

2011में, कोहली ने नौ मैचों में 35.25 की औसत से 282 रन बनाए. 2011 के टूर्नामेंट में उनका पहला विश्व कप होने के साथ, कोहली ने निश्चित रूप से साबित कर दिया था कि वह कितना बड़ा खिलाड़ी बनने जा रहे हैं. इसके बाद से वह इस समय क्रिकेट के उच्च शिखर पर बने हुए है.

युवराज सिंहः

प्रतिभाशाली युवराज सिंह जिन्होंने 2003 क्रिकेट विश्व कप में पदार्पण किया था.  भारत के सबसे महान एकदिवसीय क्रिकेटरों में से एक है. वह टीम इंडिया के लिए एक मैच विनर के युवराज ने 20 विश्व कप मैचों में 52.71 की बल्लेबाजी औसत के साथ 738 रन बनाए हैं. इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट भी बड़ा बेहतरीन है. विश्वकप के दौरान उन्होंने 20 विकेट भी लिए है, जिससे वह अपने आपको एक आलराउंडर के रुप में प्रर्दशित करते है.

कैंसर जैसी घातक बीमाारी से जूझते हुए वह जब खेल की दुनिय़ा में वापस आए तो उनके अंदर एक नयी ताजगी देखने को मिली. 2011 के टूर्नामेंट के नौ मैचों में, युवराज ने 90.50 की औसत से 362 रन बनाए, जिसमें 86.19 की स्ट्राइक रेट थी. इस दौरान उन्होंने एक शतक और 4 अर्धशतक भी लगाए. वह 6 नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आदर्श खिलाड़ी है.

महेंद्र सिंह धोनीः

महेंद्र सिंह धोनी भारत के लिए एक  विश्व कप एकदिवसीय टीम के लिए सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर बल्लेबाज हैं. उन्होंने 42 मैचों में 42.25 की औसत से 507 रन बनाए हैं. इस दौरान उन्होंने 91.18 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए. 2007 के विश्व कप में शुरुआती मैचों में संघर्ष के बाद, धोनी ने नौ मैचों में 241 रन बनाए.

2011 के विश्प कप के फाइलन मैच में धोनी उस समय पर बल्लेबाजी करने के लिए आए थे, जिस समय टीम को उनकी बल्लेबाजी की आवश्यकता थी, उन्होंने इस दौरान सूझबूझ का परिचय देते हुए गौतम गंय़भीर के साथ 90 रन की साझेदारी की. और टीम को धीरे-धीरे रनों के करीब लेकर गए. इसके बाद गौतम का विकेट हो गया, तो उन्होने युवराज सिंह के साथ अहम साझेदारी की, अंतिम में उन्होंने हेलाकाप्टर शाॅट लगाकर टीम को जीत और विश्वकप दोनों दिलाने में मदद की.

कपिल देवः

भारत के महान ऑलराउंडर के रूप में, कपिल देवकी मौजूदगी टीम की और शोभा बढ़ा देती, उन्होंने टीम के लिए आलराउंडर प्रर्दशन कर टीम को कई मौकों पर जीत दिलाई है. इन्होंने 26 मैचों में 669 रन बनाए है. इस दौरान उनका शानदार स्ट्राइक रेट रहा. 1983 के आयोजन के 20 वें मैच (ग्रुप बी) में, कपिल ने 175 बनाये, जो विश्व कप मैच में उनका सर्वोच्च स्कोर था. विश्व कप में 5-43 के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी आंकड़े 1983 टूर्नामेंट के 11 वें मैच (ग्रुप बी) में आए.

मदन लालः

1983 की विजयी टीम के मदन लाल एक अच्छे गेंदबाजी ऑलराउंडर थे. 11 विश्व कप मैचों में खेलते हुए, लाल ने 19.36 की औसत से बाईस विकेट लिए हैं. 1983 क्रिकेट विश्व कप में, उन्होंने 16.76 की औसत गेंदबाजी के साथ आठ मैचों में 17 विकेट लिए.

अनिल कुंबलेः

वनडे क्रिकेट में भारत के सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं. इन्होंने 334 विकेट हासिल किए है. वह एक अच्छे लेग स्पिनर के रुप में टीम में जाने जाते है. इन्होंने भारत के लिए 18 विश्वकप मैच खेले है, जिसमें इन्होंने 30 विकेट हासिल किए है.

 जहीर खानः

बाएं हाथ के तेज गेंदबाज जहीर खान विश्व कप क्रिकेट में सबसे सफल भारतीय गेंदबाज हैं. 23 मैचों में, जहीर ने 20.44 की औसत से गेंदबाजी करते हुए 34 विकेट हासिल किए. 2003 के क्रिकेट विश्व कप में, जहीर ने अपनी आक्रामकता और गति का प्रदर्शन किया. 2003 क्रिकेट विश्व कप के 7 वें मैच  में 4-42 से उनकी न्यूजीलैंड के खिलाफ सर्वश्रेष्ठ गेदबाजी प्रसिंद्ध है.

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