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64 मैचों में 62 विकेट लेने वाला यह खिलाड़ी क्रिकेट छोड़ अब बना पायलट

एक क्रिकेटर के लिए अपने इंटरनेशनल क्रिकेट में संन्यास के बाद क्या करें ये एक बड़ा सवाल होता है। ऐसे कई क्रिकेटर्स हैं जो संन्यास के बाद अपना घर-परिवार चलान के लिए क्रिकेट से ही जुड़े रहते हैं जिसमें क्रिकेट कमेंटेटर, क्रिकेट एक्सपर्ट या फिर क्रिकेट के मैदान में कोचिंग देने का काम करते हैं।

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जिम्बाब्वे का ये पूर्व ऑलराउंडर बना पायलट

लेकिन कुछ ऐसे खिलाड़ी रहते हैं जिनको ये तमाम काम ना मिलने पर क्रिकेट से हटकर कुछ और ही काम करते हैं। ऐसा ही कुछ जिम्बाब्वे के पूर्व ऑलराउंडर खिलाड़ी ट्रेविस फ्रेंड ने किया है।

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जिम्बाब्वे की टीम में ऑलराउंडर के रूप में खेलने वाले पूर्व खिलाड़ी ट्रेविस फ्रेंड ने क्रिकेट नहीं बल्कि दूसरी ही क्षेत्र में अपना करियर बनाया है जिसमें वो अब हवा से बातें करते हैं यानि पायलट के रूप में काम कर रहे हैं।

जिम्बाब्वे के लिए ट्रेविस फ्रेंड ने खेले 13 टेस्ट और 51 वनडे मैच

ट्रेविस फ्रेंड की बात करें तो वो एक क्रिकेटर के रूप में भी बेहतरीन रहे। उन्होंने जिम्बाब्वे के लिए 13 टेस्ट मैचों में 25 विकेट हासिल किए तो साथ ही 447 रन बनाए जिसमें 3 पचासे शामिल रहे तो वहीं वनडे की बात करें तो 51 वनडे मैचों में बल्ले से 548 रन बनाए और गेंद से 37 विकेट हासिल किए।

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जिम्बाब्वे के इस ऑलराउंडर खिलाड़ी ने एक लेग स्पिनर गेंदबाज के रूप में शुरुआत की थी लेकिन बाद में वो तेज गेंदबाज बने जो करीब 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करने की क्षमता रखते थे। उन्होंने 2000 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपना डेब्यू किया।

क्रिकेट छोड़ सोचा पायलट बनने का, इसके बाद बने पायलट

वैसे तो ट्रेविस फ्रेंड का करियर साल 2004 में ही खत्म हो गया लेकिन उनका भारतीय टीम के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन रहा। उन्होंने साल 2000 में शारजाह में खेले गए कोका-कोला कप में भारत के खिलाफ खेले 2 मैचों में ही 7 विकेट हासिल किए जिसमें सचिन, गांगुली से लगातर युवराज जैसे दिग्गज खिलाड़ियों का विकेट शामिल रहा।

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साल 2004 में जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति के ज्वारा टीम में कोटा सिस्टम लागू करने को लेकर विरोध करने में शामिल रहे। जिनके साथ कुछ और भी जिम्बाब्वे के क्रिकेटर शामिल रहे। इसके बाद क्रिकेट छोड़ फ्रेंड काउंटी क्रिकेट खेलने चल पड़े जहां उन्होंने डर्बीशायर की टीम का प्रतिनिधित्व किया।

क्रिकेट से इसके बाद धीरे-धीरे अपना करियर खत्म करते रहे और साल 2001 में मिले प्राइवेट पाइलट सर्टिफिकेट हासिल कर चुके फ्रेंड ने कमर्शियल पायलट बनने का सोचा और वो फ्लाई बी, कतर जैसे विमान को उड़ाने लगे। वैसे उन्होंने साल 2006 में पायलट बनने का सोचा और उन्होंने इसकी ट्रेनिंग की जिसके बाद 2007 में यूके फ्लाइंग लाइसेंस मिल गया।