कभी रिक्शा चलाता था ये पाकिस्तानी खिलाड़ी अब पीसीबी ने दी बड़ी जिम्मेदारी 1

भारतीय क्रिकेट कन्ट्रोल बोर्ड अपनी क्रिकेट टीम के लिए काफी ज्यादा गंभीर नजर आती है। बीसीसीआई हर बार टीम के हित को देखते हुए किसी ना किसी तरह बेहतर से बेहतर करने का प्रयास करती है। जिसका एक बड़ा प्रभाव भारतीय क्रिकेट के विकास पर दिख रहा है। उसी तर्ज पर अब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने भी अपनी टीम की स्थिति को बेहतर करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है।

बीसीसीआई की तरफ पीसीबी ने मोहम्मद युसुफ को दी बड़ी जिम्मेदारी

जी हां पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने गुरुवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए अपनी टीम के बेहतर भविष्य की तरफ देखते हुए अपने देश के नेशनल हाई परफॉरमेंस सेंटर का बल्लेबाजी कोच पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद युसुफ को बनाया है।

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पाकिस्तान क्रिकेट इतिहास के एक शानदार बल्लेबाज रहे मोहम्मद युसुफ को पीसीबी ने ये बड़ी जिम्मेदारी सौंपकर अपने देश में युवा खिलाड़ियों को तैयार करने की तरफ कदम बढ़ाया है।

अब मोहम्मद युसुफ राहुल द्रविड़ की तरह करेंगे काम

पीसीबी ने गुरुवार को इस बारे में कुछ बड़े फैसले लिए जिसमें लाहौर में स्थित नेशनल हाई परफॉरमेंट सेंटर में बल्लेबाजी कोच के रूप में तो मोहम्मद युसुफ को नियुक्त किया है तो वहीं स्पिन गेंदबाजी सलाहकार के रूप में मुश्ताक अहमद को जिम्मेदारी दी।

धर्म परिवर्तन

बीसीसीआई ने जिस तरह से भारतीय क्रिकेट में पूर्व महान बल्लेबाज राहुल द्रविड़ को जिम्मेदारी दी है उसी तरह की जिम्मेदारी अब पाकिस्तान के लिए मोहम्मद युसुफ संभालेंगे। मोहम्मद युसुफ ने पाक क्रिकेट में बड़ा योगदान दिया है।

मोहम्मद युसुफ का जीवन बिता है काफी गरीबी में

पाकिस्तान के दिग्गज बल्लेबाजों में शुमार रहे मोहम्मद युसुफ का शुरुआती जीवन काफी तंगहाली में बिता है। मोहम्मद युसुफ का जन्म एक बहुत ही गरीब परिवार में हुआ। ईसाई परिवार में जन्म लेने वाले युसुफ योहाना नाम के इस खिलाड़ी ने पाकिस्तान की टीम में आने के कुछ साल बाद मुस्लिम धर्म को अपनाया।

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मोहम्मद युसुफ

लेकिन उनके शुरुआती जीवन की बात करें तो उनके परिवार में आर्थिक संकट रहा है। उनके पिता रेलवे स्टेशन पर सफाईकर्मी थे। इससे परिवार का गुजर बसेरा करना बड़ा मुश्किल था जिसके बाद युसुफ को बचपन में ही एक दर्जी की दुकान पर काम करना पड़ा।

मोहम्मद युसुफ रहे हैं एक गरीब परिवार से, चलाना पड़ा है रिक्शा

उनके अंदर क्रिकेट की प्रतिभा कूट-कूट पर भरी पड़ी थी। लेकिन काफी गरीब होने के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ा। क्रिकेट का शौक ऐसा था कि बैट खरीदना मुश्किल देख लकड़ी के फट्टे से बैट बनाया। शुरुआत में टेनिस की गेंद से उन्होंने बल्लेबाजी का कौशल दिखाया।

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युसुफ के परिवार में काफी ज्यादा वित्तिय संकट देखा गया। लेकिन उन्होंने काम करते हुए क्रिकेट को नहीं छोड़ा। उन्हें 16 साल की उम्र में लाहौर के गोल्डन जिमखाना क्लब में खेलने के दौरान प्रतिभा को बाकी लोगों ने देखा। उन्होंने पाकिस्तान की टीम में जगह बनाने का सफर शुरू कर दिया तो वहीं उस दौरान दर्जी की दुकान पर काम करने के साथ ही रिक्शा भी चलाते थे।

जिम्मेदारी मिलने के बाद कही ये बात

इतने कड़े संघर्ष के बाद मोहम्मद युसुफ पाकिस्तान की क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक साबित हुए। उनके इसी योगदान के बीच अब पीसीबी ने नेशनल कोचिंग सेंटर पर बल्लेबाजी कोच की जिम्मेदारी दी है। ये जिम्मेदारी मिलने के बाद युसुफ ने कहा कि

कोचिंग में करियर बनाने की मेरी महत्वाकांक्षा एक खुला रहस्य है लेकिन ये सही समय और हमारी भविष्य की क्रिकेट के लिए उचित रोडमैप से जुड़ा है। जिसमें मैं प्रभावी तरीके से योगदान दे सकता हूं। मेरा मानना है कि ये मेरे लिए अपनी दूसरी पारी शुरू करने का सही समय है क्योंकि मैं इसके प्रति आशान्वित हूं मैं ये अवसर मिलने से खुश हूं और मुझे पूरा विश्वास है कि मैं अपने ज्ञान और अनुभव से युवा क्रिकेटरों की मदद कर सकता हूं।”