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दिनेश चंदिमल को टीम में जगह न देने पर जयसूर्या पर भड़के पूर्व कप्तान रणतुंगा, कहा भूल गया जो हमने उसके साथ किया वो युवाओ के साथ नहीं कर रहा 

दिनेश चंदिमल को टीम में जगह न देने पर जयसूर्या पर भड़के पूर्व कप्तान रणतुंगा, कहा भूल गया जो हमने उसके साथ किया वो युवाओ के साथ नहीं कर रहा
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जिम्बाब्वे के विरुद्ध खेली जा एकदिवसीय के लिए चंदिमल को टीम से बाहर किये जाने के बाद विश्वकप विजेता पूर्व श्रीलंकन कप्तान अर्जुन रणतुंगा श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड के चयनकर्ता प्रमुख सनथ जयसूर्या पर जमके बरसे हैं.

चंदिमल को सीरीज के पहले दो एकदिवसीय मैचों के लिए जगह नहीं मिली, हालांकि चयनकर्ताओं ने उन्हें तीसरे एकदिवसीय से टीम में शामिल करने का वादा किया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

लहिरू थिरिमने और दिनेश चंदिमल की तारीफ़

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पूर्व श्रीलंकन कप्तान अर्जुन रणतुंगा ने चंदिमल और थिरिमने को महेला जयवर्धने और संगाकारा के बाद सर्वश्रेठ खिलाड़ी बताया. रणतुंगा ने क्रिकबज़ को दिए इंटरव्यू में कहा, “महेला (जयवर्धने) और कुमार (संगकारा) के बाद मैंने देखा है, कि लाहिरू थिरिमने और दिनेश चंदिमल सबसे अच्छे खिलाड़ी हैं. चयनकर्ताओं ने पहले ही एक को नष्ट कर दिया है और वे दूसरे को नष्ट करने की प्रक्रिया में हैं. नेचुरल प्रतिभा को मारने के लिए हम क्यों संघर्ष कर रहे हैं क्योंकि हम अपनी प्रतिभाओं को कुप्रबंधित कर चुके हैं.”

मर्वन अट्टापट्टू और जयसूर्या का दिया उदहारण

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जयसूर्या को पिछले वर्ष मई में बोर्ड के प्रमुख चयनकर्ता बनाया गया था, इसके बाद हाल में ही 2 दिन पहले उनका कार्यकाल दिसम्बर 2017 तक के बढाया गया हैं. रणतुंगा ने पूर्व श्रीलंका कप्तान मर्वन अट्टापट्टू और ख़ुद जयसूर्या का उदाहरण देकर जयसूर्या की क्लास लगाई.

रणतुंगा ने कहा, “इन युवा खिलाड़ियों को संरक्षित करने की जरूरत है. मर्वन (अटापट्टू) ने अपनी पहली छठीं पारी में पांच जीरो किये थे, लेकिन हम जानते थे कि उनमे प्रतिभा है और उन्हें पूरी तरह से समर्थन मिला. अंत में उन्होंने क्या हासिल किया. वह 5500 टेस्ट रन बनाकर रिटायर्ड हुए, इतने रन मैं भी नहीं बना सका.”

रणतुंगा ने आगे कहा, “अपने पहले 55 एकदिवसीय मैचों में सनथ ने केवल एक अर्धशतक बनाया. उसे टीम से निकालने के लिए हमारे उपर दवाब था, लेकिन हम उसे जानते हुए कि वह अनुभव हासिल करने के बाद वह क्या हासिल करने में सक्षम था. मैं दुखी हूँ कि सनथ उन धैर्यों को नहीं दिखा रहा है, जो हमने उनके साथ दिखाया था.”

जयसूर्या के 4 वर्षो के कार्यकाल से निराश है रणतुंगा

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2011 में संन्यास के बाद से, जयसूर्या 4 वर्षो तक चयनकर्ताओं के अध्यक्ष रहे हैं. रणतुंगा ने श्रीलंका की मौजूदा स्थिति के लिए जयसूर्या को दोषी ठहराया हैं. उनका मानना ​​है, जयसूर्या युवा खिलाड़ियों को सपोर्ट नहीं करते हैं.

रणतुंगा ने कहा, “मैं निराश हूँ कि सनथ युवा खिलाड़ियों की रक्षा करने और भविष्य के लिए टीम बनाने में नाकाम रहे हैं. अनिर्मित प्रतिभा दुर्लभ है और सनथ को अनिर्मित प्रतिभा को मारना चाहिए. चंदिमल ने अपनी उम्र के अनुसार बहुत अच्छा किया है, चंदिमल ने 27 वर्ष की उम्र में 4 शतक लगायें है, जोकि इस उम्र तक संगकारा और अरविंद डी सिल्वा जैसी दिग्गज खिलाड़ियों ने भी नहीं किया था. चैंपियंस ट्राफी उनके लिए ख़राब रही, लेकिन यह एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी है, उन्हें इस तरह नज़रंदाज़ किया जाना ठीक नहीं हैं.”

रणतुंगा ने कहा,  “वर्तमान जिम्बाब्वे सीरीज उनके लिए आदर्श आत्मविश्वास पाने का एक आदर्श मौका है. वे चौथे, पांच, छठे और किसी भी जगह बल्लेबाज़ी करने में सक्षम है. उन्हें एक स्थान पर सेटल होने दें और फिर वह आपके लिए एक बेहतरीन खिलाड़ी साबित होगा.”

रणतुंगा ने अंत में कहा, “मेरे करियर में, जब मैं एक ऐसे स्तर पर पहुंच गया जहां मैं जिम्मेदारी ले सकता था, तब मैंने दुलिप (मेंडिस) और रॉय (डायस) जैसे दिग्गज अनुभव खिलाड़ियों को बल्लेबाजी क्रम नीचे दिया और अरविंदा (डी सिल्वा) को भी उपरीक्रम में ज्यादा मौके दिए इसके बाद काफ़ी कुछ बहुत आसान हो गया, तब हमने ऐसा ही किया, जब संगा और महेला जैसे लोग भी साथ आए, लेकिन दुर्भाग्य से वर्तमान में इस परंपरा का पालन नहीं किया गया. संगा हमेशा नंबर तीन पर बल्लेबाजी करते थे और महेला हमेशा चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करते थे.”

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