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इंग्लैंड के हाथों मिली हार के बाद ऐसा क्या हुआ कि मिताली ने झूलन गोस्वामी को कहा “नौसिखियाँ साबित हुई.”

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इंग्लैंड के हाथों फाइनल मुकाबले में मिली 9 रनों से हार के बाद कप्तान मिताली राज ने कहा कि इंग्लैंड के खिलाफ रन का पीछा करते हुए टीम दबाव में आ गई थी लेकिन उन्हें यहां तक पहुंचने का गर्व है. मिताली राज ने उम्मीद जताई कि इस विश्व कप में टीम ने जिस तरह का प्रदर्शन करते हुए दूसरी बार फाइनल में जगह बनाई उससे भारत में महिला क्रिकेट की स्थिति बेहतर होगी और खिलाड़ियों को भी वह इज्जत मिलेगी जिसकी वो हकदार हैं.

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मुझे अपनी टीम पर गर्व – 

भारतीय कप्तान मिताली राज ने ट्वीट करते हुए कहा कि मै सभी समर्थकों का धन्यवाद करती हूं.हम सबको आप लोंगो के द्वारा अतुल्यनीय समर्थन प्राप्त हुआ. मै अपने टीम के प्रदर्शन से बहुत खुश हूँ और मुझे अपनी टीम पर गर्व है. आईपीएल की काली सच्चाई का चीयरलीडर्स ने किया खुलासा, कहा ये लोग सेक्स ऑब्जेक्ट समझते है

बल्लेबाजी अनुभवहीन साबित हुई-

इंग्लैंड के हाथों मिली हार के बाद ऐसा क्या हुआ कि मिताली ने झूलन गोस्वामी को कहा "नौसिखियाँ साबित हुई." 1
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मैच के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में मिताली ने कहा, “इंग्लैंड के लिए यह आसान नहीं था, लेकिन उन्हें जीत का श्रेय जाता है. उन्होंने दबाव के पलों में अच्छा प्रदर्शन किया और मैच पलट दिया. हलांकि हमारी बल्लेबाजी थोड़ी अनुभवहीन साबित हुई और वह दबाव में बिखर गई. मैं आश्वस्त हूं कि इससे बल्लेबाजों की सीखने को मिलेगा.”  शर्मनाक: सनथ जयसूर्या पर लगा अपनी गर्लफ्रेंड का सेक्स टेप लीक करने का आरोप, वीडियो आया सामने

अपने भविष्य और झूलन के बारे में दिया बयान-

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मिताली राज ने भारतीय टीम की प्रमुख गेंदबाज झूलन गोश्वामी के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “झूलन का करियर बेमिसाल रहा है. उनका करियर लंबा और प्ररेणादायी रहा है. मुझे भरोसा है कि हमारे देश में अब महिला क्रिकेट को ओर भी लोगों का ध्यान जाएगा और उन्हें तवज्जो मिलेगी. “

वही अपने बारे में बात करते हुए कहा कि मैं खुद को कुछ साल और खेलते देखती हूं, लेकिन अगला विश्व कप नहीं. गौरतलब है कि भारत ने पहली बार 2005 में विश्व कप के फाइनल में जगह बनाई थी तब भी मिताली कप्तान थी और झूलन उस टीम का हिस्सा.

आप को बता दें, इंग्लैंड ने लॉर्ड्स मैदान पर भारत के सामने 229 रनों का लक्ष्य रखा था, जिसे भारतीय टीम हासिल नहीं कर पाई और 48.4 ओवरों में 219 रन पर अपने सभी विकेट गंवा बैठी. इस तरह उसके हाथ से पहली बार विश्व विजेता बनने दूसरा मौका चला गया.