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ऋषभ पन्त नहीं इस बल्लेबाज़ के नाम दर्ज है फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे तेज शतक बनाने का रिकॉर्ड 

ऋषभ पन्त नहीं इस बल्लेबाज़ के नाम दर्ज है फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे तेज शतक बनाने का रिकॉर्ड

दिल्ली के युवा विकेटकीपर बल्लेबाज़ और पूर्व U-19 टीम के उपकप्तान ऋषभ पन्त ने कल त्रिवंतपुरम में झारखंड के खिलाफ दिल्ली के लिए खेलते हुए रणजी ट्राफी के मुकाबले में सभी का दिल जीत लिया. ऋषभ ने झारखंड के खिलाफ़ हुए मैच के दूसरी पारी में आतिशी शतक बनाया उन्होंने शतक बनाने के लिए महज 48 गेंद खेली और बना डाला रणजी ट्राफी और भारतीय फर्स्ट क्लास क्रिकेट के इतिहास का सबसे तेज शतक.

इससे पहले भारत और तमिल नायडू के पूर्व ओपनिंग बल्लेबाज़ वी.बी.चंद्रशेखर के नाम पर दर्ज था भारतीय प्रथम श्रेणी क्रिकेट में  सबसे तेज शतक बनाने का रिकॉर्ड. चंद्रशेखर ने केवल 56 गेंदों में ही सेंचुरी बना डाली थी. चंद्रशेखर ने 1988 में तमिलनाडू के लिए खेलते हुए रेस्ट ऑफ इंडिया के विरुद्ध यह रिकॉर्ड बनाया था. मंगलवार को पन्त ने उनके इस 28 वर्ष पुराने रिकॉर्ड को धवस्त कर दिया.

मगर अभी भी घरेलू क्रिकेट में सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड हिमांचल प्रदेश के शक्ति सिंह के नाम पर दर्ज हैं. 1990-91 के रणजी ट्राफी में हिमांचल प्रदेश और हरियाणा के बीच यह मुकाबला खेल गया था. शक्ति अपने 16 सालों के करियर में दिल्ली और हिमचाल के लिए के खेले.

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शक्ति सिंह ने हरियाणा के विरुद्ध इस मुकाबले में मात्र 42 गेंदों में शतक बना डाला था. उन्होंने यह पारी कांगड़ा पुलिस स्टेडियम, धर्मशाला में खेली थी. इस मैच में हरियाणा की ओर से भारत के पूर्व तेज गेंदबाज़ चेतन शर्मा भी खेले थे. शक्ति सिंह ने हरियाणा के सभी गेंदबाजों की धज्जियाँ उड़ा दी थी. उन्होंने इस पारी के दौरान 14 छक्के लगाये थे जो आज भी फर्स्ट क्लास क्रिकेट की एक इनिंग में लगाये गये छक्कों का रिकॉर्ड है. हिमाचल के मंडी में जन्मे शक्ति ने इस मैच में 128 रन बनाये थे जिसमे 7 चौके और 14 आसमानी छक्के शामिल थे. दुर्भाग्यवश उस मैच में उन्होंने कितनी गेंद खेली थी इसका कोई भी रिकॉर्ड कहीं पर भी दर्ज नहीं हैं.

आपको बता दे कि शक्ति सिंह इस समय भारतीय टीम के लिए मैच रफ्रेरी की भूमिका में कार्य करते हैं. उस मुकाबले और रिकॉर्ड की जानकारी किसी के पास नही है. जब शक्ति सिंह से इस मुकाबले के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया कि उस रिकॉर्ड के बारे में बहुत ही कम लोग जानते है. टीम के बाकी खिलाड़ियों ने भी कहा कि हमने भी शक्ति की गेंदे जो उन्होंने मैच में खेली तब गिननी शुरू की थी जब वो अपने पचास के करीब थे.

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शक्ति सिंह ने अपनी उस रिकॉर्ड पारी के बारे में बात करते हुए कहा कि-

”वह एक अनौपचारिक रिकॉर्ड था जब मैंने 42 गेंदों में शतक ठोका था. वो वक़्त भी ऐसा ही था जहाँ अनेको रिकार्ड्स अनौपचारिक होते थे. चाहे वो टीम का स्कोर हो या फिर टीम के खिलाड़ियों का.”

शक्ति सिंह ने आगे अपनी बात पूरी करते हुए कहा कि-

”मुझे अभी भी याद में नंबर 8 पर बैटिंग करने उतरा था और मैंने जाते ही बड़े शॉट्स लगाने शुरू कर दिए थे. वो भी तब जब मैं अपने अर्धशतक के करीब था. उसके बाद मेरे साथी खिलाड़ियों ने मेरे रन और गेंदे काउंट करनी शुरू की. मैंने अपने पचास रन के लिए सिर्फ 18 गेंदे खेली थी जिसमे 2 चौके और 7 छक्के शामिल थे. उसके बाद मैंने तीन ओर चौके और 5 छक्के और मारे थे, पर आज उन गेंदों का कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं हैं. खैर मुझे याद है मैंने अपने शतक मात्र 59 मिनट्स में पूरा किया था. जिसका रिकॉर्ड भी दर्ज हैं.”

शक्ति सिंह ने 2003 में फर्स्ट क्लास से संन्यास ले लिया था. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उन्होंने 200 विकेट भी झटके हैं. शक्ति सिंह इस समय रणजी मुकाबलों में मैच रफ्रेरी के रोल में नज़र आते हैं. उनकी बेटी शिवरंजनी सिंह प्लेबैक सिंगर है.

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