एमएसके प्रसाद के कार्यकाल के खत्म होने बाद अब नई चयन समिति का कार्यकाल होगा इतने वर्ष का 1

भारतीय क्रिकेट टीम के नए चयन समिति को लेकर पिछले कई दिनोंसे लगातार सुर्खियां बनी हुई है। भारतीय क्रिकेट कन्ट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष बनने के कुछ दिनों के बाद सौरव गांगुली ने एमएसके प्रसाद की अध्यक्षता वाली चयन समिति के कार्यकाल के आगे नही बढ़ाए जाने की घोषणा की जिसके बाद से अब नई चयन समिति को लेकर चर्चा है।

नई चयन समिति का कार्यकाल होगा 3 साल

एमएसके प्रसाद की अगुवायी वाली चयन समिति के कार्यकाल की समाप्ति के बाद नई चयन समिति के कार्यकाल के 3 साल के रहने की खबर सामने आयी है। अब नई चयन समिति का कार्यकाल तीन साल का रखा जाएगा।

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भारतीय टीम की मौजूदा चयन समिति के लिए अब गिने-चुने दिन बचे हुए हैं। जिसको श्रीलंका के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज के लिए टीम चुनने का आखिरी बार मौका मिलने की संभावना है। नई चयन समिति की घोषणा सीएसी के द्वारा जल्द की जा सकती है।

एमएसके प्रसाद हैं अपने कार्यकाल की कामयाबी से संतुष्ट

भारत के मौजूदा मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद और उनकी कंपनी का कार्यकाल अब खत्म हो रहा है जो आगे नहीं बढ़ेगा। पिछले करीब चार साल से टीम के मुख्य चयनकर्ता के पद पर आसीन एमएसके प्रसाद अपने इस पूरे कार्यकाल को लेकर संतुष्ट नजर आ रहे हैं जिसमें उन्होंने भारतीय टीम के प्रदर्शन का बखान किया।

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एमएसके प्रसाद ने पिछले ही दिनों अपने कार्यकाल को लेकर कहा था कि “मुझे लगता है कि 3 साल के लिए टेस्ट में हमारी टीम नंबर 1 रैंकिंग ने मुझे सबसे बड़ी संतुष्टि दी है। हमने न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया नें वनडे सीरीज जीती। ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीत निश्चित रूप से सबसे प्यारी जीत थी।”

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मेरा सबसे बड़ा अफसोस विदेशी हार होगा। मुझे दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड में वास्तव में जो हुआ उसका उल्टा देखना अच्छा लगता। हमारी टीम में सबकुछ था। हमारी टीम जिस तरह से लड़ी, वो जीतने के लिए योग्य थी। लेकिन एजबेस्टन और साउथैम्टन के साथ केपटाउन में अहम पलों के लिए, परिणाम दूसरे तरीके से हो सकते थे।”

महेन्द्र सिंह धोनी की रिप्लेसमेंट भरना मुश्किल

वहीं उन्होंने महेन्द्र सिंह धोनी के रिप्लेसमेंट को लेकर कहा कि “मुझे पता है कि कीपर का काम आसान नहीं होता है। विशेष रूप से भारत जैसे देश में अगर कोई नया विकेटकीपर आता है तो उसे तुरंत एमएसडी(धोनी) के साथ तुलना में लिया जाता है, जो एक हाई प्रेशर वाली चीज है। एक नए विकेटकीपर के टीम में प्रवेश करने के लिए महान शो को भरना इतना आसान नहीं है। यही कारण है कि युवा और इच्छुक विकेटकीपर्स को मेरी सलाह है कि वे अपनी ताकत पर ध्यान दें और महान से मेल खाने के बजाय अपने शॉट्स दें।”

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हमारे काम में सराहना कम, आलोचना होती है ज्यादा

धोनी के भविष्य को लेकर एमएसके प्रसाद ने कहा कि “ये विशुद्ध रूप से एमएसडी(महेन्द्र सिंह धोनी) के हाथ में है।” तो वहीं फारूख इंजीनियर और अंबाती रायडू से जुड़े विवाद पर भी जवाब दिया।

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हम चयन समिति के रूप में जानते हैं कि “हमारी जॉब एक टोकरी पूर्ण आलोचना और कम सराहना है। जब आपको इसका अहसास होता है तो हाथ पर काम का ध्यान केन्द्रित होता है तो मुझे नहीं लहता है कि किसी भी तरह की टिप्पणी हमें नुकसान पहुंचा सकती है। मेरा मानना है कि आलोचना हमेशा रचनात्मक होनी चाहिए जो सही अर्थों में अच्छी होती है।