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क्या आप नहीं जानना चाहेंगे, कि किसने गिफ्ट किया था सचिन को उनके जीवन का पहला बैट 

क्या आप नहीं जानना चाहेंगे, कि किसने गिफ्ट किया था सचिन को उनके जीवन का पहला बैट

सचिन तेंदुलकर की बायोपिक फिल्म 26 मई को रिलीज हो गयी जिसके बाद उनके प्रशंसको ने सचिन के जीवन से जुडी इस फिल्म को देखने के लिए सिनेमाघर के बाहर भीड़ लगा दी सचिन ने अपनी इस फिल्म में अपने जीवन से जुड़े हर के उतार चढ़ाव को दिखाया है, जिसमे उनके बचपन से लेकर उनके 24 साल के क्रिकेट कैरियर को काफी बखूबी से दिखाया गया है, इस फिल्म में खुद सचिन ने अपने जीवन से जुडी सारी बातें अपने प्रशंसकों के सामने रखी है.इतिहास के पन्नो से: सचिन ने किया खुलासा , एक नेवले की वजह से इंडिया ने जीता था हीरो कप का सेमीफाइनल

सचिन बचपन में थे काफी शरारती

सचिन ने अपनी इस फिल्म में बताया है कि किस तरह से वे अपने बचपन में शरारत करते थे और तब उन्हें क्रिकेट के बारे में जाएदा कुछ नहीं पता था, सचिन अपने घर में सबसे छोटे थे उनसे बड़े उनके दो भाई और एक बहन थी इसके अलावा उनके पिता जी मराठी के प्रोफेसर थे वे एक मध्यम वर्गीय परिवार से आते है सचिन अपने बड़े भाई नितिन तेंदुलकर से बचपन में बेहद डरते थे.

सचिन की बहन ने दिया था उनको पहला बैट

सचिन ने अपनी बायोपिक फिल्म में बताया कि उनकी बड़ी बहन सविता कश्मीर घूम कर आई थी और परिवार में सभी के लिए वहां से गिफ्ट लेकर आई थी जिसके बाद मुझे भी उसने एक गिफ्ट दिया और वो था मेरे क्रिकेट जीवन का पहला बैट जो कि मेरी बहन सविता कश्मीर से लेकर आई थी जिसके बाद मुहे बेहद खुशी हुयी थी और मैं नाचने भी लगा था और फिर मैंने वो बैट अपने भाई अजीत के हाथो में दे दिया.सचिन अ बिलियन ड्रीम की पहले ही दिन की कमाई जानकर चौंक जायेंगे आप, धोनी की फिल्म से है बड़ा अंतर

अजीत ने सिखाया कैसे खेलना है

सचिन को पहला बैट उनकी बहन सविता ने दे तो दिया लेकिन उससे कैसे खेलना है ये सचिन को नहीं पता था, जिसके बाद उनके बड़े भाई और उनके क्रिकेट के जीवन में हर समय उनके साथ रहने वाले अजीत तेंदुलकर ने उन्हें उस बैट से खेलना सिखाया और फिर 1983 के वर्ड कप जीतने के बाद सचिन ने भी अपने मन में ठान ली थी कि एक दिन वे भी भारत के लिए वर्ड कप जीतेंगे.

रात भर अपने पहले बैट को निहारता रहा था

सचिन ने अपनी इस बायोपिक फिल्म में बताया कि जब उन्हें अपना पहला बैट मिला तो उसको उन्होंने अपने बेड के पास ही रखा हुआ था जिसे वो पूरी रात निहारते रहे थे, जिसके बाद उनके मन में इस खेल के प्रति और दीवानगी बढ़ गयी जिसके बाद अजीत उनको रमाकांत अचरेकर के पास क्रिकेट सिखाने के लिए मुंबई के शिवाजी पार्क लेकर गए थे.भारतीय टीम के तेज उमेश यादव ने ‘सचिन: अ बिलियन ड्रीम’ देखने के बाद क्रिकेट के भगवान से की एक मीठी शिकायत

सचिन ने अपने जीवन के हर पहलू को दिखाया है इस फिल्म में

सचिन ने अपनी इस फिल्म में हर एक उस पहलु को बताया है जो कि इससे पहले हर किसी को नहीं पता था, सचिन ने भारत और पाकिस्तान क्रिकेट मैच में किस तरह का दबाव होता है ये भी बताया और 1999 में अपने पिता की म्रत्यु के बाद उन्होंने किस तरह से अपने आप को फिर से खेलने के लिए तैयार किया था.

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