मार्टिन गुप्टिल ने इस भारतीय गेंदबाज को बताया सर्वश्रेष्ठ

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मार्टिन गुप्टिल ने इस भारतीय गेंदबाज को बताया सर्वश्रेष्ठ 

मार्टिन गुप्टिल ने इस भारतीय गेंदबाज को बताया सर्वश्रेष्ठ

अगर यह कहा जायें, कि जसप्रीत बुमराह वर्तमान में दुनिया के सबसे अच्छे डेथ ओवर स्पेशलिस्ट गेंदबाज है, तो यह कहना गलत नहीं होगा. वह दबाव में भी लाजवाब गेंदबाजी करते है अगर दूसरी टीम को अंतिम ओवर में 8 रन चाहिए, तो बुमराह उसे भी बचाने की काबिलियत रखते है यह बात वह हाल में कई बार दिखा चुके है.

मार्टिन गुप्टिल ने की बुमराह की तारीफ

मार्टिन गुप्टिल ने इस भारतीय गेंदबाज को बताया सर्वश्रेष्ठ 1

दबाव में वह और भी घातक गेंदबाज साबित होते हैं. उन्हें प्रेशर में गेंदबाजी करना पसंद है. आईपीएल में भी देखा गया है, कि वह मुश्किल ओवरों में गेंदबाजी करते हैं और भारतीय टीम में भी उन्हें सबसे मुश्किल ओवर दिए जाते हैं, लेकिन वह सभी मुश्किलों से पार पाकर एक घातक गेंदबाज साबित होते हैं.

वर्तमान में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली जा रही वनडे सीरीज में भी जसप्रीत बुमराह शानदार डेथ गेंदबाजी कर रहे हैं. उनकी गेंदबाजी की तारीफ खुद न्यूजीलैंड के ओपनर बल्लेबाज मार्टिन गुप्टिल ने की है.

जसप्रीत बुमराह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ डेथ बॉलर

मार्टिन गुप्टिल ने इस भारतीय गेंदबाज को बताया सर्वश्रेष्ठ 2

मैच में हार का सामना करने के बाद प्रेस न्यूजीलैंड के अनुभवी खिलाड़ी मार्टिन गुप्टिल ने अपने बयान में कहा, “जसप्रीत बुमराह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ डेथ बॉलर हैं. उनके पास शानदार स्लोअर और बाउंसर है. ऐसे में उन्हें मैच से दूर रख पाना मुश्किल होता है. आशा करता हूं कि अगले तीन मैच में वो खराब गेंदबाजी करेंगे.”

गुप्टिल ने दूसरे मैच में इस्तेमाल हुई पिच के बारे में कहा, “पहले मैच की तुलना में ये एक अलग विकेट था. पिच थोड़ी धीमी हो गई थी और स्पिनर्स के लिए ज्यादा मददगार होती जा रही थी. जब मैं कॉलिन मुरनो के साथ बल्लेबाजी कर रहा था तब गेंद बल्ले पर आ रही थी, लेकिन मेरा विकेट गंवाने के बाद हमने लय खो दी जबकि हमें वहां दोबारे से पारी को खड़ा करना चाहिए था.”

गुप्टिल ने आगे कहा, “मैच में 170 रन का स्कोर इस विकेट पर सुरक्षित होता, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने बेहद कसी हुई गेंदबाजी की, हमनें बहुत सी डॉट बॉल खेलीं. कॉलिन और मेरी भूमिका आक्रामक रुख अपनाने की है, लेकिन हममे से किसी एक खिलाड़ी को 15वें ओवर तक पिच पर खड़े रहने की जरूरत थी लेकिन ऐसा हो न सका.”

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