Team India के बड़े टूर्नामेंट्स में फेल होने के 3 कारण
Team India के बड़े टूर्नामेंट्स में फेल होने के 3 कारण

क्रिकेट जगत में भारतीय टीम (Team India) ने कई बार अपने प्रदर्शन और काबिलियत का लोहा मनवाया है. टीम इंडिया के पास कुल तीन वर्ल्ड कप हैं. एक जो साल 1983 में कपिल देव की कप्तानी में भारत ने जीता और दो वर्ल्ड कप महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में आए. हालाँकि, ऑस्ट्रेलिया के आगे वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट में भारत का तीन बार विश्व चैम्पियन बनना भी थोड़ा फीका है. ऐसा हम नहीं आंकड़े बताते हैं.

इन 3 कारणों से Team India बड़े टूर्नामेंट में हो जाती है फेल

इन 3 कारणों से Team India बड़े टूर्नामेंट में हो जाती है फेल
इन 3 कारणों से Team India बड़े टूर्नामेंट में हो जाती है फेल

कई बार विश्व की नंबर-1 का ख़िताब जीत चुकी भारतीय टीम द्विपक्षीय सीरीज में दमदार प्रदर्शन करती है. लेकिन वर्ल्ड कप, एशिया कप जैसे कई बड़े टूर्नामेंट्स में टीम इंडिया का डिब्बा गोल हो जाता है. इन टूर्नामेन्ट्स में टीम इंडिया पर फेलियर का टैग लगा दिया जाता है. हम इस आर्टिकल के माध्यम से उन तीन कारणों पर नजर डालेंगे, जो बड़े टूर्नामेंट में टीम इंडिया (Team India) पर फेलियर का टैग लगा देते हैं.

1. चयनकर्ता नहीं करते बेहतर टीम का चयन

Team India के बड़े टूर्नामेंट में फेल होने का कारण: चयनकर्ता नहीं करते बेहतर टीम का चयन
Team India के बड़े टूर्नामेंट में फेल होने का कारण: चयनकर्ता नहीं करते बेहतर टीम का चयन

बड़े टूर्नामेंट में किसी भी टीम का चयन लैपटॉप परफॉरमेंस (गलत आंकड़े) के आधार पर नहीं किया जाता और न ही करना चाहिए. वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट्स के लिए टीम का चुनाव करना कोई छोटी बात नहीं है. इसके लिए चयनकर्ता साल भर मेहनत करते हैं. लेकिन भारतीय चयनकर्ताओं के सन्दर्भ में ये स्थिति थोड़ी चिंताजनक है. भारतीय चयनकर्ताओं द्वारा चुनी हुई टीम से खुद भारतीय फैंस खुश नहीं होते हैं.

इसका सबसे बड़ा उदाहरण एशिया कप के लिए चुनी गई भारतीय टीम (Team India) है. दरअसल, चयनकर्ताओं ने एशिया कप में अक्षर पटेल जैसे शानदार फॉर्म में चल रहे खिलाड़ी को पहले 15 में चुनने के बजाए बैकअप खिलाड़ी के रूप में चुना. वहीं, दो मुकाबलों में लगातार ख़राब फॉर्म में चल रहे ऋषभ पंत को दिनेश कार्तिक की जगह प्राथमिकता दी गई.

2. बड़े मैचों का जरुरत से ज्यादा प्रेशर लेते हैं खिलाड़ी

Team India के बड़े टूर्नामेंट में फेल होने का कारण: बड़े मैचों का जरुरत से ज्यादा प्रेशर लेते हैं खिलाड़ी
Team India के बड़े टूर्नामेंट में फेल होने का कारण: बड़े मैचों का जरुरत से ज्यादा प्रेशर लेते हैं खिलाड़ी

क्रिकेट के एक ऐसा खेल है, जिसे बल्ले और गेंद से ज्यादा दिमाग से खेलने की जरुरत होती है. इसका सबसे सफल उदहारण खुद पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी हैं. वो बड़े-से बड़े टूर्नामेन्ट्स में ‘कुल’ रहते हैं. अर्थात वो जरुरत से ज्यादा गेम का प्रेशर नहीं लेते. इसमें कोई दो राय नहीं है कि बड़े टुर्नामेंट्स में खिलाड़ियों पर पहले से ही अच्छा प्रदर्शन करने का दवाब होता है.

लेकिन भारतीय टीम के कुछ खिलाड़ी इस दबाव को कम करने के बजाए उसी के बोझ तले दब जाते हैं. इसका खामियाजा पूरी टीम के साथ-साथ उन खिलाड़ियों को भी भुगतना पड़ता है, जिन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया. ये एक बड़ा कारण जिससे टीम इंडिया बड़े टूर्नामेंट में फेल हो जाती है.

3. बड़े टूर्नामेंट में गुटबाजी की खबरें आ जाती हैं सामने

Team India के बड़े टूर्नामेंट में फेल होने का कारण: बड़े टूर्नामेंट में गुटबाजी की खबरें आ जाती सामने      
Team India के बड़े टूर्नामेंट में फेल होने का कारण: बड़े टूर्नामेंट में गुटबाजी की खबरें आ जाती सामने

‘गुटबाजी’ राजनीति करने का पहला पड़ाव है. टीम इंडिया (Team India) इससे अछूती नहीं रही है. हालाँकि, इससे टीम को नुकसान ही भुगतना पड़ा है. बड़े टूर्नामेंट में भारतीय टीम के कुछ खिलाड़ी गुट में बंट जाते हैं. एक उदाहरण से ये बात आप शायद समझ पाएं. दरअसल, जब रवि शास्त्री टीम इंडिया के कोच थे, तब उनकी और विराट कोहली की गपशप से हर कोई वाकिफ रहा है.

‘हॉर्सेस फॉर कोर्सेज थ्योरी’ के सूत्रधार ये दोनों दिग्गज हैं. इस थ्योरी के तहत शास्त्री और विराट बड़े टूर्नामेंट में उन्हीं खिलाड़ियों का चयन करते थे, जो सम्बंधित पिच पर अपना प्रदर्शन दिखा सकें. इस गुटबाजी से कई खिलाड़ियों को टीम इंडिया के लिए बड़ा टूर्नामेंट खेलने का मौका नहीं मिल पाया.

Ankit Kunwar

Sports Journalist At Sportzwiki || Sr. Content Editor || Content Producer