रोहित शर्मा
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जब कोई टीम मैदान पर उतरती है तो कुछ एक खिलाड़ियों की भूमिका काफ़ी अहम और पहले से तय होती है, वहीं कई बार अगर वो खिलाड़ी टीम में न हो तो उसकी गैरमौजूदगी का असर बाकी टीम के मनोबल और खेल पर भी दिखने लगता है.

जिस भूमिका और ज़िम्मेदारी की यहाँ बात की जा रही है, भारतीय टीम में वहीं भूमिका अब सीनियर खिलाड़ी रोहित शर्मा की बन चुकी है. अपने 12 साल के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर में उन्होंने कई मौकों पर भारतीय टीम के लिए बेहतरीन प्रदर्शन किया है.

लेकिन हालिया सीरीज़ में उनकी गैरमौजूदगी का असर साफ़ तौर पर देखा जा सकता है, फिर चाहे बल्लेबाज के तौर पर उनका योगदान हो या फिर मैदान पर एक उपकप्तान के तौर पर टीम को संभालना, तो चलिए उन तीन वजह को जानते हैं जिनसे रोहित शर्मा की कमी साफ-साफ़ महसूस होती है.

बल्लेबाजी में निरंतरता और टैंपरामेंट

रोहित शर्मा 2015 विश्व-कप के दौरान

नागपुर के इस 33 वर्षीय बल्लेबाज ने 224 वन-डे मैचों में 49.27 के शानदार औसत से कुल 9115 रन बनाए हैं, जिसमें उनके 3 बड़े दोहरे शतक और 29 शतक भी शामिल हैं. इसके अलावा बात अगर रोहित के बल्लेबाजी टैंपरामेंट की करें तो उन पर किसी भी तरह की परिस्थिति में भरोसा  किया जा सकता है. इसकी वजह ये है कि वो वक़्त और मैच की ज़रूरत के मुताबिक अपनी बल्लेबाजी का गियर बदल सकते हैं.

रोहित अक्सर अपने शतक को एक बड़े स्कोर में आसानी से तब्दील कर लेते हैं. उनकी गैरमौजूदगी का पहला असर तो भारत की बल्लेबाजी पर ही देखा जा सकता है, क्योंकि उनके बल्लेबाजी एटीट्यूड में डिफ़ेंसिव और एग्रैसिव, दोनों ही तरह  के टैंपरामेंट का मिश्रण है.

जिससे बाकी बल्लेबाजों का भी मोरल बूस्ट होता है. टीम में रोहित के न खेलने से भारतीय टीम रन-चेज़ में काफ़ी संघर्ष करती हुई नज़र आ रही है, क्योंकि खेल की दिशा बदलने की जो क्षमता रोहित में है वो बाकी खिलाड़ियों में अभी उतनी डेवलप नहीं हुई है.

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