रविचंद्रन अश्विन करना चाहते हैं सीमित ओवर क्रिकेट में वापसी

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रविचंद्रन अश्विन को अभी भी है सीमित ओवर में वापसी की उम्मीद 

रविचंद्रन अश्विन को अभी भी है सीमित ओवर में वापसी की उम्मीद

भारतीय क्रिकेट टीम के टेस्ट स्पेसलिस्ट ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन इन दिनों बेहतरीन फॉर्म में चल रहे हैं. उनकी विकेटचटकाऊ गेंदबाजी ने उनकी जगह टीम में पक्की कर दी है. हालांकि अश्विन लंबे वक्त से सीमित ओवर क्रिकेट में टीम से बाहर चल रहे हैं. लेकिन हाल ही में स्पिनर ने सीमित ओवर क्रिकेट से दूर होने के लिए अपनी इंजरीज को जिम्मेदार ठहराया है साथ ही वापसी की उम्मीद भी जताई है.

टीम से ड्रॉप होने के बाद रविचंद्रन अश्विन ने छोड़ दिया था टीवी देखना

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टीम इंडिया के लिए 70 टेस्ट मैचों में, 61 वनडे, 11 टी20 मैच खेल चुके स्पिन गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन टीम इंडिया के लिए ने मुंबई मिरर से कहा,

“जब मैंने खेलना शुरू किया था तब मैंने इस मुकाम पर पहुंचने की उम्मीद नहीं की थी. मुझे अच्छा लगता है जब मैं खेल रहा होता हूं या नहीं… लेकिन जब मुझे सीमित ओवर क्रिकेट से ड्रॉप कर दिया गया था और मुझे इंजरीज हो गई थी तब मैंने इस खेल को इंज्वॉय करना ही छोड़ दिया था.

यहां तक की तब यदि टीवी पर भी कोई सीमित ओवर क्रिकेट आता था तो मैं उसे भी नहीं देख पाता था जो कि मेरे लिए काफी खतरनाक था.

मुझे जहां मौका मिलता है खेलता हूं मैं

वक्त के साथ अश्विन ने खुद के बिहेवियर में सुधार किया. इसपर उन्होंने कहा,

“शुक्र है कि मैंने इस पर काबू पा लिया है. मैंने लोगों की मदद ली और मैंने इस पर ध्यान दिया है. अब मैं बहुत खुश हूं.. मुझे जहां भी मौका मिलता है मैं खेलता हूं चाहें फिर वह क्लब मैच ही क्यों न हो..अगर मैं अपनी खुशी बरकरार रखता हूं, तो मैं जो कुछ भी हासिल कर सकता हूं, उसकी कोई सीमा नहीं है.

अभी भी कर सकता हूं सीमित ओवर क्रिकेट में वापसी

रविचंद्रन अश्विन

2010 में टीम इंडिया में डेब्यू करने वाले अश्विन ने सामित ओवर क्रिकेट में भी अच्छा प्रदर्शन किया. लेकिन 2017 के बाद से सीमित ओवर क्रिकेट में उन्हें टीम में मौका नहीं मिला. सीमित ओवर क्रिकेट में जगह मिलने के बारे में बात करते हुए अश्विन ने कहा,

मैं सालों से सफलतापूर्वक भारत के लिए खेल रहा हूं और मैं आगे भी भारत के लिए खेलना चाहता हूं. यदि आप मेरे टी20 और वनडे के आंकड़ों को देखें तो वे मेरे लिए कोई उपलब्धि नहीं हैं.

हालांकि उम्मीदें अभी भी जिंदा है, लेकिन मैं दूसरों से अलग नजरिया रखता हूं. मैं किसी के पास जाकर नहीं कहता हूं कि मैं खेलना चाहता हूं, मैं इंटरव्यू भी नहीं देता हूं … मेरा करने पर यानि प्रदर्शन पर विश्वास रखता हूं. पिछले एक-दो सालों से मैं इंजरीज से जूंझता रहा हूं.

मैं अपने शरीर को तैयार कर रहा हूं. क्योंकि मैं जानता हूं कि मैं अच्छा हूं. हर चीज समय के साथ मिलती है.

 

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