पांच ऐसे मौके जब अंपायर के फैसले के खिलाफ खिलाड़ियों ने खेलना से किया इनकार

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पांच ऐसे मौके जब अंपायर के फैसले के खिलाफ खिलाड़ियों ने खेलना से किया इनकार 

पांच ऐसे मौके जब अंपायर के फैसले के खिलाफ खिलाड़ियों ने खेलना से किया इनकार

श्री लंका टीम वेस्टइंडीज दौरे पर है जहां दोनों टीमों के बीच टेस्ट सीरीज खेली जा रही है. इस बीच गेंद से छेड़छाड़ से जुड़े विवाद के कारण शनिवार को वेस्टइंडीज और श्रीलंका के बीच दूसरा टेस्ट मैच एक समय अधर में लटक गया था. अंपायरों की गेंद बदलने की मांग से नाराज श्रीलंका ने खेल के तीसरे दिन मैदान पर उतरने से इनकार कर दिया था. हालांकि दो घंटे बाद वह फील्ड पर उतरी. यह पहली बार नही हुआ है इससे पहले भी खिलाड़ी अंपायर के फैसले के खिलाफ गए हैं. हम आपको ऐसी ही पांच घटनाओं के बारे में बताने जा रहे हैं.

पाकिस्तान-इंग्लैंड ओवल टेस्ट मैच (2006)

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2006 में चौथे टेस्ट के चौथे दिन अंपायर डरेल और बिली ने पाकिस्तान पर गेंद से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए इंग्लैंड को पांच रन अतिरिक्त दे दिए. मगर अंपायर के इस फैसले से पाकिस्तानी खिलाड़ी सहमत नही थे. टी काल के बाद उन्होंने फील्ड पर आने से मना कर दिया था. इसके 20 मिनट बाद मैदानी अंपायर इंग्लैंड के बल्लेबाजों के पास गए इंग्लैंड की टीम को विजेता घोषित कर दिया था. इस तरह की घटना अपने आप में पहली बार हुई थी.

श्री लंका-इंग्लैंड एडिलेड वनडे मैच (1999)

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इंग्लैंड के साथ एक वनडे मैच के दौरान श्री लंका के दिग्गज गेंदबाज मुथैया मुरलीधरन की गेंद को नॉ बॉल दे दिया था. श्रीलंकाई स्पिनर ने लेग ब्रेक गेंदाबजी की थी जिसे अंपायर ने नो बॉल करार दे दिया था. इसके बाद कप्तान अर्जुन रणतुंगा को बहुत गुस्सा आ गया.  वह अपनी टीम को लेकर बाउंड्री लाइन पर चले और मैच का बहिष्कार करने की बात कह दी थी. इस दौरान खेल 12 मिनट तक बाधित रहा था. हालांकि बाद में मुरलीधरन ने अपना ओवर पूरा किया था.

भारत-पाकिस्तान बैंगलोर टेस्ट मैच (1983)

बैंगलोर में खेले जा रहे इस टेस्ट मैच में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 275 रन बनाए. जवाब में पाकिस्तान की टीम ने 288 रन बनाए. मैच के आखिरी दिन पांचवें सेशन में भारतीय टीम ने अपनी दूसरी पारी शुरु की. ऐसे में परिणाम निकलने की कोई संभावना नही थी. अगर ये टेस्ट मैच इंग्लैंड में हो रहा होता तो इसे यही बंद कर दिया जाता है. चूंकि भारत में दर्शकों को ध्यान में रखते हुए ऐसा नही किया जाता है.

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मैच में 77 ओवर की गेंदबाजी की जा चुकी थी. इसके बाद जहीर अब्बास ने अंपायरों से सलाह मशविरा किए बिना खिलाड़ियों को लेकर मैदान से बाहर चले गए. अंपायर असमंजस में आ गए थे, अंपायरों ने सुनील गावस्कार से बात की, लेकिन वो मैच को जारी रखना चाहते थे. हालांकि सुनील गावस्कर जो अपने शतक के करीब थे वे मैच बंद करने के पक्ष में नही थे. जबकि दूसरी ओर पाकिस्तान टीम भी मैदान पर आने को तैयार नही थी. ऐसे में अंपायर ने घोषणा कर दी थी कि अगर पाकिस्तान टीम मैदान पर नही आई तो उसे हारा हुआ घोषित कर दिया जाएगा. जिसके बाद पाकिस्तान को मैदान पर आना पड़ा था.

न्यूज़ीलैंड-वेस्टइंडीज क्राइस्टचर्च टेस्ट मैच (1980)

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1980 के दौर में वेस्टइंडीज एक शानदार टीम बनकर सामने आई थी. वहीं न्यूज़ीलैंड के साथ खेला गया क्राइस्टचर्च टेस्ट मैच पूरी तरह से विवादों में घिरा रहा था. जब माइकल होल्डिंग की गेंद जॉन पारकर के बल्ले से किनारा लेकर गई, लेकिन अंपायर ने उन्हें नॉट आउट करार दे दिया. होल्डिंग ने गुस्से में स्टम्पस पर पैर मारकर उन्हें गिरा दिया था. उस समय वो फोटो पूरी दुनिया में फैल गई. इसी मैच के दौरान वेस्टइंडीज टीम चाय के लिए गई और उन्होंने अंपायर फ्रेड गौडाल को निकालने की बात कही. ऐसा न होने पर कैरेबियाई खिलाड़ियों ने मैच में उतरने से मना कर दिया था.

इंडिया-पाकिस्तान सेहिवल वनडे मैच (1978)

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भारतीय टीम पाकिस्तान दौरे पर गयी थी. वनडे सीरीज के तीसरे मैच के दौरान जब भारतीय बल्लेबाज गायकवाड और विश्वनाथ बल्लेबाजी कर रहे थे. 38 वां ओवर लेकर आए सरफराज नवाज ने पहली गेंद बाउंसर फेंकी जो गायकवाड के सिर के उपर से निकल गयी. मगर अंपायर ने इस पर कोई संकेत नही दिया. ऐसी ही लगातार तीन गेंदें डाली गयीं लेकिन अंपायर कोई भी प्रतिक्रिया नही दे रहे थे. इसको देख कर भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी ने बल्लेबाजों को वापस बुला लिया था.

 

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