सचिन तेंदुलकर के 2011 विश्व कप जीत का क्षण लॉरियस पुरस्कार

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सचिन तेंदुलकर के 2011 विश्व कप जीत का क्षण लॉरियस पुरस्कार के लिए हुआ नामित 

सचिन तेंदुलकर के 2011 विश्व कप जीत का क्षण लॉरियस पुरस्कार के लिए हुआ नामित

भारतीय टीम ने 2011 में विश्व कप अपने नाम किया था. जब फाइनल मैच में श्रीलंका के खिलाफ महेंद्र सिंह धोनी ने नुवान कुलशेखरा के खिलाफ छक्का लगा कर अपनी टीम को 28 वर्ष के बाद विश्व कप जीताया था. जिसमें सचिन तेंदुलकर को कंधे पर बैठाकर मैदान घुमाने वाला पल लॉरियस पुरस्कार में नामित हो गया है.

सचिन तेंदुलकर का विश्व कप जीत का पल लॉरियस पुरस्कार में नामित

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महेंद्र सिंह धोनी के कप्तानी में 28 साल के बाद भारतीय टीम ने 2011 में विश्व कप जीता था. भारत के दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने अपने छठे प्रयास में विश्व कप जीता था. जीत दर्ज करने के बाद विराट कोहली, सुरेश रैना, हरभजन सिंह और युसूफ पठान ने सचिन तेंदुलकर को अपने कंधे पर बैठाकर पूरा वानखेड़े स्टेडियम में घुमाया था.

अब उस क्षण को लॉरियस पुरस्कार में नामित किया है. जिसमें 2000-2020 के बीच में 20 सबसे बड़े खेल के पल में शामिल हुआ है. इस पुरस्कार का निर्णय 17 फ़रवरी को बर्लिन में होने वाला है. वोट आप यहाँ पर 10 जनवरी से 16 फ़रवरी के बीच किया जा सकता है.

वानखेड़े में जीता था भारत ने विश्व कप

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अपना पहला विश्व कप सचिन तेंदुलकर ने 1992 में मोहम्मद अजहरुद्दीन के कप्तानी में खेला था. उसके बाद से वो वो लगातार विश्व कप जीतने का प्रयास करते रहे. 2003 में भारतीय टीम विश्व कप के फ़ाइनल में पहुंची थी. लेकिन उस समय वो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हार गये थे.

2011 में श्रीलंका की टीम फाइनल में भारत के सामने थे. जहाँ पर सचिन तेंदुलकर टीम के लिए बड़ी पारी नहीं खेल पायें थे. लेकिन कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और गौतम गंभीर ने टीम को इतिहास रचने में मदद किया था. जिसके बाद से भारत ने 2 और विश्व कप खेले लेकिन दोनों बार सेमीफाइनल में ही हार गये थे.

24 साल का रहा था सचिन तेंदुलकर का करियर

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क्रिकेट में भारत के लिए सचिन तेंदुलकर का करियर 24 वर्ष का रहा है. उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ 1989 में पर्दापण किया था. जिसके बाद उन्होंने 2013 में वेस्टइंडीज के खिलाफ वानखेड़े के मैदान पर उन्होंने अपने करियर का आखिरी मैच खेला था. उनके नाम कई बड़े कीर्तिमान दर्ज है. जिसे तोड़ पाना बहुत ज्यादा मुश्किल है. सचिन

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