इंग्लैंड में मैच होते ही सबसे पहले इस भारतीय गेंदबाज को कर लिया जाता था टीम में शामिल 1

विदेशी पिचों पर खेलना भारतीय टीम के लिए हमेशा से चुनौती भरा रहा है. मगर एक समय भारतीय तेज गेंदबाज मोहंती को विदेशी दौरे के लिए आंख बंद कर टीम में शामिल कर लिया जाता था. 20 जुलाई 1976 को ओडिशा में जन्में देबाशीष मोहंती ने अपनी पहचान विदेशी धरती पर स्पेशलिस्ट गेंदबाज की बनायी. मोहंती का अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर तो ज्यादा लंबा नही रहा. मगर छोटे से ही अपने करियर में एक अलग पहचान बनायी.

विदेशी धरती के स्पेशलिस्ट 

1997 में श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में अंतरर्राष्ट्रीय करियर की शुरुआत करने वाले मोहंती टेस्ट क्रिकेट में अपनी गेंदबाजी की धार नही दिखा पाए. मगर वनडे क्रिकेट में उन्होंने अपनी गेंदबाजी का जादू चलाया.

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मोहंती ने वनडे क्रिकेट में 1997 में ही पाकिस्तान के खिलाफ डेब्यू किया. चार साल के अपने करियर में उन्होंने 45 वनडे खेले, जिसमें उनके नाम 57 विकेट दर्ज हैं. इसमें 1999 में विश्व कप का उनका शानदार प्रदर्शन भी शामिल है.

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1999 का विश्व कप इंग्लैंड और स्कॉटलैंड में खेला गया था. जिसके लिए भारत को एक तेज गेंदबाज की जरुरत थी. उस समय देबाशीष मोहंती को अंतर्राष्ट्रीय  क्रिकेट में आए दो साल ही हुए थे. मगर जब बात इंग्लैंड की धरती पर खेलने की आती तो वह एक अलग ही स्थान रखते.

उन्हें टीम में शामिल करने के लिए अंतिम समय में कॉल की गयी थी. जिसके बाद उन्होंने अपनी गेंदबाजी को विश्व कप में साबित कर दिखाया था.

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घरेलू पिचों पर नही रहे प्रभावी

देबाशीष भारतीय पिचों पर कारगर गेंदबाज साबित नही हुए. जबकि विदेशी धरती पर उन्होंने अपना नाम बनाया. ओडिशा की तरफ से देबाशीष  ने करीब 15 सालों तक क्रिकेट खेला.

विदेशी पिचों पर जहां वह जमकर विकेट चटकाते, तो वहीं भारत आते ही जैसे उनकी गेंदबाजी की धार कहीं गायब सी जाती. उनके छोटे क्रिकेट करियर का सबसे बड़ा यही कारण है. उन्होंने 2001 में अपना अंतिम वनडे मैच खेला था. मगर इसके बाद वह टीम में वापसी नही कर पाए.

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