वीरेंद्र सहवाग ने बताया सौरव गांगुली से जुड़ा दिलचस्प किस्सा, बाउंड्री मारने से रोक...

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वीरेंद्र सहवाग ने कहा उनकी विस्फोटक पारी देख सौरव गांगुली हो गये थे परेशान बार-बार कर रहे थे धीमा खेलने का आग्रह 

वीरेंद्र सहवाग ने कहा उनकी विस्फोटक पारी देख सौरव गांगुली हो गये थे परेशान बार-बार कर रहे थे धीमा खेलने का आग्रह

पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने भले ही क्रिकेट से संन्यास ले लिया हो लेकिन शायद ही कोई दिन ऐसा बीतता हो जब यह खिलाड़ी खबरों में न रहता हो। सोशल मीडिया, कॉन्फ्रेस में वीरू अपने मजाकिया अंदाज के लिए जाने जाते हैं। पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज ने हाल ही में सिंगापुर में एचटी-मिंट एशिया लीडरशिप समिट 2019 में शिरकत की और अपने वक्त के कप्तान सौरव गांगुली के बारे में दिलस्प किस्सा सुनाया।

2001 की इस पारी ने टीम इंडिया को दिया विस्फोटक ओपनर

वीरेंद्र सहवाग

अपने वक्त के विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग वैसे तो काफी मजाकिया स्वभाव के हैं, लेकिन जब हाथ में बल्ला हो तो उनसे अधिक आक्रामक भला कौन हो सकता है। सिंगापुर में एचटी-मिंट एशिया लीडरशिप समिट 2019 में सहवाग ने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे 2001 की ट्राई सीरीज उनके क्रिकेट करियर के लिए अहम है।

वीरु से बताया कि उन्हें 2001 में श्रीलंका, न्यूजीलैंड के साथ खेली जा रही ट्राई सीरीज में पहली बार ओपनिंग करने का मौका मिला था क्योंकि सचिन तेंदुलकर अनुपलब्ध थे। इस पारी ने उनके क्रिकेट करियर के ग्राफ को ऊपर की तरफ मोड़ दिया जब उन्होंने कप्तान सौरव गांगुली के साथ 70 गेंदों में 100 रनों की पारी खेली थी।

दादा के मना करने के बाद भी मैंने जड़े चौके: वीरेंद्र सहवाग

वीरेंद्र सहवाग ने कहा उनकी विस्फोटक पारी देख सौरव गांगुली हो गये थे परेशान बार-बार कर रहे थे धीमा खेलने का आग्रह 1

अपने करियर की तेरहवीं और सबसे खास पारी के बारे में बताते हुए सहवाग ने बताया

उस मैच में न्यूजीलैंड ने 264 रन बनाए थे। जवाब में मैं कप्तान सौरव गांगुली के साथ ओपनिंग करने उतरा। इस पारी में मैंने 4 चौके और एक छक्का जड़ा था। लेकिन दादा मेरी बाउंड्रीज को थामने के लिए कहते रहे और मुझ स्लो खेलने के लिए कहते रहे। आखिरकार उन्होंने मुझे मेरे स्वाभाविक खेल के साथ छोड़ दिया।

“मैं अपने कप्तान सौरव गांगुली के साथ ओपनिंग करने मैदान पर उतरा था। मैं धड़ाधड़ बाउंड्री मार रहा था तभी डेरिल टफी गेंदबाजी करने आए और मैंने उन्हें एक चौका लगाया।

तो दादा मेरे पास आए और उन्होंने कहा वीरु हमें प्रति ओवर पांच रनों की जरूरत है, क्योंकि हम केवल 265 का पीछा कर रहे हैं और हमें इस ओवर की बाउंड्री मिल गई है”

‘मैंने उनसे ठीक कहा और फिर दूसरी गेंद पर एक चौका लगाया। वह फिर से मेरे पास आए और कहा ‘हमें अगले ओवर के लिए भी रन मिल गए हैं। इसके बाद मैंने फिर से एक चौका लगाया और वह फिर मेरे पास आए और बोले ठीक है हमें तीन ओवर तक के रन मिल गए हैं इसलिए प्लीज आराम से खेलो। ”

वीरेंद्र सहवाग (100) और सौरव गांगुली (64) की 143 रनों की मजबूत साझेदारी की मदद से टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड ने जीत दर्ज कर ली थी। और फिर यहीं से वीरेंद्र सहवाग का क्रिकेट करियर ने रफ्तार पकड़ी जो फिर कभी थमी नहीं।

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