टीएनपीएल-2017- अभी तक ठंडा भी न पड़ा था श्रीसंत का केस और अब TNPL में भी 3 हुए फिक्सिंग में गिफ्तार 1

सट्टेबाजी की जिसे लत लग जाती है उसे किसी खेल से मतलब नहीं होता है खेल चाहे कोई भी हो अपने काले खेल को खेलना इनकी सबसे बड़ी आदत बन जाती है। सट्टेबाजी वैसे हर खेल में होती है साथ ही साथ क्रिकेट में भी सट्टेबाजी का खेल अपने चरम पर रहता है। हमनें पहले ही देखा है कि इस आईपीएल के दसवें सीजन के साथ ही चैंपियंस ट्रॉफी में भी सट्टेबाजों का गिरोह अपने पूरे चरम पर था और पुलिस ने इन सट्टेबाजों पर कार्यवाही करते हुए कई गिरोह पर धरपकड़ भी की। कुछ इसी तरह से तमिलनाडू में चल रहे तमिलनाडू प्रीमियर लीग में भी सट्टेबाजों का खेल छाया हुआ है।

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टीएनपीएल को लेकर सट्टेबाजी कर रहे तीन आरोपियों का पुलिस ने किया गिरफ्तार

तमिलनाडू में खेली जा रही टी-20 लीग तमिलनाडू प्रीमियर लीग के दूसरे सीजन का दौर जारी है। इस लीग को लेकर सट्टेबाज एक बार फिर से सक्रिय हो गए हैं। इस लीग के एक मैच को लेकर सट्टेबाजी में शामिल तीन आरोपियों को पुलिस ने कार्यवाही करते हुए हिरासत में लिया है।पुलिस ने ये कार्यवाही शुक्रवार को की जिसमें विनोद शर्मा, विकास चौधरी और मुकेश अग्रवाल नाम के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। ऐसा माना जा रहा है कि इसमें से एक आरोपी आईपीएल में गिफ्तार एक सटोरिए का भाई है।

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एक घर में छापेमारी कर तीन आरोपियों को किया रंगे हाथ गिरफ्तार

सट्टेबाजी में लिप्त इन आरोपियों पर ये कार्यवाही करने को लेकर आपराधिक मामलों के डीसीपी मधुर वर्मा ने कहा कि “टिप-ऑफ के आधार पर इंस्पेक्टर रितेश शर्मा की टीम ने एक आवासीय संपत्ति पर छापेमारी कर तीन सट्टेबाज पाए गए जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके पास से 13 सेलफॉन, दो लेपटॉप और तीन एलसीडी टीवी के सेट बरामद किए गए हैं। इसके द्वारा तमिलनाडू प्रीमियर लीग में कराईक्रून और रूबी के बीच हुए मैच को लेकर सट्टेबाजी हो रही थी।”

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सट्टेबाजों के पास के मिला सट्टेबाजी के विवरण को रखने का सॉफ्टवेयर

साथ ही डीसीपी मधुर वर्मा ने आगे बताया कि “सट्टेबाजों की ये गिरोेह अपने खाते और रिकॉर्ड को बनाए रखने के लिए सट्टेबाजी सॉफ्टवेयर का भी इस्तेमाल कर रहे थे। सॉफ्टवेयर उनके पास एक साल से मौजूद है और इसमें पूरे डेटा को स्वचलित रीप से कवर किया जा सकता है। वो इस सॉफ्टवेयर में अपने ग्राहकों को विवरण को बनाए रखने के लिए भी इस्तेमाल करते थे। वो साथ ही सट्टेबाजी के एप का भी उपयोग करते थे। सट्टेबाजी की वेबसाइटों पर तैतानी करते थे जिसमें वो मैचों के हिसाब से टीम की जीत की संभावनाओं की जांच करते थे।

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