एक खिलाड़ी के तौर पर नहीं तो क्या हुआ कोच बनते ही विश्वकप जीते राहुल द्रविड़

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16 साल के लम्बे करियर में खिलाड़ी के रूप में जो कभी न कर सके राहुल द्रविड़ वो कोच बनते ही महज 2 साल में किया हासिल 

16 साल के लम्बे करियर में खिलाड़ी के रूप में जो कभी न कर सके राहुल द्रविड़ वो कोच बनते ही महज 2 साल में किया हासिल

एक खिलाड़ी अपने देश का प्रतिनिधित्व करने के दौरान एक बड़ा सपना पाले रखता है। उनका ये सपना देश के लिए खेलने के दौरान ज्यादा से ज्यादा अपनी तरफ से योगदान देने के साथ ही देश के लिए ऐसी किसी प्रतिष्ठित ट्रॉफी को जीतना होता है, जिसको हासिल करने के बाद अपने आप में ही गर्व महसूस हो। इसी तरह से क्रिकेट में भी यहीं होता है। हर खिलाड़ी एक ना एक दिन विश्वकप विजेता टीम का हिस्सा बनने का सपना अपने अंदर पाले रखता है।

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राहुल द्रविड़ कभी नहीं रह सके विश्वविजेता टीम का हिस्सा

इस सपने को साकार करने के सफर के दौरान कई खिलाड़ी तो विश्वकप की ट्रॉफी को चुमने का अवसर हासिल कर लेते हैं लेकिन कई ऐसे दिग्गज भी रहे हैं। जो अपने जबरदस्त खेल के बाद भी इस प्रतिष्ठित ट्रॉफी को छुने से वचिंत रह जाते हैं। इसी में से भारतीय क्रिकेट में भी एक नाम है महान बल्लेबाज राहुल द्रविड़… राहुल द्रविड़ के द्वारा देश के लिए दिए गए योगदान को कोई नहीं भूल सकता है। लेकिन एक खिलाड़ी के तौर पर राहुल द्रविड़ जबरदस्त कामयाबी के बाद भी विश्वकप विजेता टीम का हिस्सा नहीं बन सके।

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कोच के रूप में राहुल द्रविड़ ने अंडर-19 भारतीय टीम को बनाया चैंपियन

न्यूजीलैंड की मेजबानी में खेले गए आईसीसी अंडर-19 क्रिकेट विश्वकप में राहुल द्रविड़ युवा भारतीय टीम के कोच के तौर पर वहां पहुंचे और उन्होंने इन युवा खिलाड़ियों को ऐसा परिपक्व बना लिया जो फाइनल मैच में ऑस्ट्रेलिया को हराते हुए खिताबी जीत तक पहुंचे। एक कोच के तौर पर राहुल द्रविड़ ने पहले प्रयास में ही विश्वकप जीत लिया, लेकिन खिलाड़ी के तौर पर राहुल द्रविड़ इसे पाने से नाकाम रहे।

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खिलाड़ी के तौर पर राहुल द्रविड़ को नहीं मिल सका विश्वकप का खिताब

राहुल द्रविड़ को भारत का ही नहीं क्रिकेट जगत का सबसे महान बल्लेबाजों में गिना जाता है। राहुल द्रविड़ ने भारतीय क्रिकेट को बहुत कुछ दिया है। जिसके योगदान से उन्हें महान कहने में कोई आपत्ति नहीं होगी लेकिन राहुल द्रविड़ को खिलाड़ी के तौर पर एक विश्वकप विजेता टीम का हिस्सा नहीं बन पाने का मलाल जरूर रहेगा।

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2003 के विश्वकप में फाइनल में पहुंचकर मिली हार

भारतीय क्रिकेट टीम की तरफ से खेलते हुए राहुल द्रविड़ सबसे पहले 1999 का विश्वकप खेले लेकिन इसमें भारतीय टीम का सफर नॉकआउट तक ही चल सका। इसके बाद साल 2003 में भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी में हुए विश्वकप में यादगार प्रदर्शन किया और फाइनल में पहुंच कर ही दम लिया। लेकिन यहां पर भारतीय टीम फिसल गई और विश्वकप का खिताब भी फिसल गया।

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2007 के विश्वकप में बुरे सपने की तरह रहा सफर

राहुल द्रविड़ इसके बाद अगले विश्वकप यानि 2007 के विश्वकप में खुद भारतीय टीम के कप्तान के तौर पर रहे। राहुल द्रविड़ की कप्तानी में भारतीय टीम से बड़ी उम्मीदें थी लेकिन ये विश्वकप भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे काले अध्याय में शुमार हो गया। इस विश्वकप में वो हुआ जिसकी किसी ने भी उम्मीद नहीं की थी। भारतीय टीम खिताब की सबसे बड़ी दावेदार तो थी लेकिन एक शर्मनाक तरीके से सफर ग्रुप दौर में ही थम गया। और राहुल द्रविड़ के लिए विश्वकप का खिताब जीतने का सपना भी रह गया।

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