अमित शाह के बेटे जय शाह के बचाव में उतरे बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली

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अमित शाह के बेटे जय शाह के बचाव में उतरे बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली 

अमित शाह के बेटे जय शाह के बचाव में उतरे बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली

अक्टूबर में भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष बने थे। इसके साथ ही भाजपा अध्यक्ष और देश के गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह बोर्ड के सचिव बने थे। दादा के अध्यक्ष बनने का सभी ने स्वागत किया था लेकिन जय शाह के सचिव बनने पर काफी सवाल खड़े हुए थे।

ऐसा रहा है सफर

अमित शाह के बेटे जय शाह के बचाव में उतरे बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली 1

जय शाह 2013 में गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (जीसीए) के संयुक्त सचिव बने थे। उस समय अमित सह एसोसिएशन के अध्यक्ष थे। कुछ सालों के बाद ही वह बीसीसीआई की वित्त और मार्केटिंग समितियां के सदस्य बन गये।

इसी साल सितंबर में उन्होंने जीसीए के संयुक्त सचिव के पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद अक्टूबर में वह बीसीसीआई के सचिव बन गये। उनके सचिव बनने से भाई-भतीजावाद की बात भी उतने लगी है।

सौरव गांगुली ने दी प्रतिक्रिया

अमित शाह के बेटे जय शाह के बचाव में उतरे बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली 2

बीसीसीआई के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने इसपर प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि भारत में यह हमेशा रहा है कि किसी भी बड़े आदमी के बच्चे कुछ कर ही नहीं सकते। इसके साथ ही दादा ने सचिन तेंदुलकर का भी उदाहरण दिया। इंडिया टुडे के कार्यक्रम में उन्होंने कहा

“आप जानते हैं कि हमारे पास भारत में यह बहुत बड़ी बात है कि यदि आप एक बहुत बड़े व्यक्ति के बेटे-बेटी हैं तो, तो आप शामिल नहीं रह सकते हैं। अगर आप सचिन को देखते हैं, तो वह लोगों से कह रहे थे कि मेरे बेटे को एक क्रिकेटर समझो। सचिन तेंदुलकर के रूप में मत देखो। उसके उपनाम के बारे में भूल जाओ और देखो कि वह अच्छा है या बुरा।”

अमित शाह से जोड़कर न देखें

अमित शाह के बेटे जय शाह के बचाव में उतरे बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली 3

सौरव गांगुली ने लोगों से अपील की है कि जय शाह को अमित शाह से जोड़कर नहीं देखें। वह भारतीय क्रिकेट के बेहतरी के लिए काम करना चाहते हैं। इन्हें किसी के बेटे नहीं बल्कि एक आम व्यक्ति की तरह देखें। दादा ने आगे कहा

“वह अमित शाह के बेटे हैं तो क्या हो गया? उन्होंने चुनाव जीता है। वह पिछले 6-7 वर्षों से गुजरात क्रिकेट संघ में शामिल हैं। उसे अपने दम पर रहने दिया जाना चाहिए। उनके पिता एक राजनीतिज्ञ हैं लेकिन वह नहीं है। मुझे लगता है कि उसे स्वतंत्र रूप से आंका जाना चाहिए। मुझे उसके साथ काम करते हुए अभी एक महीना हुआ है। वह भारतीय क्रिकेट की भलाई के लिए काम करना चाहता है।”

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