शैफाली वर्मा लड़का बनकर एकेडमी में करती थी ट्रेनिंग, पिता ने किया खुलासा 1

भारतीय महिला क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टी-20 सीरीज खेल रही है। सीरीज के पहले मैच में भारतीय टीम के लिए 15 वर्षीय शैफाली वर्मा ने डेब्यू किया। वह भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाली सबसे युवा खिलाड़ी हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम दर्ज था। पहले  मैच में वह खाता नहीं खोल पाईं लेकिन दूसरे मैच में बेहतरीन 44 रन बनाये।

लड़कों के एकेडमी में की ट्रेनिंग

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शैफाली वर्मा के पिता संजीव वर्मा ने उनके बारे में कई खुलासे किये हैं। उन्होंने बताया कि रोहतक में लकड़ियों की क्रिकेट एकेडमी नहीं थी तो उन्होंने शैफाली के बाल कटवाकर एकेडमी भेजा करते थे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह डरते भी थे क्योंकि उन्हें डर होता था कि सच्चाई सामने न आ जाये। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में संजीव वर्मा ने कहा

“कोई भी उसे किसी भी अकादमी में शामिल करने के लिए तैयार नहीं था क्योंकि रोहतक में लड़कियों के लिए एक भी नहीं था। मैंने उनसे भीख मांगी लेकिन सभी ने मना कर दिया। मैंने बहुत सारी क्रिकेट अकादमियों के दरवाजे खटखटाए, लेकिन सभी ने अस्वीकार कर दिया। मैंने उसके बाल काटने का फैसला किया, और उसे एकेडमी में ले गया और वहाँ लड़के के रूप में दाखिला दिलाया। मैं डर गया लेकिन किसी ने गौर नहीं किया। क्योंकि नौ साल की उम्र में, हर बच्चा एक जैसा दिखता है।”

सभी ताना मारते थे

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संजीव वर्मा ने यह भी बताया कि उनके पड़ोसी और रिश्तेदार हमेशा शैफाली को क्रिकेट खिलाने को लेकर ताना मारते थे। इसके बावजूद शैफाली और उनके पिता विचलित नहीं हुए और आज वह भारतीय टीम के लिए खेल रही है। संजीव ने आगे कहा

“पड़ोसी और रिश्तेदार मुझे ताने देने लगे। आपकी बेटी लड़कों के साथ खेलती है, लड़कियों का क्रिकेट में कोई भविष्य नहीं है। मुझे और मेरी बेटी को समाज की ऐसी भद्दी टिप्पणियाँ की गयी जिससे किसी को भी मानसिक दुःख पहुँच सकता था। लेकिन मेरी बेटी मानसिक रूप से बहुत मजबूत है। उसने मुझे एक बार कहा, ‘पापा एक दिन वे सब मेरे नाम का जाप करेंगे।”