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महेंद्र सिंह धोनी ही नहीं बल्कि इस खिलाड़ी ने भी भारत को दिलाया है दो बार विश्वकप 

महेंद्र सिंह धोनी ही नहीं बल्कि इस खिलाड़ी ने भी भारत को दिलाया है दो बार विश्वकप

इस देश में नेत्रहीन क्रिकेट को ज्यादा सराह नहीं जीता उस टीम के कप्तान शेखर नाईक ने बतौर कप्तान भारत के लिए 2 विश्वकप जीते हैं. 2012 में टी ट्वेंटी विश्वकप और 2014 में वनडे विश्वकप शेखर नाईक की कप्तानी में भारत ने जीता था.

शेखर नाईक ने अपने 13 साल के करियर में करीब 32 शतक लगाए हैं.धोनी के बाद अब इस दिग्गज भारतीय खिलाड़ी पर बनेगी बायोपिक रणवीर कपूर होंगे मुख्य भूमिका में

शेखर नाईक ने अपनी मां पर कहा, कि “मेरी मां ने मुझे कुछ बनने के लिए कहा था और कुछ हासिल करने के लिए कहा था जो मैनें किया.”

नेत्रहिन शेखर नाईक की जिंदगी काफी मुश्किल हालात में गुजरी हैं और शेखर जब 12 साल के थे तब उनके माता-पिता का निधन हो गया था.

शेखर नाईक ने अपनी जिंदगी के बारें में कहा, कि “जब मैं पैदा हुआ तब मैं पुरी तरह से नेत्रहीन था. मैं 8 साल का होने तक घर से बाहर नहीं गया. मेरे आजू बाजू के बच्चें मैं नेत्रहीन होने की वजह से मेरे साथ नहीं खेलते थे और मैं उससे काफी दुखी होता था.

उन्होंने आगे कहा,

“मेरी मां भी तब काफी रोती थी, लेकिन हमेशा मुझे कुछ बनने के लिए कहती थी. फिर मेरी आंखों का अॉपरेशन हुआ जिससे मैं एक आंख से तीन मीटर तक का देख सकता हूं. फिर मैं शिमोगा में स्कूल जाने लगा और वहां से मुझे क्रिकेट से लगाव हुआ.”

नायक ने आगे बताया, कि

“मैं नहीं जानता था की क्रिकेट क्या होता हैं. दूसरे बच्चों को खेलते हुए मैनें देखा, लेकिन मुझे पता नहीं था की ये कौनसा खेल हैं. फिर दूसरे बच्चें मेरे साथ खेलने लगे और मेरा खेल देखकर टिचर ने मुझे खेलने के लिए प्रोत्साहित किया. मुझे मेरी टीम में जगह मिली जिससे मेरी मां काफी खुश हुई. मेरी मां ने तब कहा था कि क्रिकेट से प्रसिद्ध होना. फिर मैनें काफी खेला और मुझे 2002 में टीम में चुना गया और बतौर खिलाड़ी 2009 में मैनें खेला. फिर 2010 में मुझे कप्तान बनाया गया और बतौर कप्तान भारत के लिए मैनें 2 विश्वकप जीते.”भारत को दो वर्ल्ड कप जीताने वाले भारतीय पूर्व कप्तान ने की बीसीसीआई से ये माँग

नेत्रहीन क्रिकेट की लोकप्रियता पर नायक ने कहा,

“नेत्रहीन टीम के लिए कोई आकर्षित नहीं होता, लेकिन 2014 में विश्वकप जीतने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमे बुलाकर हमारा स्वागत किया था. उन्होंने मन की बात कार्यक्रम में भी हमे बधाई दी थी.”\

नेत्रहीन क्रिकेट के बारे में बात करते हुए, नायक ने कहा,

“नेत्रहीन में तीन क्षेत्र होते हैं जैसे B1, B2, और B3. B1 में किसीको कुछ नहीं दिखता वो होते हैं. B2 में 3 मीटर तक दिखने वाले लोग होते हैं जिसमे मैं आता हूं और B3 के लोगों को 5 मीटर तक का दिखता हैं वो होते हैं. नेत्रहिन क्रिकेट में हम अंडर आर्म गेंदबाजी करते हैं और प्लास्टिक की गेंद से खेलते हैं. इस वजह से हम ज्यादा स्विप शॉट खेलते हैं.”

“भारत और पाकिस्तान के बीच मैच हमेशा तगड़ा होता हैं.”

“अगर क्रिकेट नहीं होता तो मैं घर में ही होता क्रिकेट ने मेरी जिंदगी बदल दी.”

“मुझे पद्मश्री अवॉर्ड भी मिला हैं और वो मैं मेरी मां को समर्पित करता हूं उनकी वजह से आज मैं यहां हूं.”

नायक ने अंत में कहा,

“मेरे अंदर अभी काफी क्रिकेट बचा हैं और नेत्रहीन होना ये एक भगवान की देन ही हैं. अगर मैं नेत्रहीन नहीं होता तो शायद ही मैं मेरे देश का प्रतिनिधित्व करता.”

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