ग्रीम स्मिथ ने कहा मार्करम के जगह अगर इन्हें मिली होती कप्तानी तो शायद कुछ और होता भारत-अफ्रीका सीरीज का परिणाम

Jr. Staff / 20 February 2018

भारत और साउत अफ्रीका के बीच तीन टी20 मैचों की सीरीज का दूसरा अर्न्तराष्ट्रीय मुकाबला कल,यानि 21 फरवरी को सेचुंरियन के क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाना है। होने वाले इस रोमांचक मुकाबले के पहले एक तरफ जहां टीम इण्डिया वनडे सीरीज जीतने के बाद पहली टी20 मैच में भी जीत हासिल कर पूरे जोश और उत्साह से लबरेज नजर आ रही है तो वहीं दूसरी तरफ मेहमान साउथ अफ्रीका के लिए मौजूदा समय की स्थिती करो या मरो की रहेगी।

मार्करम को कप्तान चुनना गलत फैसला

इसी बीच साउथ अफ्रीका के पूर्व कप्तान ग्रीम स्मिथ ने सोमवार को दिए गए इंटरव्यू के दौरान कहा कि, “भारत के खिलाफ खेली गयी वनडे सीरीज में एडेन मार्करम को बतौर कप्तान चुनना गलत फैसला था। उनके मुताबिक अभी मार्करम को एक खिलाड़ी के रूप में खुद को विकसित करना चाहिए। हालांकि इस बात को ध्यान में नहीं रखते हुए उन्हें सीधे कप्तान बना दिया गया था।”

स्मिथ ने उठाए कप्तानी पर सवाल

अपनी बात को जारी रखते हुए स्मिथ ने कहा कि हमारे खिलाड़ियों के चोटिल होने से परेशान हमारी साउथ अफ्रीका की टीम को मार्करम के के कप्तान बनने के बाद उतना आत्मबल नहीं मिला,जितना मिलना चाहिए था। ऐसे में हमारी टीम को हार का सामना करना पड़ा।

बेहद जल्दी कर गए टीम मैनेजमेंट

साउथ अफ्रीका के पूर्व दिग्गज स्मिथ ने मार्करम को कप्तान बनाए जाने की आलोचना करते हुए कहा कि, “मार्करम को कप्तानी की बागडोर देना का फैसला टीम मैनजेमेंट के लिए सहीं नहीं था। जिस तरीके से उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी अचानक दे दी गयी वह एकदम सही फैसला नहीं था। उन्हे अभी एक खिलाड़ी के तौर पर अभी और निखरने की जरूरत है।”

इनको मिलनी चाहिए थी कप्तानी

इसके अलावा स्मिथ ने कप्तान के तौर पर सबसे ज्यादा प्राथमिकता अब्राहम डिविलियर्स, हाशिम अमला और ज्यां पॉल ड्यूमिनी के चयन पर दी,जिसको लेकर उन्होंने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा कि,” लोग अक्सर मेरी बात करते है। क्योंकि मुझे भी बेहद ही जल्दी कप्तानी की बागडोर मिल गयी थी। मैने शुरूआत में सोचा था कि यह अल्पकालिक होगा लेकिन यह पूर्णकालिक बन गया।हालांकि वहीं दूसरी तरफ मार्करम के साथ उल्टा हुआ।अचानक उन्हें कप्तानी की बागडोर देने पर वे पूरी तरह से ंसंभल नहीं सके और इसके कारण टीम को बड़ा नुकसान हार के रूप में उठाना पड़ा।”