रिद्धीमान साहा ने अपनी विकेटकीपिंग को लेकर कही ये खास बात

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रिद्धीमान साहा ने बताया आखिर किससे मिला है उन्हें सुपरमैन का नाम 

रिद्धीमान साहा ने बताया आखिर किससे मिला है उन्हें सुपरमैन का नाम

भारतीय क्रिकेट टीम के टेस्ट विकेटकीपर बल्लेबाज रिद्धीमान साहा के लिए कुछ महीनों पहले तक वापसी मुश्किल हो चली थी। रिद्धीमान साहा को लगी चोट के बाद जिस तरह से उनके स्थान पर आए ऋषभ पंत ने प्रदर्शन किया उससे तो साहा के टेस्ट करियर को खत्म माना जा रहा था।

रिद्धीमान साहा को कहा जाता है सुपर मैन

लेकिन इस बंगाली खिलाड़ी ने हार नहीं मानी और अपनी चोट से उबरने के बाद मेहनत के दम पर फिर से भारतीय टीम में वापसी की। रिद्धीमान साहा को अब भारतीय टेस्ट टीम में फिर से जगह मिल गई है।

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दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ साहा को तीनों ही टेस्ट मैचों में मौका भी मिला और उन्हें बल्लेबाजी में तो मौका नहीं मिला लेकिन विकेट के पीछे के प्रदर्शन से सुपरमैन की छवि को फैंस के मन में स्थापित किया।

सुपरमैन का नाम फैंस के द्वारा मिला

रिद्धीमान साहा को कप्तान विराट कोहली तो सबसे बेहतरीन विकेटकीपर बता चुके हैं तो फैंस उन्हें सुपरमैन के नाम से बुलाने लगे हैं। इसको लेकर जब साहा से एबीपी न्यूज से खास बातचीत में पूछा तो साहा ने कहा कि

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वैसे देखा जाए तो जो फैंस से उन्होंने ये नाम(सुपरमैन) दिया है। ऑस्ट्रेलिया के लास्ट टूर पर जब ओकिफ का कैच पकड़ा जिसके बाद मैथ्यू वेड का बैंगलुरू में कैच पकड़ा उसके बाद ही ये नाम हुआ। लेकिन दर्शकों को ये नहीं पता है कि डोमेस्टिक क्रिकेट में भी मैंने ऐसे कैच पकड़े हैं लेकिन उन्होंने इंटरनेशनल मैच में देखने के बाद इस नाम को दिया।”

पिता से सीखने को मिले विकेटकीपिंग के गुर

रिद्धीमान साहा को उनके पिता के फुटबॉल में गोलकीपर रह चुके हैं तो साथ ही क्रिेकेट भी खेल चुके हैं इसको लेकर साहा से पूछा तो कहा कि “ये शायद जिन्स में तो कुछ ना कुछ होगा। वैसे मैं जिनता हूं उससे भी ज्यादा पापा डबल फिट थे। मैं वही कोशिश करता हूं जैसे पापा ने बोला था कि बेसिक्स कीपिंग का ध्यान देने को कहा। जैसे बॉल के मूवमेंट को देखना हैं आखिर तक हाथों को सॉफ्ट रखना है। ये सभी चीजों पर मैंने बचपन से बहुत-बहुत अभ्यास किया। इसी कारण से मैं जो आगे की तरफ कैच आते हैं वो कंवर्ट कर पाता हूं।”

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ऐसे 20 रन बनाकर ट्रायल देने पहुंचे थे साहा

शुरुआती दिनों में जब मैं 13 साल का था तभी से शुरू किया जब मैं अंडर-13 में खेला। जिला स्तर पर खेलने के बाद मैं बंगाल के लिए खेलने के लिए इधर तक आया। उधर भी अच्छा किया लेकिन 2 साल मौका नहीं मिला। और फिर मैं 16 साल का हो गया जिसके बाद एक साल अच्छा किया लेकिन मौका हाथ हीं लगा फिर अगले दो साल अच्छा करने पर मौका मिला। मैं सीधा पहले डिविजन में खेला। वहां बल्लेबाजी में 10वें नंबर पर मौका मिला। जहां लगभग सभी मैचों में नॉट आउट रहा। फिर बंगाल की अंडर-19 टीम का सेलेक्शन हुआ जहां नेट पर मेरी कीपिंग को देखकर पूछा कि नाम किया है। मैंने बताया कि मैंने बताया रिद्धीमान साहा और पूछा कौनसे क्लब के लिए खेलते हो तो मैंने अपने क्लब कुमार टुली का नाम बताया। उन्होंने पूछा कितने रन बनाए तो मैंने बताया 20 रन तो वो हैरान हो गए और पूछा कि कितना 20 पांच सौ बीस या छ सौ बीस, मैंने कहा सिर्फ 20 रन, उन्होंने कहा केवल 20 रन बनाकर ट्रायल देने चले आए। मैंने बताया कि मुझे तो क्लब से भेजा है इसलिए मैं यहां आया हूं। तभी वहां खड़े बाबलुक गोले खड़े थे, बाबलुक गोले ने जब मैं यूनिवर्सिटी के मैच खेल रहा था तो मौजूद थे तब मैंने तीन मैचों में एक में 70 एक में 80 और फाइनल में 100 था तो बाबू सर ने बताया क्योंकि उन्होंने वहां मुझे प्राइज दिया था। उसके बाद मैं अगले स्टेप में पहुंचा।

रिध्दिमन साहा

अपनी आउट फील्ड को लेकर साहा ने कहा कि “ये चीज मुझे बचपन में एक हर टूर्नामेंट में जब टेनिस बॉल से मैच होते थे तो मैं बेस्ट फील्डर का प्राइज जीतता था। बल्लेबाजी या गेंदबाजी में कुछ भी हो लेकिन बेस्ट फील्डर का अवार्ड मुझे मिलता था। मुझे बचपन से ही डाइव करने का शौक रहा है। जहां गेंद ज्यादा जाता मैं वहीं पर खड़ा रहता था। इससे टीम को भी फायदा होता था। इसी तरह से मैंनें बंगाल के लिए भी कुछ मैचों में फील्डिंग की है अच्छे कैच पकड़े हैं। आईपीएल में भी जब चेन्नई के लिए खेला तो एक फील्डर के तौर पर ही खेला। बहुत से अच्छे कैच मैंने एक फील्डर के तौर पर पकड़े हैं।”

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