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जाने कुलदीप यादव के चाइनामैन गेंदबाज बनने के पीछे की पूरी कहानी, खुद उनके पिता की जुबानी 

जाने कुलदीप यादव के चाइनामैन गेंदबाज बनने के पीछे की पूरी कहानी, खुद उनके पिता की जुबानी

ऑस्टेलियाई टीम के खिलाफ कोलकता के इडेन गार्डन मैदान में हैट्रिक लेने का अविश्वसनीय कारनामा करने वाले भारतीय टीम के युवा स्पिनर कुलदीप यादव ने बहुत ही कम समय में क्रिकेट की दुनिया में अपना एक बड़ा नाम बना लिया है.

कुलदीप यादव अगर क्रिकेट की दुनिया में बुलंदियों के शिखर को छू रहे है, तो वह सिर्फ और सिर्फ अपनी एक अनोखी कला चाइनामैन गेंदबाजी के जरिये छु रहे है और उनकी इसी खास कला के चलते व उनकी जिन्दगी से जुड़े कुछ खास पहलुओं के बारे में हम अपको अपने इस खास लेख में बताएंगे.

बनना चाहते थे तेज गेंदबाज 

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आपको बता दे कि तीसरे वनडे मैच में हैट्रिक लेने का कारनामा करने वाले भारतीय टीम के युवा स्पिनर कुलदीप यादव एक तेज गेंदबाज बनना चाहते थे.

कलाई की चोट ने बनाया चाइनामैन गेंदबाज 

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भारतीय टीम के युवा सिंर कुलदीप यादव को उनके बचपन में लगी कलाई की चोट ने कुलदीप को एक चाइनामैन गेंदबाज बना दिया.

दरअसल हुआ यु, कि जब कुलदीप दस साल की उम्र में घर में ही खेल रहे थे, तब एक दिन वह अपने घर की सीढ़ी से गिर गये, जिसके चलते उनके बाएँ हाथ की कलाई में चोट लग गई थी, इसलिए इसके बाद उन्होंने स्पिन गेंदबाजी का अभ्यास शुरू कर दिया.

हाथ में टेढ़ापन होने की वजह से करती है गेंद अधिक टर्न

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photo credit : Getty images

उतर प्रदेश के लालबंगला केडीए कालोनी निवासी कुलदीप के पिता रामसिंह यादव ने अपने एक इंटरव्यू में समाचार पत्र अमर उजाला को अपने एक बयान में कहा, “कलाई में लगी चोट ने ही कुलदीप को सफल चाइनामैन गेंदबाज बना दिया. जब उसे बचपन में हाथ में चोट लगी तो कुलदीप के हाथ में प्लास्टर चढ़ाना पड़ा था, जब प्लास्टर खोला था तो उनकी कलाई में हल्का टेढ़ापन था और हाथ में हल्का टेढ़ापन होने के कारण ही उसकी गेंद अधिक टर्न करती है.”

अब कुलदीप जब भारतीय टीम के लिए खेल रहा है और अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, तो मुझे उस आप पर काफी गर्व महसूस हो रहा है.”

पिता से ही मिली क्रिकेट खेलने की प्रेरणा 

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कुलदीप यादव एक मध्यवर्गीय परिवार से आते हैं. कुलदीप के पिता को क्रिकेट का बहुत शौक था और वह बचपन से ही अपने बेटे को सिर्फ और सिर्फ क्रिकेटर ही बनाना चाहते थे. क्रिकेट के प्रति अपने पिता के प्रेम को देखकर ही कुलदीप को क्रिकेट खेलने की प्रेरणा मिली थी.

क्रिकेट के शुरुआती दिनों में पिता ने कपिल पाण्डेय की देखरेख में एक स्थानीय कल्ब में कुलदीप को प्रशिक्षण के लिए  भर्ती करवाया. एक तेज गेंदबाज के तौर पर क्रिकेट की शुरुआत करने वाले कुलदीप को स्पिन गेंदबाज बनने की सलाह उनके ही कोच कपिल पाण्डेय ने दी और कलाई में टेढ़ापन होने के चलते उन्हें एक चाइनामैन स्पिन गेंदबाज बना दिया.

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