धोनी

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज खिलाड़ी महेन्द्र सिंह धोनी ने आज अपने जीवन के 39 बरस पूरे कर लिए हैं। महेन्द्र सिंह धोनी का जन्म 7 जुलाई 1981 को रांची में हुआ था। आज ही के दिन 39 साल पहले इस दिग्गज खिलाड़ी का जन्म हुआ था जिसके बाद ये ये खिलाड़ी पिछले 15 साल से देश की क्रिकेट टीम के लिए अपनी सेवाएं दे रहा है।

महेन्द्र सिंह धोनी आज मना रहे हैं अपना 39वां जन्मदिन

महेन्द्र सिंह धोनी ने एक कप्तान, एक विकेटकीपर और एक बल्लेबाज के रूप में जो कामयाबी हासिल की है और भारतीय क्रिकेट टीम को फायदा पहुंचाया है उससे आज उनके फैंस की एक बड़ी फेहरिस्त मौजूद है।

एमएस धोनी ऐसे ही नहीं बने हैं चैंपियन खिलाड़ी, क्रिकेट खेलने के लिए ट्रेन के टॉयलेट तक में किया है सफर 1

भारत के इस महान कप्तान के फैंस आज उनके जन्मदिन को हर्षोल्लास के साथ मना रहे हैं। आज क्रिकेट की दुनिया में महेन्द्र सिंह धोनी एक जाना पहचाना नाम है जिसे क्रिकेट जगत के चुनिंदा खिलाड़ियों में गिना जाता है।

महेन्द्र सिंह धोनी को इस क्रिकेट के लिए करना पड़ा कड़ा संघर्ष

एमएस धोनी का क्रिकेट सफर इतना आसान नहीं रहा है उन्हें इतना बड़ा खिलाड़ी बनने के लिए कई तकलीफों का सामना करना पड़ा है और उन्होंने काफी संघर्ष किया है। इतने कड़े संघर्ष और मुश्किलों के बाद आज धोनी का इतना बड़ा नाम मिला है।

महेंद्र सिंह धोनी

आज हम धोनी के इसी संघर्ष भरे सफर में एक संघर्ष के बारे में बताते हैं। भारत के इस महान कप्तान को अपने क्रिकेट के शुरुआती दिनों में क्रिकेट खेलने के लिए टॉयलेट में बैठकर सफर करना पड़ता था. उन्होंने क्रिकेट खेलने के लिए कई कठिनाइयों का सामना किया।

कभी-कभी तो धोनी को ट्रेन के टॉयलेट में बैठकर करनी पड़ती थी यात्रा

महेन्द्र सिंह धोनी के क्रिकेटर बनने का सफर वाकई में इतना आसान नहीं रहा है। उन्होंने अपने स्कूल के शुरुआती दिनों में फुटबॉल में गोलकीपर थे। इसी दौरान उन्हें उनके फुटबॉल कोच ने एक स्थानीय क्रिकेट टीम में खेलने के लिए भेजा। जहां उनकी विकेटकीपिंग ने हर किसी को प्रभावित किया।

धोनी

अपनी विकेटकीपिंग से छाप छोड़ने के बाद महेन्द्र सिंह धोनी कमांडो क्रिकेट क्लब की टीम में नियमित विकेटकीपर बन गए। इस क्लब से अच्छा प्रदर्शन करते रहने केे कारण उन्हें वीनू मांकड़ ट्रॉफी अंडर-16 में खेलने का मौका मिल गया। इसके बाद तो धोनी पर क्रिकेटर बनने का जैसे भूत सवार हो गया और कभी पीछे मूड़कर नहीं देखा। इसी दौरान वो क्रिकेट खेलने के लिए ट्रेन से सफर करते तो कभी-कभी भीड़ के कारण उन्हें टॉयलेट में तक बैठना पड़ता था। लेकिन मन में क्रिकेटर बनने का ठान लिया था।