मुरली विजय ने संन्यास पर तोड़ी चुप्पी, पृथ्वी शॉ के साथ प्रतिस्पर्धा पर कही ये बात

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मुरली विजय ने संन्यास पर तोड़ी चुप्पी, साथ ही पृथ्वी शॉ के साथ प्रतिस्पर्धा पर कही ये बात 

मुरली विजय ने संन्यास पर तोड़ी चुप्पी, साथ ही पृथ्वी शॉ के साथ प्रतिस्पर्धा पर कही ये बात

मुरली विजय का फॉर्म पिछले काफी समय से ख़राब हैं. वह भारतीय टीम के लिए ना, तो इंग्लैंड में रन बना पाये थे और ना ही वह भारतीय टीम के लिए ऑस्ट्रेलिया दौरे में रन बना पाये थे. साल 2018 की शुरूआत में हुए साउथ अफ्रीका दौरे में भी वह बुरी तरह फ्लॉप साबित हुए थे.

मुरली विजय को इंग्लैंड के खिलाफ अंतिम तीन टेस्ट मैचों की टीम से बाहर कर दिया गया था. वहीं वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू दो मैचों की टेस्ट सीरीज में भी उन्हें जगह नहीं दी गई थी.

मुरली विजय ने अपने संन्यास पर तोड़ी चुप्पी 

prathvi shaw may take place of murli vijay in Future test series Of India

काउंटी क्रिकेट व घरेलू क्रिकेट में किये गए शानदार प्रदर्शन के बाद मुरली विजय को ऑस्ट्रेलिया दौरे में जगह मिली थी, लेकिन वह ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी फ्लॉप रहे थे और इसके बाद उन्हें टीम की प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया था.

मुरली विजय का क्रिकेट करियर अब खत्म माना जा रहा है. लेकिन इसी बीच उन्होंने अपने संन्यास पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा है, कि जब तक उनका दिल उन्हें खेलने की इजाजत देगा, तब तक वह खेलते रहेंगे.

तब तक खेलूंगा जब तक मेरा दिल मुझे खेलने की इजाजत देगा

मुरली विजय ने स्पोर्ट्स स्टार से बातचीत करते हुए अपने बयान में कहा,

“मैं तब तक खेलूंगा जब तक मेरा दिल मुझे खेलने की इजाजत देगा. आप मुझे क्रिकेट से दूर नहीं रख सकते है.  मैं फिट हूं और केवल 34 साल का हूँ.

मेरे अंदर अभी काफी टेस्ट क्रिकेट बची है. हाल ही में, मुझे कुछ अच्छी डिलीवरी मिली हैं, या फिर कुछ अन्य कारक ऐसे रहे, जिसकी वजह से मैं प्रदर्शन नहीं कर पाया. मैं भारत के लिए फिर से अपने बेहतरीन पल को जीना चाहता हूँ.”

नए खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी के रूप में नहीं देखता

मुरली विजय ने आगे अपने बयान में कहा,

“मैं खुद को किसी भी नये खिलाड़ी के साथ एक प्रतिस्पर्धी के रूप में नहीं देखता हूँ. दो साल पहले, मैंने कहा था कि पृथ्वी शॉ देश के लिए खेलेंगे, और अब वह आज देश के लिए खेल रहे है, तो मैं उनके लिए खुश हूं.

मैंने देश के लिए लगभग 4,000 टेस्ट रन बनाए हैं.  मैंने इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में मुश्किल परिस्थितियों में रन बनाए हैं और मैं उस दौर से गुज़रा जब वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर थे. मैं प्रतिस्पर्धा से भयभीत महसूस नहीं करता.”

 

 

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