भारत का ये दिव्यांग खिलाड़ी अबुधाबी टी10 में आएगा नजर

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बुलंद हौंसलों से इस भारतीय दिव्यांग खिलाड़ी ने बनायी अबु धाबी टी10 लीग में जगह, बड़ी दिलचस्प है कहानी 

बुलंद हौंसलों से इस भारतीय दिव्यांग खिलाड़ी ने बनायी अबु धाबी टी10 लीग में जगह, बड़ी दिलचस्प है कहानी

कहते हैं हौंसलों के आगे हर मुश्किल छिप इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी एक बड़ी ताकत के रूप में बदल जाती है। ऐसा ही कुछ भारत के विकलांग क्रिकेटर शंकर सज्जन के साथ हुआ है। इन दिनों अबुधाबी में टी10 क्रिकेट लीग के लिए विश्व भर के दिग्गजों का जमावड़ा हो रहा है।

विकलांग शंकर सज्जन इस टूर्नामेंट के लिए पहुंचे अबु धाबी

अबु धाबी टी10 लीग के लिए शंकर सज्जन को भी अभ्यास कराने का मौका मिला है। लेकिन अबु धाबी पहुंचने के लिए शंकर सज्जन को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

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कर्नाटक के रहने वाले शंकर सज्जन को बैंगलुरू से अबुधाबी पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा और तमाम मुश्किलों के बीच वो भी दिल्ली बुल्स की टीम के लिए नेट में गेंदबाजी करने के लिए पहुंच गए हैं।

कर्नाटक के सज्जन को अबुधाबी टी10 लीग में प्रैक्टिस कराने का मौका

सज्जन के लिए अबुधाबी में इतना बड़ा मौका मिलना ही बड़ी बात है क्योंकि वो आम इंसान की तरह सामान्य शरीर वाले नहीं हैं बल्कि उनके शरीर का उपरी हिस्सा पूरी तरह से असामान्य है लेकिन इरादों ने इन मुश्किलों को परास्त कर उन्हें यहां तक पहुंचा दिाया।

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शंकर सज्जन ने अपनी विकलांगता से हार नहीं मानी और आज अपने इरादों से इसे ताकत बनाया। दिल्ली बुल्स की फ्रेंचाइजी ने उन्हें अपनी टीम के बल्लेबाजों की स्पिन गेंदबाजी के लिए प्रैक्टिस कराने शंकर सज्जन को आमंत्रित किया। वो अंग्रेजी तो टूटी-फूटी बोल लेते हैं वहीं हिंदी भी सीख रहे हैं।

इस मौके को लेकर शंकर सज्जन की प्रतिक्रिया

शंकर ने अपने मिले मौके को लेकर कहा कि” मुझे इस तरह से मौका मिलने की उम्मीद नहीं थी लेकिन अचानक ऐसा हुआ और मेरे पास पासपोर्ट नहीं था। जब मुझे सेलेक्शन लेटर मिला तो मैंने दो दिन के अंदर पासपोर्ट हासिल किया। एक दिन वीजा में लग गया औरर मैं तुरंत ही दुबई आने को तैयार हो गया।”

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मुझे मेरे शहर के कोच का भरपूर समर्थन मिला। मैंने उन्हें अपना सेलेक्शन लेटर दिखाया। उन्होंने हमेशा मेरे क्रिकेट करियर का समर्थन किया। उन्होंने कुछ लोगों को फोन किए और तेजी के साथ इस प्रक्रिया को शुरू किया। ये देश के बाहर मेरा पहला दौरा है और मैं इसको लेकर उत्साहित हूं। मैं सुबह 3.30 पर ही उठ गया था लेकिन फ्लाइट सुबह 7 बजे की थी। मैं 2 घंटे पहले ही एयरपोर्ट पहुंच गया।

सज्जन ने आगे कहा कि “मुझे मेरा पासपोर्ट मिल गया लेकिन इसके बाद पता नहीं था कि कहां जाना है। मैं कन्फूस्ड था। फिर मैंने पूछा सर फ्लाइट का गेट कहा है। फिर मैं गेट पर पहुंचने में कामयाब रहा और अब दुबई पहुुंच गया हूं। ये रोमांचकारी यात्रा थी शायद बहुत ही चुनौतीपूर्ण। हालांकि इसमें कोई संदेह नहीं कि मुझे चुनौतियों का सामना करना पसंद है।”

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शंकर सज्जन ने कई बडे मैचों में प्रैक्टिस में बल्लेबाजों को गेंदबाजी कर प्रैक्टिस करायी है। जिसमें उन्होंने 2018 में भारत-अफगानिस्तान के टेस्ट में अफगानिस्तान के बल्लेबाजों को प्रैक्टिस करायी थी तो वहीं वो आईपीएल में आरसीबी के लिए भी प्रैक्टिस में गेंदबाजी करते हैं।

सज्जन ने अपने शारीरिक अक्षमता को लेकर कहा कि “वो कभी नहीं चाहते कि उन्हें दिव्यांग के तौर पर याद किया जाए। बचपन में जब मुझे डॉक्टर के पास ले जाया गया तो डॉक्टर ने कहा कि वो कभी सीधे हाथ नहीं रख पाएंगे क्योंकि वहां कोई बडी हड्डी नहीं है।

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