बीसीसीआई ऐसे पकड़ता है खिलाड़ियों की उम्र का फर्जीवाड़ा

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जाने कैसे कलाई पकड़कर बस 2 मिनट में खिलाड़ियों का सही उम्र पता कर लेता है बीसीसीआई 

जाने कैसे कलाई पकड़कर बस 2 मिनट में खिलाड़ियों का सही उम्र पता कर लेता है बीसीसीआई

भारतीय क्रिकेट गलियारों में पिछले कुछ समय से जबरदस्त प्रदर्शन की तो खूब चर्चा रहा है लेकिन साथ ही साथ अच्छे प्रदर्शन के बीच एक और बात की चर्चा रही है वो है खिलाड़ियों की उम्र को लेकर फर्जीवाड़ा… भारतीय क्रिकेट में एक के बाद एक युवा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की फौज तैयार हो रही है लेकिन इन खिलाड़ियों में कुछ खिलाड़ी अपनी वास्तविक उम्र को छुपाने को लेकर बदनाम हुए हैं।

उम्र को लेकर फर्जीवाड़े में हाल ही उठे हैं कई मामलें

ऐसे ही खिलाड़ियों की बात करें तो साल 2018 में ऑस्ट्रेलिया में हुए आईसीसी अंडर-19 विश्व कप में खिताबी जीत के नायकों में शामिल रहे सलामी बल्लेबाज मनजोत कालरा के साथ ही तेज गेंदबाज शिवम मावी का नाम सामने आया।

जाने कैसे कलाई पकड़कर बस 2 मिनट में खिलाड़ियों का सही उम्र पता कर लेता है बीसीसीआई 1

मनजोत कालरा का नाम अपनी वास्तविक उम्र को छिपाने के कारण सामने आया जिसके बाद उन पर एक रणजी सीजन और दो साल के लिए एज ग्रुप के टूर्नामेंट को खेलने से बैन कर दिया तो वहीं शिवम मावी भी जांच में उम्र की धोखाधड़ी के दोषी पाए गए।

मनजोत कालरा, शिवम मावी और नीतिश राणा जैसे नाम आए सामने

इन दोनों ही युवा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के अलावा तीसरा नाम भी सामने आया था जो दिल्ली के नीतिश राणा का रहा। नीतिश राणा का नाम जरूर उछला है लेकिन आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं जिनके डॉक्यूमेंट्स की जांच की जा रही है जिसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

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ये तीन खिलाड़ी तो पूरी तरह से ताजा मामले में सामने आए हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि उम्र को लेकर फर्जीवाड़ा का नाम इनके साथ ही जुड़ा है। उससे पहले भी जम्मू-कश्मीर के युवा तेज गेंदबाज रसिख सलीम को बीसीसीआई ने इस मामले में आरोप सिद्ध होने के बाद 2 साल के लिए बैन कर दिया है तो वहीं दिल्ली के अंडर19 खिलाड़ी प्रिंस यादव के साथ भी वही हुआ है।

बीसीसीआई बिल्कुल भी नहीं बरतता इस मामले में नरमी

बीसीसीआई ने पिछले कुछ समय में उम्र के फर्जीवाड़े को लेकर काफी ज्यादा सख्ती दिखायी है। इसे रोकने के लिए तो बीसीसीआई ने घरेलू क्रिकेट के हर मैदान के ड्रेसिंग रूम में हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। जिसमें बीसीसीआई को पिछले करीब एक साल में 100 से ज्यादा फर्जी उम्र और फर्जी निवास स्थान की शिकायत मिली।

मुंबई इंडियंस

बीसीसीआई ने फर्जी उम्र या फर्जी निवास स्थान को लेकर करीब 100 से ज्यादा खिलाड़ियों को बैन कर दिया है, जिसमें से 75 खिलाड़ी तो अकेले फर्जी उम्र के मामले के दोषी पाए गए हैं।

कुछ इस तरह की प्रक्रिया से पकड़ता है बीसीसीआई वास्तविक उम्र

अब सवाल ये उठता है कि आखिर बीसीसीआई खिलाड़ियों की वास्तविक उम्र को कैसे पकड़ता है। वैसे किसी भी इंसान की वास्तविक उम्र को पकड़ता इतना आसान नहीं होता है जैसा समझा और सोचा जा रहा है। ये बहुत ही मुश्किल प्रक्रिया से पकड़ा जाता है। जिसमें बीसीसीआई जमीनी स्तर से जांच करती है।

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ये जांच बीसीसीआई राज्य क्रिकेट संघ से नहीं बल्कि खुद अपने स्तर पर करती है। बीसीसीआई ने इसके लिए खिलाड़ी के जन्म, जन्म स्थान का सत्यापन करने के लिए अलग और खास लोगों की नियुक्ति की है। जिसमें खिलाड़ी के स्कूल, कॉलेज, हॉस्टिपटल, नगर पालिका या ग्राम पंचायत में जाते हैं जहां से वास्तविक डॉक्यूमेट्स जुटाते हैं। वैसे कई बार शातिर दिमाग से इसे नकली बनाया जाता है लेकिन बीसीसीआई अपनी जांच में इसे भी पकड़ लेते हैं।

बहुत ही खतरनाक और जटील के उम्र पकड़ने की प्रक्रिया, कलाई से की जाती है उम्र पता

इन डॉक्यूमेंट्स के साथ ही बीसीसीआई के पास और भी तरीके हैं जिससे वो खिलाड़ी की वास्तविक उम्र को पकड़ने में सफल होते हैं। जिसमें कलाई के हड्डियों के आधार पर एक बच्चे की सही उम्र निर्धारित होती है उसी जांच को करते हैं। 2012 से ही इसके लिए बीसीसीआई टेनर व्हाइट हाउस 3 तरीका अपनाती है। ऐसे में डॉक्यूमेंट्स सही नहीं होने पर भी उम्र का पता लगाया जा सकता है।

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इस प्रक्रिया के लिए वैसे कुछ सालों पहले तक तो बीसीसीआई पूरी तरह से हॉस्पिटल पर ही निर्भर हुआ करता था लेकिन पिछले चार सालों में उन्होंने अपना खुद का स्वतंत्र मेडिकल चिकित्सक रखा हुआ है। इसमें सबसे पहले तो खिलाड़ियों के तमाम आईडी कार्ड्स को देखा जाता है। जिसके प्रामाणिक होने की दशा में खिलाड़ी का बोन टेस्ट होता है। इसके बाद हाथ और कलाई का एक्सरे करवाया जाता है। जिसकी तमाम रिपोर्ट्स बीसीसीआई के ऑफिशियल मेल आईडी पर भेजी जाती है। जिसके बाद रेडियोलॉजिस्ट टीडब्ल्यू 3 बोन एज से इसकी रेटिंग की जाती है।

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