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हुआ खुलासा करीब 10 हजार घंटे में बनी हैं ‘सचिन: अ बिलियन ड्रीम्स’ 

हुआ खुलासा करीब 10 हजार घंटे में बनी हैं ‘सचिन: अ बिलियन ड्रीम्स’

क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने ना जाने अपने क्रिकेट करियर में कितने रिकॉर्ड तोड़े और बनाए और इसी के चलते उनके क्रिकेट करियर में एक वक्त भी आ गया था कि सचिन के मैदान में कदम रखते ही उनके नाम रिकॉर्ड खुद ही बनने लग जाते थे और अब इन्ही उपलब्धियों के चलते सचिन के जीवन पर आधारित रवि भागचंदका के प्रोडक्शन हाउस ‘200 नॉट आउट प्रोडक्शन्स’ के तहत बनी  डोक्युमेंट्री फिल्म ‘सचिन: अ बिलियन ड्रीम्स’ मूवी 26 मई को आने वाली है. फिल्म के डायरेक्टर जेम्स अर्स्किन है उन्होंने इस मूवी को बनाने के लिए साढ़े तीन साल तक लगातार कैमरे से हर जगह सचिन को फॉलो किया और इस दौरान उन्होंने सचिन के 10 हजार घंटे के वीडियो फुटेज खंगाले. रवि और जेम्स ने इस फिल्म को बनाने के विचार से लेकर एक कार्यक्रम में फिल्म से जुड़े सवालो के जवाब दिए.PHOTOS: धोनी के शॉट को पकड़ने में रोहित शर्मा के छुटे पसीने हुआ कुछ ऐसा की तस्वीरें देख हँसते हँसते लोट पोट हो जायेंगे आप

प्रशन –   इस फिल्म की शुरुआत कैसे हुई?
उत्तर  –  मैं भी क्रिकेट खेलता था. मैंने ‘अली’ जैसी कई स्पोर्ट्स फिल्में देखी मुझे लगा कि सचिन पर भी ऐसी फिल्म बननी चाहिए. वे हमारे रियल हीरो हैं. स्पोर्ट्स में उनसे बड़ा कोई नहीं. उनकी कहानी कई लोगों और जनरेशन के लिए प्रेरणा है.
प्रशन – सचिन को इसके लिए राजी करना आसान था?
उत्तर  – 2012 में हमने पहली बार बात की 6 से 8 महीने तो उनसे मुलाकात करने में लग गए। इसके बाद उन्हें मनाने में समय लगा। सचिन कहते रहे, “मैं एक स्पोर्ट्समैन हूं, मैं एक्टिंग नहीं कर सकता ” हमने कहा, “हम नहीं चाहते कि आप एक्टिंग करें हम कुछ वक्त आपको फॉलो करेंगे और कुछ खास मोमेंट्स शूट करेंगे, लेकिन यह साफ है कि एक्टिंग नहीं होगी आप जिस सिचुएशन में जैसे होंगे, हमें वैसे ही कैमरे में लेना है.” इसके बाद साढ़े तीन साल तक हमने कैमरे के साथ उनको हर जगह फॉलो किया.
प्रशन –  होम वीडियो, आपकी 3 साल की रिकॉर्डिंग और मैच फुटेज में फिल्म के लिए चुनाव कितना मुश्किल रहा?
उत्तर  –  जेम्स और उनके एडिटर्स के लिए तो ये नाइटमेयर की तरह था. फिल्म के लिए क्या लें और क्या नहीं, सबसे ज्यादा वक्त यही सोचने और एडिटिंग में लगा, तकरीबन तीन साल.
प्रशन –  बायोपिक हिट है, क्या फिल्म बनाने की ये भी वजह है?
उत्तर  –  जब हमने फिल्म शुरू की थी, तब कोई भी बायोपिक नहीं आई थी. ना भाग मिल्खा भाग, ना मैरी कॉम.
प्रशन –   इसमें फिक्शन बहुत कम रखा है, ऐसा क्यों?
उत्तर  –   सब सचिन की कहानी जानते हैं. हम उनकी यात्रा को अलग तरह से दिखाएंगे. जो जैसा था सब कुछ वैसा ही ड्रामेटाइज नहीं करेंगे.
प्रशन –  फिल्म में किसी एक्टर को लेने का ख्याल नहीं आया?
उत्तर  –  एक फैन होने के नाते मुझे सचिन की कहानी सचिन से ही सुननी है, मुझे लगा मेरी तरह हर फैन यही सोचता होगा. उनकी कहानी हर कोई उन्हीं से सुनना चाहता है.चैंपियंस ट्राफी से पहले ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज कप्तान रिकी पोंटिंग ने दी विराट कोहली को दी इन 2 गेंदबाजो से बचने की सलाह
प्रशन –  फिल्म का कंटेंट कैसे तय हुआ?
उत्तर  –  सचिन ने सभी बातें खुल कर की हैं. उसके बाद हम सभी ने साथ मिलकर तय किया कि क्या लाना है क्या नहीं.
प्रशन –  वैचारिक मतभेद तो नहीं हुए?
उत्तर  –  जिन बातों पर नजरिया अलग होता था, उन पर हम बात कर लेते थे इसलिए इसका तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है.

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