रिद्धिमान साहा का पंत को टारगेट करते हुए विवादित बयान, 'विकेटकीपिंग सिर्फ स्पेशलिस्ट विकेटकीपर का काम' 1

दस साल पहले 2010 में दक्षिण अफ़्रीका के खिलाफ़ नागपुर टेस्ट में बंगाल के 36 वर्षीय सीनियर भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज़ रिद्धिमान साहा ने बतौर बल्लेबाज़ अपना अंतरराष्ट्रीय टेस्ट डेब्यू किया था. अपने 10 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर में अभी तक साहा ने 38 टेस्ट खेलते हुए 3 शतक और 5 अर्धशतक बनाए हैं.

कई सालों से वो भारतीय टीम के लिए क्रिकेट के लंबे फ़ॉर्मेट में बाकी सब के मुक़ाबले एक बेहतरीन विकेटकीपर-बल्लेबाज़ हैं. लेकिन बतौर बल्लेबाज़ उनका ज़्यादा बेहतर न कर पाना कई बार सवालों के घेरे में आ चुका है. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हाल ही में खत्म हुई बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफ़ी में  साहा को पहले मैच के बाद ड्रॉप कर दिया गया था.

मैं अपना काम करने में विश्वास रखता हूँ – रिद्धिमान साहा

ऋ्द्धिमान साहा

एडिलेड में हुए पहले पिंक-बॉल टेस्ट में विकेटकीपर-बल्लेबाज़ साहा पहली और दूसरी पारी में क्रमश: 9 और 4 रन बना कर आउट हो गए. इसके बाद अगले 3 टेस्ट के लिए टीम मैनेजमेंट ने सीनियर साहा की जगह ऋषभ पंत को प्लेइंग इलेवन में बतौर विकेटकीपर-बल्लेबाज़ जगह दी थी.

पंत को अपनी जगह टीम में मौका मिलने पर रिद्धिमान साहा साहा ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत के दौरान कहा कि,

“मैं 2018 से मेरे और पंत के बीच हो रही ये तुलना सुन रहा हूँ. मैं अपना काम करने में विश्वास  रखता हूँ और मुझे इस बात की बिल्कुल कोई  चिंता नहीं है कि पंत किस तरह की बल्लेबाज़ी कर रहे  हैं.”

खिलाड़ी का चयन मैनेजमेंट का काम है – साहा

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इसके बाद साहा ने अपने खेल को लेकर अपनी बात रखते हुए कहा कि,

“मैं किसी भी वजह से  अपना गेम बिल्कुल नहीं बदलूंगा. ये टीम मैनेजमेंट का फ़ैसला है कि उन्हें विकेट के पीछे किस खिलाड़ी को खड़ा करना है.”

हालांकि 36 वर्षीय विकेटकीपर –बल्लेबाज़ ने पहले टेस्ट की पहली पारी में मिचेल स्टार्क के खिलाफ़ अपने शॉट सेलेक्शन पर खेद जताते हुए कहा कि,

“गेंद मेंरे ऑफ़ स्टंप से भी बाहर जा रही थी और उसी वक़्त मैंने एक गलत चुनाव कर लिया. लेकिन दूसरी पारी में मिडविकेट की तरफ़ मैंने जो फ़्लिक मारा एक प्रॉपर शॉट था. बस बदकिस्मती से वो शॉट फ़ील्डर के हाथों में पहुँच गया. मैं उसे अपने लिए एक बुरा दिन ही कहूंगा.”

साहा के मुताबिक एक स्पेशलिस्ट पोज़ीशन है विकेटकीपिंग

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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पूर्व ऑस्ट्रेलियाई विकेटकीपर-बल्लेबाज़ एडम गिलक्रिस्ट और पूर्व भारतीय सीनियर कप्तान और विकेटकीपर-बल्लेबाज़ एमएस धोनी के बाद से क्रिकेट में विकेटकीपर्स से एक ऑलराउंड प्रदर्शन की उम्मीद की जाने लगी. हालांकि साहा इस दौर में भी खुद को स्पेशलिस्ट विकेकीपर मानते हैं.

इसी मसले पर साहा ने आगे कहा कि,

“कई बार कुछ ऐसे हालात भी आते हैं जब एक छूटे हुए कैच की वजह से मैच का पूरा नतीजा बदल जाता है. विकेटकीपिंग पूरी तरह से एक स्पेशलिस्ट काम है, खास तौर टेस्ट में इसकी अहमियत और बढ़ जाती है. मैं ये दावा नहीं कर रहा कि मैं अपनी तरफ़ आने वाली सारी कैच ही पकड़ता हूँ. लेकिन ये एक स्पेशलिस्ट पोज़ीशन है और इसे ऐसा ही रहना चाहिए.”

Umesh Sharma

Everything under the sun can be expressed in written form. So, I am practicing the same since the time I hold my consciousness and came to know pen and paper. Apart from being Writer, Journalist or...