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कोहली-तेंदुलकर, धोनी-पंत की तुलना करने वाले, ये बातें जान लें तो बेहतर होगा!

हर खिलाड़ी का एक दौर होता है. जैसे सचिन तेंदुलकर का था, राहुल द्रविड़ का था. उस दौर में अगर वो कोयले को भी छू दें तो सोना बन जाता. फिर इन खिलाड़ियों का दौर खत्म हुआ. पुजारा और कोहली को लोग इनके विकल्प मानने लगें. आप किसी खिलाड़ी को उस खिलाड़ी का विकल्प मान सकते हैं. लेकिन तुलना करन गलत हो जाता है.

तेंदुलकर जिस दौर में खेले वो कोई और दौर था

सचिन तेंदुलकर जिस दौर में खेले वो कोई और दौर था. उस समय गेंदबाज अकरम,ली, वकार,मुरलीधरन, होते थे. उन्होंने उस दौर में रन बनाए. अब गेंदबाजी का पैमाना वो नहीं रहा है. कोहली आज रन बना रहे हैं. लेकिन उनकी जैसी निरंतरता है, सचिन कि वैसी नहीं थी. तो तुलना कहां से आ गई. 

पंत -धोनी के लिए भी यही बात लागू होती है

वैसे ही भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी जब भारत के लिए खेलने आए. तब भारतीय टीम के पास विकेटकीपर की बहुत कमी होती थी. धोनी से पहले पार्थिव पटेल दिनेश कार्तिक जैसे विकेटकीपर डेब्यू कर चुके थे. भारत के पास उस समय विकेटकीपर की इतनी कमी थी, कि राहुल द्रविड़ टीम के लिए विकेटकीपर की भूमिका में नजर आते थे.

21 साल के उम्र में धोनी टीम में भी नहीं आए थे 

धोनी ने वहां से भारतीय क्रिकेट में विकेटकीपिंग को एक नया आयाम दिया. उन्होंने बल्ले से कई बेहतरीन पारियां खेल  दिखाया की विकेटकीपर भी रन बना सकते हैं. वो विश्व के नंबर एक बल्लेबाज भी बने.

आज उनकी तुलना ऋषभ पंत से होती है. जो कि गलत है. पंत अभी 21 साल के हैं. इस उम्र में धोनी भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा भी नहीं थे. इसलिए इनदोनों के बीच कोई तुलना ही नहीं हो सकती.

तुलना करने से पहले बस साहिर लुधियानवी कि ये लाइनें याद रखें..

इज्ज़ते, शोहरते, चाहतें, उल्फतें ,
कोई भी चीज़ दुनिया में रहती नहीं
आज मै हूँ जहाँ, कल कोई और था 
ये भी एक दौर है, वो भी एक दौर था

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