शाकिब, महमूदुल्लाह, मुशफिकुर और तमीम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया को बताई खिलाड़ियों की ये परेशानियां

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शाकिब, महमूदुल्लाह, मुशफिकुर और तमीम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया को बताई बांग्लादेशी खिलाड़ियों की ये परेशानियां 

शाकिब, महमूदुल्लाह, मुशफिकुर और तमीम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया को बताई बांग्लादेशी खिलाड़ियों की ये परेशानियां

बांग्लादेश प्रीमियर लीग में नियम के बदलाव और घरेलू क्रिकेट में अनियमितता के खिलाफ सीनियर खिलाड़ियों ने मोर्चा खोल दिया है। टीम के खिलाड़ियों में प्रेस कांफ्रेस कर बोर्ड के सामने अपनी मांगें रखी। टेस्ट के कप्तान शाकिब अल हसन, विकेटकीपर मुशफिकुर रहीम, सलामी बल्लेबाज तमीम इक़बाल और ऑलराउंडर महमूदुल्लाह ने पत्रकरों से बात की।

क्या- क्या कहा?

शाकिब, महमूदुल्लाह, मुशफिकुर और तमीम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया को बताई बांग्लादेशी खिलाड़ियों की ये परेशानियां 1

प्रेस कांफ्रेंस में इन सही खिलाड़ियों ने अपननी परेशानी बताई और बोर्ड को उसपर जल्द से जल्द फैसला लेने को कहा। उन्होंने 11 मांगें रखी और मांग के नहीं माने जाने तक, क्रिकेट से दूर रहेंगे।

महमूदुल्लाह: क्रिकेट बोर्ड पिछले कई सालों से क्रिकेटरों की बात नहीं सुन रहा है। उन्हें बांग्लादेश प्रीमियर लीग में पैसों का फैसला नहीं करने दिया जा रहा। मैं चाहता हूँ कि इन सभी चीजों पर ध्यान दिया जाए।

शाकिब अल हसन: प्रथम श्रेणी के खिलाड़ियों की सैलरी बढनी चाहिए। उनकी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए। लोकल खिलाडियों को घरेलू मैदान से अभ्यास की सुविधा मिलनी चाहिए और गेंद की क्वालिटी सही होनी चाहिए। खिलाड़ियों को एक दिन में 1500 मिलते हैं और यह कुछ नहीं होते, इसे बढ़ाना चाहिए। खिलाड़ियों के पास जाने- आने के लिए कोई सुविधा नहीं है। लोकल खिलाड़ियों को फ्लाइट की सुविधा मिलनी चाहिए। हम जिस बस से मैदान में जाते हैं, उन्हें भी बदलना पड़ता है। खिलाड़ियों को रहने के लिए फाइव स्टार होटल मिलना चाहिए। खिलाड़ियों को एक-दो खराब प्रदर्शन के बाद टीम से ड्राप कर दिया जाता है। उन्हें खुद को साबित करने के लिए और मौके मिलने चाहिए।

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मुशफिकुर रहीम: बीपीएल में जो नियम पिछले कई सालों से चल रहे हैं, वो फिर से लाये जाएं। बांग्लादेश खिलाड़ियों को भी विदेशी खिलाड़ियों जैसी सैलरी मिले। बीपीएल में खिलाड़ियों की बेस प्राइस होनी चाहिए।

तमीम इक़बाल: हम स्थानीय कोच क्यों की रख सकते। बाहर के कोच को जितने पैसे मिलेंगे, उसमें हम 20 लोकल कोच रख सकते हैं। हमने लोकल कोच के साथ कई बड़े मुकाबले जीते हैं। इसके साथ ही अंपायर, ट्रेनर और फिजियो की सैलरी भी मायने रखती है।

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