ऋषभ पंत का नहीं होगा पार्थिव पटेल जैसा हाल- सैयद किरमानी

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ऋषभ पन्त को टीम में जल्दी मौका देने पर भड़का यह दिग्गज, कहा पन्त का भी हाल पार्थिव पटेल जैसे ना हो जाए 

ऋषभ पन्त को टीम में जल्दी मौका देने पर भड़का यह दिग्गज, कहा पन्त का भी हाल पार्थिव पटेल जैसे ना हो जाए

भारतीय क्रिकेट टीम के प्रतिभाशाली विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत को उनकी काबिलियत के दम पर महज 17 साल की उम्र में ही भारतीय टीम के लिए खेलने का मौका दे दिया गया। ऋषभ पंत में प्रतिभा की तो कोई कमी नहीं है लेकिन वो अब तक उन्होंने इंटरनेशनल में खेले चार मैचों में निराश ही किया है।

ऋषभ पंत को जल्दी से मौका देने पर भड़के सैयद किरमानी

ऋभष पंत को भारतीय टीम में 17 साल की उम्र में मौका मिल गया है लेकिन भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज विकेटकीपर बल्लेबाज रहे सैयद किरमानी का मानना है कि ऋषभ पंत को ज्यादा से ज्यादा घरेलु क्रिकेट खेलने की जरूरत है। साथ ही किरमानी से साफ माना है कि ऋषभ पंत का हश्र पार्थिव पटेल की तरह नहीं होना चाहिए जिन्हें कम उम्र में ही मौका मिल गया था।

कहीं ऋषभ पंत का भी ना हो जाए पार्थिव जैसा हाल- किरमानी

सैयद किरमानी ने ऋषभ पंत को 17 साल की उम्र में ही भारतीय टीम में उतारने को लेकर कहा कि “हर कोई सचिन तेंदुलकर नहीं है जो 16 साल की उम्र में ही सफल हो जाए। हर कोई ऐसा नहीं कर सकता है।” इसके साथ ही किरमानी ने सचिन के साथ तुलना कहते हुए कहा कि “ऋषभ को इतनी जल्दी नहीं उतारना चाहिए था। ऋषभ बहुत ही प्रतिभाशाली हैं, लेकिन उन्हें पूरी तरह से तराशना चाहिए। उनका हश्र पार्थिव की तरह नहीं होना चाहिए।”

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पार्थिव ने किया था 17 साल की उम्र में डेब्यू, 16 साल में खेल सके हैं महज 65 मैच

आपको बता दें कि भारतीय टीम में नियमित रूप से जगह नहीं बना सके पार्थिव पटेल ने साल 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ 17 साल की उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट में आगाज किया लेकिन वो अपने 16 साल के करियर में अब तक केवल 65 इंटरनेशनल मैच ही खेल सके हैं। ऋषभ पंत महेन्द्र सिंह धोनी के उत्तराधिकारी माने जा रहे हैं लेकिन वो अब तक प्रभावित नहीं कर सके हैं।

उस समय विकेटकीपर का एक अच्छा बल्लेबाज होने की थी मांग

इसके साथ ही सैयद किरमानी ने आगे कहा कि “वनडे क्रिकेट के दबदबे और जॉन राइट के भारत के कोच बनने के बाद नजीते सर्वोपरि हो गए और तकनीक हाशिए पर चली गई। विकेटकीपरों को कोई मार्गदर्शन नहीं मिल सका और अचानक से ऐसे बल्लेबाजों की जरूरत पड़ गई जो विकेटकीपिंग भी कर लेते हों।”

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