फ्रेंडशिप-डे: टीम इंडिया के जय-वीरू, एक दूसरे के लिए चयनकर्ताओं से भीड़ गए थे

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फ्रेंडशिप-डे: सुरेश रैना नहीं बल्कि यह खिलाड़ी था टीम इंडिया में धोनी का सबसे करीबी दोस्त, चयन के लिए चयनकर्ताओ से की थी लड़ाई 

फ्रेंडशिप-डे: सुरेश रैना नहीं बल्कि यह खिलाड़ी था टीम इंडिया में धोनी का सबसे करीबी दोस्त, चयन के लिए चयनकर्ताओ से की थी लड़ाई

आज पूरा विश्व फ्रेंडशिप-डे मन रहा है. हर कोई अपने अजीज दोस्त को यह बताने की कोशिश कर रहा है कि तुम मेरे लिए कितने खास हो. वास्तव में दोस्ती दुनिया के सबसे खूबसूरत रिश्तों में से एक है. वैसे तो हर रिश्ता अपने आप में खास होता है, लेकिन इसमें ख़ासियत यह होती है कि इसे खुद हम तय करते हैं. आज इस मौके पर टीम इंडिया के दो दोस्तों के बारे में बताएंगे. जिनका दोस्ताना सुन आप उन्हें जय वीरू का नाम देने लगेंगे.

दरअसल, हम बात कर रहे हैं महेंद्र सिंह धौनी और रुद्र प्रताप सिंह की दोस्ती का. जिनके बारे में कई तरह के किस्से आपने पहले भी सुने होंगे. जब धोनी कप्तान थे तो आरपी सिंह टीम के नियमित सदस्य हुआ करते थे. ऐसा कहा जाता है कि धौनी एक बार चयनकर्ताओं से उनके सिलेक्शन को लेकर भिड़ भी चुके हैं.

धोनी ने की थी चयनकर्ताओं से लड़ाई

दरअसल, वो दौर था जब आरपी सिंह अपने ख़राब फार्म से जूझ रहे थे, जिस वजह से उन्हें चयनकर्ताओं ने टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया था. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो 2008 में आरपी सिंह को टीम से बाहर किए जाने को लेकर धोनी चयनकर्ताओं से भिड़ भी गए थे. हालांकि इसके बावजूद आरपी सिंह टीम में जगह नहीं मिल पाई थी.

धोनी के सबसे अच्छे दोस्तों में शुमार

धोनी के हर जश्न या कार्यक्रम में आरपी सिंह जरूर नजर आते हैं. जब धोनी ने हमर गाड़ी ली हो, या अपना घर बनवाया हो, हर खास मौके पर आरपी सिंह उनके साथ रहे हैं. धोनी और साक्षी की शादी में भी बहुत कम लोग दिखे थे और आरपी सिंह वहां भी सबसे आगे ही नजर आए थे. धोनी कितने भी बिजी रहे हों, लेकिन आरपी सिंह के लिए वो अकसर समय निकाल ही लेते हैं.

शर्मनाक था आखिरी टेस्ट

आरपी सिंह ने अपने करियर का आखिरी टेस्ट 2011 में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था. भारतीय टीम 2011 में इंग्लैंड दौरे पर जूझ रही थी और तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार चोटिल हो गए थे.

आरपी सिंह उन दिनों अमेरिका में छुट्टियां मना रहे थे और वहां से डायरेक्ट आकर टीम से जुड़े. टीम पहले ही तीन टेस्ट गंवा चुकी थी और आखिरी टेस्ट लंदन के द ओवल में खेला जाना था.

आरपी सिंह मैच के लिए फिट भी नहीं थे और कोई मैच प्रैक्टिस भी नहीं की थी. आरपी सिंह इस टेस्ट में एक भी विकेट नहीं ले पाए और अपनी गेंदबाजी से कप्तान धौनी समेत सबको काफी निराश किया था.

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