आधुनिक युग मे विकेट कीपर बल्लेबाज की प्राथमिकता धोनी और गिलक्रिस्ट की देन

SAGAR MHATRE / 06 September 2015

साल 2001 की बात है, जब अॉस्ट्रेलिया टीम भारत आयी थी. भारत के 176 रन के जवाब में अॉस्ट्रेलिया का स्कोर 5 विकेट पर 99 रन था. लेकिन तभी एडम गिलक्रिस्ट आए, और शानदार शतक लगाकर, अॉस्ट्रेलिया को जीत दिलाई.

तो वहीं 2013 में, अॉस्ट्रेलिया के खिलाफ महेंद्र सिंह धोनी ने शानदार दोहरा शतक लगाकर, भारत को वो मैच जीताया.

 वो एडम गिलक्रिस्ट ही थे, जिन्होंने विकेटकीपर की मानसिकता बदली. और फिर विकेटकीपर को, बल्लेबाज कीपर जानने लगा.

फिलहाल, जोश बटलर, रिद्धिमान साहा, दिनेश चंदिमाल, पीटर नेविल, और डि कॉक जैसे विकेट कीपर बल्लेबाज आए है.

सबसे ज्यादा टेस्ट वेस्टइंडीज के दिनेश रामदीन ने खेले है. और दुसरे हर देश में नये विकेटकीपर आए है.

 

विकेटकीपर सिर्फ रन ही नहीं बनाते, बल्कि दूसरे खिलाडियों को भी चोटिल होने से बचाते है. अब कुमार संगाकारा ज्यादा देर श्रीलंका के लिए खेले, इसलिए काफी साल प्रसन्ना जयवर्धने को विकेटकीपर बनाया था, श्रीलंका ने. डिविलियर्स के लिए भी, अफ्रिका ने डि कॉक को चुना है. तो मैकुलम को फीट रखने के लिए, न्यूजीलैंड ने वॉटलिंग, और रोंची को मौका दिया.

नंबर 7 पर बल्लेबाजी करना, हर फॉरमेट में काफी मुश्किल रहता है. टेस्ट में निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ, नयी गेंद का सामना भी करना पडता है.

और ज्यादातर विकेटकीपर बल्लेबाज, काफी आक्रमक बल्लेबाज होते है. जो अपनी टीम के लिए काफी उपयोगी होते है. बटलर इंग्लैंड के लिए, सरफराज पाकिस्तान के लिए, जो ऐसे बल्लेबाज है, जो दुसरे धीमी बल्लेबाजी करने वालें बल्लेबाजों से दबाव कम करते है.

विकेटकीपर को एक खुली छुट दी जाती है, जिससे वे किसी भी जगह पर आक्रमक खेलते है. इन सबमे सरफराज का औसत सबसे ज्यादा है. और भविष्य में इन विकेटकीपरों पर काफी दारोमदार होगा.

Related Topics