सौरव गांगुली MCC की मीटिंग में नहीं लेंगे हिस्सा, बताई ये वजह

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सौरव गांगुली MCC की मीटिंग में नहीं लेंगे हिस्सा, बताई ये वजह 

सौरव गांगुली MCC की मीटिंग में नहीं लेंगे हिस्सा, बताई ये वजह

भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली, जो क्रिकेट के नियम बनाने वाली अंतरराष्ट्रीक कमिटी मेरीलबोर्न क्रिकेट क्लब एमसीसी के सदस्य हैं जिसके कारण उनको एमसीसी की सभी मीटिंग्स में जाना पड़ता है, लेकिन अब सौरव गांगुली के साथ कुछ ऐसा हुआ है जिसके कारण वह इसकी होने वाली आगामी बैठक में हिस्सा नहीं ले पाएंगे. एमसीसी की यह बैठक 11-12 अगस्त को लंदन के लॉर्ड्स में आयोजित होनी है.

इस कारण से नहीं लेंगे सौरव गांगुली हिस्सा

सौरभ गांगुली

अगस्त में होने वाली इस मीटिंग में सौरव इसलिए  नहीं जा पाएंगे क्योंकि उनकी माँ की तबियत खराब है और उनके इलाज़ के  लिए गांगुली उनको कही और लेकर जाएंगे.

गांगुली ने एक बयान में कहा कि

‘मेरी मां की तबीयत सही नहीं है. हमें उनके इलाज के लिए उन्हें कहीं और लेकर जाना होगा, इसकी वजह मैं इस मीटिंग में भाग नहीं ले पाऊंगा.’

 एमसीसी का यह है काम

सौरभ गांगुली

इस कमिटी के अध्यक्ष इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक गैटिंग हैं. यह कमिटी साल में दो बार बैठक करती है और क्रिकेट के चर्चित मुद्दों पर चर्चा कर अपनी राय रखती है. अभी इसकी मीटिंग 11 -12 अगस्त को लंदन के लॉर्ड्स में आयोजित होनी है.

इन सब के बीच बीसीसीआई ने अपने खिलाड़ियों के डोप टेस्ट के लिए नाडा के दायरे में आना स्वीकार कर लिया है, कई अधिकारी इसके जवाब में कई अधिकारी खफा भी हो गए हैं. लेकिन जब सौरव गांगुली से बोर्ड के इस फैसले पर राय मांगी गई, तो उन्होंने इस मुद्दे पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

भारतीय टीम हरदम से नाडा से बचती आयी है

सौरव गांगुली

भारतीय क्रिकेट बोर्ड आखिरकार नाडा के अंतर्गत आ ही गई. बीसीसीआई पिछले कई वर्षो से नाडा के अंतर्गत आने से मना करती रही है. लेकिन अब खुद सीईओ राहुल जौहरी और क्रिकेट संचालन के महाप्रबंधक सबा करीम ने डोपिंग रोधी संस्था के अंतर्गत आने के लिए हामी भरी. बीसीसीआई अधिकारी इसे बोर्ड के मौजूदा प्रशासन के कारण भारतीय क्रिकेट की हार मान रहे हैं.

इसी के साथ बीसीसीआई के अंदर के लोगों का मानना है कि राहुल जौहरी और सबा करीम खेल सचिव को समझाने की कोशिश करते कि अभी नीति पर फैसला लेने का सही समय नहीं है.

इससे पहले बीसीसीआई ने खुद को नाडा के दायरे में लाने का पुरजोर विरोध किया था, जिसके कारण बीसीसीआई और खेल मंत्रालय के बीच टकराव भी हुआ था.

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