अफगानिस्तान प्रीमियर लीग पर भड़का पाकिस्तान,यूएई क्रिकेट

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अफगानिस्तान प्रीमियर लीग की खबर पर भड़का पाकिस्तान,यूएई क्रिकेट बोर्ड से मांगा लिखित जवाब 

अफगानिस्तान प्रीमियर लीग की खबर पर भड़का पाकिस्तान,यूएई क्रिकेट बोर्ड से मांगा लिखित जवाब

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड अपने यहां अतंर्राष्ट्रीय सीरीज करने के लिए हर हथकंडे आजमा रहा है। लेकिन उसे अभी तक कोई सफलता नहीं मिली। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड पीएसएल के जरिए अपनी खोई हुई छवि वापस पाना चाहता है। लेकिन उसकी उम्मीदों पर एक बार फिर पानी फिरता दिख रहा है। दुनिया के कई बड़े खिलाड़ियों ने पाकिस्तान में खेलने से इंकार कर दिया था। लेकिन अब पाकिस्तान अफगानिस्तान के बीच अड़गा बनने जा रहा है।

पाकिस्तान अब अक्टूबर में संयुक्त अरब अमीरात में होने वाले अफगानिस्तान लीग में अड़गा लगाने जा रहा है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड से लिखित तौर पर अक्टूबर से मार्च तक कोई भी टूर्नामेंट न कराए जाने का जवाब माँगा है।

अक्टूबर में प्रस्तावित हैं अफगानिस्तान लीग

अफगानिस्तान पहली बार टी-20 लीग का आयोजन कराए जाने का विचार बनाया है। भारतीय खिलाड़ियों को इस लीग में खेलने के लिए अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई से बात भी कर रहा है। उधर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने संयुक्त अरब अमीरात क्रिकेट बोर्ड से लिखित तौर पर जवाब मांगा है।

पीसीबी ने कहा कि लिखित तौर पर जवाब दें कि वो अक्टूबर से नंवबर तक कोई लीग आयोजित नहीं करवाएंगे। क्योंकि पाकिस्तान इस दौरान पीएसएल के आलावा और कई अंतर्राष्ट्रीय सीरीज आयोजित करवाता है।

जियो टीवी से बात करते हुए पीसीबी के एक आधिकारी ने कहा कि, ”हमने एसीबी से लिखित आश्वासन मांगा है। वे अक्टूबर से मार्च तक किसी भी टी-20 लीग की मेजबानी नहीं करेंगे। यह हमारे ऑस्ट्रेलिया,न्यूजीलैंड और पाकिस्तान सुपर लीग के इंटरेस्ट को कम कर सकता है।”

 

जवाब ना देने पर मलेशिया का रूख करेगा पाकिस्तान

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने साफ तौर पर कहा कि अगर वो किसी भी तरह से जवाब देने में असमर्थ हैं,तो ऐसी स्थित में वो मलेशिया का रूख कर सकते हैं। पीसीबी अधिकारी ने कहा कि यद वो इस मामले में स्पष्टीकरण देने में असमर्थ रहे,तो बोर्ड को अपने घरेलू खेलों को मलेशिया में स्थानांतरित करने की संभावना तलाशेगा। हालांकि ये देखना दिलचस्प होगा कि अंत में पीसीबी क्या फैसला लेता है?

अधिकारी ने कहा, “अगर वे हमें यह प्रतिबद्धता नहीं देते हैं, तो हम मलेशिया में अपने कार्यक्रम को स्थानांतरित करने का विकल्प चुन सकते हैं। हमने उनकी सुविधाओं की जांच की और ये सही हैं।”

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