पाकिस्तान क्रिकेट टीम

कोरोना काल के बीच अब क्रिकेट की मैदान पर वापसी हो चुकी है। जहां, पाकिस्तान क्रिकेट टीम 3 मैचों की टेस्ट व 3 मैचों की टी20आई सीरीज खेलने के लिए इंग्लैंड पहुंची हुई है। लेकिन अब पाकिस्तान टीम को एक यूके कंपनी ने खिलाड़ियों के सामान को जब्त करने की धमकी दी है, क्योंकि पाकिस्तान 33 मिलियन की भरपाई करने में नाकामियाब रहा है।

पाकिस्तानी खिलाड़ियों को मिली सामान जब्त करने की धमकी इंग्लैंड पहुंची पाकिस्तान क्रिकेट टीम को मिली समान जब्त करने की धमकी, 33 मिलियन की भरपाई नहीं कर पाया पाकिस्तान 1

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के खिलाड़ी इस वक्त इंग्लैंड दौरे पर हैं। जहां दोनों टीमों के बीच 3-3 मैचों की सीरीज खेलनी है और सीरीज का आगाज 5 अगस्त से होने वाला है। लेकिन अब इस बीच पाकिस्तान क्रिकेट टीम मुश्किल में फंसती नजर आ रही है। क्योंकि टीम को धमकी मिली है की खिलाड़ियों का सामान जब्त किया जा सकता है। द वायर के मुताबिक, ब्रॉडशीट एलएलसी द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि,

“पाकिस्तान क्रिकेट टीम इस समय इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज की तैयारी में है। हम मानते हैं कि टीम प्रतिवादी की एक संपत्ति है और टीम की संपत्ति मुकदमेबाजी के लिए प्रतिवादी की संपत्ति है।”

33 मिलियन चुकाने में विफल रहा पाकिस्तान

ब्रॉडशीट एलएलसी कंपनी ने पाकिस्तानी सरकार और राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (NAB) के खिलाफ मध्यस्थता का मुकदमा जीता है। यही कारण है कि इस कंपनी ने पहले ही पेशेवर जमानतदारों को ‘पाकिस्तानी क्रिकेट टीम की संपत्ति जब्त करने’ का निर्देश देते हुए अदालत के आदेशों की मांग की है और उनकी कार्रवाई दो दिनों में शुरू होगी।

इस्लामाबाद के काउंसेल एलन और ओवरी को भेजे गए एक पत्र में कंपनी ने तर्क दिया है कि पाकिस्तान और एनएबी 33 मिलियन डॉलर से अधिक की राशि का भुगतान करने में विफल रहे हैं। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने ये भी तर्क दिया है कि बोर्ड पाकिस्तान सरकार के अधीन नहीं है।

जानिए क्या है पूरा विवाद

पाकिस्तान क्रिकेट टीम

कोरोना वायरस के बीच पाकिस्तान की टीम पर यूके की कंपनी द्वारा दी गई धमकी का क्या कारण है? दरअसल, ये एक कानूनी विवाद है, जो सन् 2000 के दशक में पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने विदेशों में पाकिस्तानी नागरिकों की छिपी हुई संपत्ति का पता लगाने के लिए ब्रॉडशीट को हायर किया था।

पाकिस्तान के राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) ने ब्रॉडशीट के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर भी किए थे, लेकिन इसे 2003 में समाप्त कर दिया गया था। समझौते के खत्म होने के कारण कानूनी विवाद पैदा हो गया और जब लंदन में एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत ने 2018 में ब्रॉडशीट के पक्ष में फैसला सुनाया। इस दौरान कोर्ट ने पाया कि NAB को कंपनी की क्षतिपूर्ति यानि 33 मिलियन का भुगतान करना है, जो कि आज तक बकाया है।