द्रविड़ और शास्त्री को लेकर बीसीसीआई और सीओए के बीच एक बार फिर टकराव

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रवि शास्त्री की वजह से आपस में फिर भिड़े बीसीसीआई और COA, जाने क्या है पूरा मामला 

रवि शास्त्री की वजह से आपस में फिर भिड़े बीसीसीआई और COA, जाने क्या है पूरा मामला

आईपीएल में भारतीय क्रिकेट दिग्गजों की कॉमेंट्री खास तौर पर पसंद की जाती है बीसीसीआई की ओर से इस समय आईपीएल प्लेऑफ के कॉमेंट्री पैनल में सुनील गावस्कर और संजय मांजरेकर के नाम ही रहे. लेकिन अगले साल दो नए खास नाम और आने की संभावना है ये नाम राहुल द्रविड़ और रवि शास्त्री के नाम है.

IPL कॉमेंट्री : शास्त्री और द्रविड़ को लेकर BCCI और CoA में टकराव!

जो इस समय राष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख पदों पर मौजूद हैं. लेकिन ये दो नाम आते ही विवाद हो गया और बीसीसीआई और प्रसासको की समिती (सीओए ) के आमने सामने आ गए.

हाल ही में जारी एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय क्रिकेट दो प्रमुख कोच रवि शास्त्री  और राहुल द्रविड़ को अगले साल आईपीएल कॉमेंट्री करने की इजाजत देने के मामले में बीसीसीआई और सीओए के बीच एक बार फिर टकराहट हो गयी  है.

अंदरखाने से ये भी पता चल रहा है की अगले आईपीएल सत्र तक सबकुछ ठीकठाक रहा तो ये भी आने वाले समय में कमेंटेटरी करते नजर आ सकते है. इस समय टीम इंडिया के लिए रवि शास्त्री मुख्य कोच और राहुल द्रविड़ अंडर 19 टीम के कोच हैं.

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अगर देखा जाए तो बीसीसीआई और सीओए के बीच पहली बार टकराव न नहीं हुआ, इनके बीच टकराव की खबरे रुक रुक के आती रहती है. अभी हाल ही में विराट कोहली के अफगानिस्तान के खिलाफ मैच न खेलने जबकि काउंटी क्रिकेट को चुनने में भी टकराव हुआ.

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मीडिया रिपोर्ट के अऩुसार सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त की गई प्रशासकों की समिति (सीओए) इस नियम पर पुनर्विचार कर रही है जिसकी शास्त्री और द्रविड़ को कोच रहते आईपीएल में कॉमेंट्री करने की इजाजत नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक इस निर्णय से बीसीसीआई अधिकारी हैरत में है, उनका कहना है कि पहले भी ‘हितों का टकराव’ के नियम के तहत पहले दोनों ही कोच को दोहरी भूमिका नहीं दी गई थी क्योंकि दोनों ही राष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख पदों पर हैं.

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रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा गया है कि सीओए का हितों के टकराव के इस नियम पर पुनर्विचार करना, जिसकी वजह से शास्त्री और द्रविड़ को कॉमेंट्री करने की इजाजत मिल जाएगी, यह उनका ओछा व्यवहार दर्शाता है. वे अपने कार्य के प्रति ईमानदार नहीं हैं. और हर एक चीज को पूर्वाग्रह के चश्मे से देखते हैं जिसका परिणाम यह है कि उन्हें बीसीसीआई के प्रशासन की निगरानी करने का काम सौंपा गया है लेकिन उनकी सोच इसके विपरीत है जो उनके कार्यों में बेईमानी को दर्शाता है.

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