ms dhoni 5 decision as captain

क्रिकेट की किताब में 7 जुलाई का दिन सुनहरे पन्नों में दर्ज है क्योंकि टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) का आज जन्मदिन है। धोनी का जन्म 7 जुलाई 1981 को झारखंड के रांची में हुआ था, जो पहले बिहार राज्य था। इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले चुके धोनी ने बतौर कप्तान हर उस मुकाम को हासिल किया जिसकी कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। फिर चाहे वो भारत को टी20 विश्व कप में चैंपियन बनाना हो, 28 साल बाद वनडे विश्व कप में भारत को विश्व विजेता बनाना हो, या फिर बतौर कप्तान भारत को चैंपियंस ट्रॉफी जितवाना हो। ऐसे कई अनेकों रिकॉर्ड्स बतौर कप्तान उन्होंने अपने नाम किए हैं।

सात तारीख, सातवां महीना और सात नंबर की जर्सी पहनने वाले महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) के बारे में हर कोई जानता है कि उन्होंने अपनी सोच से भारतीय टीम की कायाकल्प ही बदल कर रख दी थी। जैसा कि हमने आपको अभी बताया कि उन्होंने भारत को टी20, वनडे विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी में विजेता बनाया है लेकिन भारत के विजेता बनने के पीछे की बड़ी वजह थी, धोनी के वो चौकाने वाले फैसले। आज हम आपको माही के उन पांच बड़े फैसलों के बारे में बताएंगे, जिसमें उनकी सराहना तो हुई लेकिन साथ ही साथ आलोचना भी हुई।

जब MS Dhoni ने जोगिंदर शर्मा पर खेल दिया जुआ

MS Dhoni and Joginder Sharma

बात साल 2007 के टी20 विश्वकप के फाइनल की है जहाँ टीम इंडिया के सामने थी, पाकिस्तान की टीम। फाइनल मुकाबले में पाकिस्तान को आखिरी ओवर में जीत के लिए 13 रनों की दरकार थी। हरभजन सिंह का एक ओवर बाकी था लेकिन तभी कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) ने जोगिंदर शर्मा पर जुआ खेल दिया। मतलब आखिरी ओवर उन्हें दे दिया।

धोनी के इस फैसले से कई क्रिकेट पंडित हैरान हुए तो दूसरी तरफ फैंस ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की लेकिन जोगिंदर शर्मा ने मिस्बाह को अपनी गेंदबाजी में फंसाकर भारतीय फैंस और कप्तान का भी दिल जीत लिया। भारत ने पाकिस्तान को हराकर टी20 विश्वकप पर अपना कब्जा जमा लिया। अपने इस फैसले की वजह से धोनी पूरी दुनिया में मशहूर हो गए थे।

जब MS Dhoni ने दादा-द्रविड़ को वनडे टीम से किया बाहर

ms dhoni ganguly dravid

साल 2004 में महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) ने सौरव गांगुली की कप्तानी में टीम इंडिया में डेब्यू किया था लेकिन जब साल 2008 में धोनी भारतीय टीम के कप्तान बने तब उन्होंने सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ को वनडे टीम से बाहर कर दिया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ साल 2008 में ट्राई सीरीज खेला गया था और उसी सीरीज से उन्होंने इन दोनों खिलाड़ियों को वनडे टीम से बाहर कर दिया था।

उस वक़्त बीसीसीआई के सचिव निरंजन शाह थे और जब उनसे इसका कारण पूछा गया था, तब उन्होंने कहा था कि यह दोनों खिलाड़ी कमजोर फील्डर्स हैं। महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) के इस फैसले की थोड़ी आलोचना तो जरूर हुई थी लेकिन यहीं से भारतीय टीम में बदलाव का भी दौर शुरू हुआ था। बल्लेबाजी-गेंदबाजी के साथ-साथ भारतीय टीम ने फील्डिंग में भी बदलाव करने का निर्णय लिया था, जिसका लोहा आज भी पूरी दुनिया मान रही है।

जब 2011 के विश्व कप में युवी से पहले बल्लेबाजी करने आए MS Dhoni

MS Dhoni and Yuvraj Singh

25 जून 1983 को भारतीय टीम ने कपिल देव की कप्तानी में पहली बार विश्व कप जीतकर इतिहास रचा था लेकिन भारत को दूसरी बार विश्व विजेता बनने में 28 साल लग गए। 2 अप्रैल 2011, वानखेड़े का स्टेडियम, गौतम गंभीर की शानदार पारी और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni)का वो शानदार छक्का जिसकी बदौलत भारतीय टीम दूसरी बार विश्व चैंपियन बनी।

टीम इंडिया के दूसरी बार विश्व विजेता बनने के पीछे भी महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) का एक बहुत बड़ा फैसला छुपा हुआ था और वो फैसला था युवराज सिंह से पहले बल्लेबाजी करने के लिए मैदान पर आना। खुद धोनी ने इस बात का खुलासा किया कि आखिर क्यों उन्हें युवी से पहले आकर बल्लेबाजी करनी पड़ी थी, जो पूरे टूर्नामेंट में शानदार फार्म में थे।

एक इवेंट के दौरान धोनी ने कहा था,

“मैं श्रीलंका के ज्यादातर गेंदबाजों को जानता था। वे सीएसके की टीम का हिस्सा थे। मैंने खुद को इसलिए प्रमोट किया क्योंकि उस समय मुरलीधरन गेंदबाजी कर रहे थे। मैं उन्हें नेट्स में काफी खेल चुका था। मुझे पूरा यकीन था कि मैं उनका सामना कर सकता हूं और आसानी से रन भी बना सकता हूं। यह उन अहम कारणों में से था तब जब मैंने खुद को प्रमोट करने का फैसला किया था”।

वैसे, कहा यह भी जाता है कि महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) को इस फैसले पर सोचने के लिए सचिन तेंदुलकर ने मजबूर किया था। सचिन तेंदुलकर ने MS Dhoni को युवराज सिंह से पहले बल्लेबाजी करने जाने की सलाह दी थी। सचिन तेंदुलकर ने यह सलाह इसलिए दी थी ताकि दाएं और बाएं हाथ के बल्लेबाज का कॉम्बिनेशन बना रहे। सचिन तेंदुलकर यह जानते थे कि श्रीलंका की टीम दो शानदार स्पिनर के साथ खेल रही है, इसलिए भारतीय टीम को अपने बल्लेबाजी कॉम्बिनेशन को बनाए रखना था।

सचिन तेंदुलकर ने कहा,

“उस वक़्त गौतम गंभीर बहुत ही अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे और स्ट्राइक में लगातार बदलाव धोनी जैसा बल्लेबाज ही ला सकता था। फिर मैंने वीरू से कहा कि वो जाकर एमएस को बोल दे और नेक्स्ट ओवर शुरू होने से पहले वापस आ जाए क्योंकि मैं यहां से बिल्कुल नहीं हिलूंगा।”

सचिन तेंदुलकर की इस बात पर धोनी ने सोचा और फिर उन्होंने कोच गैरी क‌र्स्टन से बात की। जिसका नतीजा आज सबके सामने है।

जब MS Dhoni ने चलाई रोटेशन पॉलिसी

ms dhoni sachin sehwag and gambhir

महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) हमेशा से ही भारतीय टीम की फील्डिंग में सुधार करना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने ना चाहते हुए भी एक बहुत बड़ा दांव खेल दिया। साल 2012 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीबी सीरीज में धोनी ने, सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर के बीच रोटेशन पॉलिसी का इस्तेमाल किया।
उन्होंने इस रोटेशन पॉलिसी का इस्तेमाल विश्व कप 2015 को देखते हुए किया था लेकिन उनकी यह रोटेशन पॉलिसी फ्लॉप साबित हुई और भारतीय टीम विश्व कप 2015 के फाइनल तक भी नहीं पहुंच पाई।

साल 2012 में महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) अपनी रोटेशन पॉलिसी पर प्रयोग पर प्रयोग करते रहें, टॉप ऑर्डर में जमकर बदलाव किया लेकिन नतीजा यह रहा कि भारतीय टीम सीबी सीरीज के फ़ाइनल में भी नहीं जा पाई। उनके इस फैसले के कारण उन्हें काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। हालांकि, माही का यह फैसला कितना सही था और कितना गलत, इसका फैसला तो क्रिकेट फैंस ही कर सकते हैं।

चैंपियंस ट्रॉफी 2013 में MS Dhoni ने रोहित शर्मा पर लिया बड़ा फैसला

MS Dhoni and Rohit Sharma

23 जून 2013 को महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) की कप्तानी में भारतीय टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी पर कब्जा किया था। इसी के साथ वो आईसीसी की तीन ट्रॉफी जीतने वाले पहले कप्तान बन गए थे। भारत ने फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड को पांच रन से हराया था। चैंपियंस ट्रॉफी में भी धोनी ने एक बहुत बड़ा दांव खेला था जिससे आज पूरी दुनिया के गेंदबाज खौफ खाते हैं।

हम बात कर रहे हैं, वर्तमान में टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा की। चैंपियंस ट्रॉफी टूर्नामेंट के दौरान कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) ने मिडिल ऑर्डर में खेल रहे रोहित शर्मा से ओपनिंग कराने का फैसला लिया। रोहित शर्मा ने मिले हुए मौके को हाथ से जाने नहीं दिया और पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया।