सचिन तेंदुलकर ने बताया उन्हें कब लगा था करियर खत्म हो जाने का डर 1

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को दुनिया क्रिकेट के भगवान के नाम से जानती है. सचिन के रिकॉर्ड्स उनकी महानता की कहानी बयां करते हैं. सचिन ने अपने करियर के दौरान कई उतार चढ़ाव देखे. कई बार वो गेंदबाज़ों के लिए खौफ का दूसरा नाम बने तभी तो शेन वॉर्न जैसे दिग्गज स्पिनर ने कहा था कि सचिन उन्हें अपने सपने में आकर डराते हैं. इन सबके इतर सचिन ने इंडिया टुडे न्यूज़ चैनल को दिए अपने एक इंटरव्यू में अपनी बहुत पुरानी टेनिस एल्बो इंजरी के बारे में बात की.

सचिन को थी टेनिस एल्बो इंजरी

सचिन तेंदुलकर ने बताया उन्हें कब लगा था करियर खत्म हो जाने का डर 2

जैसा कि हम सभी को पता है सचिन तेंदुलकर को कुछ साल पहले टेनिस एल्बो की समस्या हुई थी और इस वजह से वह 2004 में वो लम्बे समय के लिए खेल से बाहर भी हो गए थे. लेकिन 2005 में उन्होंने इस परेशानी से बाहर आने के लिए सर्जरी करा ली थी. अब वह इस समस्या से पूरी तरह से बाहर निकल चुके हैं.

अपनी इसी पुरानी चोंट के बारे में इंडिया टुडे से बात करते हुए सचिन तेंदुलकर ने कहा

वीरेंद्र सहवाग - सचिन तेंदुलकर
वीरेंद्र सहवाग – सचिन तेंदुलकर

टेनिस एल्बो वास्तव में एक बुरे सपने की तरह थी. मेरे कई दोस्तों ने उसके बाद टेनिस एल्बो लिया है. जब उनके पास यह नहीं था, तो वे कहते थे कि यह कितना दर्दनाक हो सकता है; यह इतना बुरा नहीं हो सकता है कि आप क्रिकेट बैट नहीं पकड़ सकते. मैंने कहा कि आपको एक बार इसका अनुभव करने की आवश्यकता है, फिर आपको पता चल जाएगा. टेनिस एल्बो इंजरी के दौरान आपको ऐसा लगता है जैसे की आप एक कमरे के अंदर बंद हैं, दरवाजा खोलने की कोशिस कर रहें हैं पर दरवाजा नहीं खोल पा रहे हैं.

सचिन तेंदुलकर ने बताया उन्हें कब लगा था करियर खत्म हो जाने का डर 3

सचिन तेंदुलकर ने आगे कहा

सचिन तेंदुलकर ने बताया उन्हें कब लगा था करियर खत्म हो जाने का डर 4

वह दौर बहुत ही बुरा था. मैंने ठीक होने के लिए वो सरे पैतरे आजमाए जिन्हें मैं आजमा सकता था. मैं मैंच की सुबह बहुत परेशान था. मैंने इंजेक्शन भी लिया लेकिन कुछ भी काम नहीं कर रहा था. मुझे इसका केवाल एक ही उपाय दिख रहा था और वह था ऑपरेशन. मैं निराश होकर एक कोने में जाकर बैठ गया. मेरे मित्र, फीजियो तथा डॉक्टर्स सभी ने वापस मुझे मैदान में लाने का बहुत प्रयास किया लेकिन लेकिन उन सभी का प्रयास निरर्थक था.

संचिन ने उस बारे में भी बताया जब उन्होंने सोचा था की अब मेरा करियर ख़त्म तो हो जाएगा

मुझे लगा था कि मेरा करियर खत्म हो गया है. मैं भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि कृपया मेरे करियर को इस तरह से ख़त्म होने से रोक लें, मुझे फिर से एक बार मैदान पर आने दें. यह महसूस करते हुए, मुझे याद है कि लगभग 4 व 5 महीने के बाद हमने श्रीलंका के खिलाफ नागपुर में एकदिवसीय मैच खेला था. मैं उस एहसास को कभी नहीं भुला सकता. मैंने देखा ठीक वैसा ही हुआ जैसा मैं चाहता था. मुझे अब कोई समस्या नहीं हो रही थी. उस पल के लिए मैंने भगवान को धन्यवाद दिया.