पृथ्वी शॉ और सचिन तेंदुलकर

अपने पहले ही टेस्ट मैच में शतक और दिलीप ट्रॉफी में सबसे कम उम्र में शतक लगाकर चर्चा में आये थे पृथ्वी शॉ। उस समय लोग उनकी तुलना मास्टर बल्लेबाज  से करने लगे थे। क्योकि टेस्ट में सबसे कम उम्र में शतक बनाने का रिकॉर्ड उनके नाम हुआ था। जल्द ही उनकी बल्लेबाजी पर सवाल उठने लगे कि एक टेस्ट में शतक लगाने से कोई अच्छा बल्लेबाज नहीं बन जाता। पूरे देश में उनके आलोचकों की संख्या लगातर बढ़ती गई। लेकिन, विजय हजारे ट्रॉफी के ग्रुप डी में मुंबई और पुडुचेरी के बीच लीग मैच में शॉ ने दोहरा शतक लगाकर आलोचकों के मुँह पर ताला लगा दिया।

सचिन तेंदुलकर

पारी में जड़े 31 चौके और 5 छक्के

विजय हजारे ट्रॉफी के छठे दिन मुंबई और पुडुचेरी के बीच खेले जा रहे मैच में जब पृथ्वी शॉ सलामी बल्लेबाज के तौर पर उतरे तब उनके मन में खुद को साबित करने का अलग ही जूनून था। पुडुचेरी ने टॉस जीतकर पहले फील्डिंग का फैसला किया और मुंबई के अन्य सलामी बल्लेबाज यशस्वी जैसवाल (10) को 58 रन के कुल योग पर पवेलियन का रास्ता दिखा दिया। लेकिन, इसके बाद तो जैसे रनों की आंधी आ गई।

पृथ्वी शॉ

पृथ्वी शॉ ने पहले आदित्य तरे और फिर सूर्य कुमार यादव के साथ मिलकर पुडुचेरी के गेंदबाजों की बखिया उधेड़ कर रख दी। दोनों ने मैदान के चारो तरफ शॉट मारे। पृथ्वी शॉ ने पहले दित्य तरे के साथ 153 और फिर सूर्यकुमार यादव के साथ 201 रनों की साझेदारी की। इस पूरी पारी में पृथ्वी शॉ की बैटिंग ने सभी का दिल जीत लिया। शॉ ने सिर्फ 152 गेंदों में 227 रनों की दिलकश पारी खेली, इस दौरान उन्होंने 31 चौके और 5 छक्के जड़े।

शॉ ने पुडुचेरी के किसी भी गेंदबाज को नहीं बक्सा। मुंबई के अन्य बल्लेबाज आदित्य तरे और सूर्यकुमार यादव ने उनका भरपूर साथ दिया। पृथ्वी के जबरदस्त दोहरे शतक की बदौलत मुंबई ने पुडुचेरी के सामने 50 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 457 रनों का पहाड़ खड़ा कर दिया।