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भारतीय टीम के इस खिलाड़ी के पिता करते थे कोयला खदान में काम, आज बेटा करोड़ों का मालिक

रांची

भारतीय क्रिकेट इतिहास में कुछ खिलाड़ी तो बहुत ही संपन्न परिवार से आए हैं। जिनको कभी पैसों के लिए कोई परेशानी नहीं हुई लेकिन कई ऐसे खिलाड़ी भी रहे जो काफी गरीब परिवार से आए और क्रिकेट के दम पर आज नाम और शोहरत कमायी है। इनमें से कई खिलाड़ियों ने तो अपने परिवार के साथ बहुत ही संघर्ष पूर्ण दिन देखे हैं जहां उन्होंने काफी तकलीफों का सामना किया।

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उमेश यादव का रहा है काफी गरीब परिवार से नाता

इन खिलाड़ियों की बात करें तो कई ऐसे खिलाड़ियों में एक रहे हैं भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज उमेश यादव… विदर्भ के खतरनाक तेज गेंदबाज उमेश यादव आज भारतीय टेस्ट टीम का अहम हिस्सा हैं।

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उमेश यादव वैसे भारतीय टीम के लिए तीनों ही फॉर्मेट खेल चुके हैं जिसमें उन्हें पिछले कुछ समय से भले ही सीमित ओवर की क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा का लेवल ज्यादा होने से जगह नहीं मिल पा रही है लेकिन वो टेस्ट टीम में लगातार खेल रहे हैं।

उमेश यादव के पिता करते थे कोयले की खदान में काम, वो करना चाहते थे आर्मी में नौकरी

उमेश यादव महाराष्ट्र के विदर्भ के रहने वाले हैं जिनका परिवार काफी गरीबी से नाता रखता है। उमेश यादव के पिता कोयला खदान में मजदूरी करते थे जिससे उनके परिवार का गुजारा बमुश्किल चल पाता था। पिता के द्वारा मजदूरी से घर का गुजारा चलना मुश्किल था तो वहीं इस हालात को देख उमेश यादव ने नौकरी करने का मन बनाया था।

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उमेश यादव वैसे पढ़ाई में इतने ज्यादा अच्छे नहीं रहे जिन्होंने 12वीं कक्षा में उत्तीर्ण करने के बाद नौकरी का प्रयास किया. उन्होंने वैसे शुरुआत में तो आर्मी में जाने का फैसला किया लेकिन वहां उन्हें सफलता नहीं मिली। आर्मी के सपने में असफलता के बाद उमेश ने पुलिस बनने का भी प्रयास किया जहां उन्हें 2 नंबर से चूकना पड़ा।

टेनिस गेंद से करते थे खतरनाक तेज गति से गेंदबाजी, विदर्भ में चमका नाम

पुलिस और आर्मी में सफलता नहीं मिलने से उमेश यादव निराश जरूर हुए लेकिन वहां वो उस दौरान टेनिस गेंद से बहुत ही जबरदस्त तेज गति से गेंदबाजी करते थे। इसी समय में उन्होंने एक टेनिस गेंद टूर्नामेंट में 10 हजार की मैन ऑफ द सीरीज की प्राइज मनी जीती। इसके बाद कॉलेज की टीम में जगह बनाने की कोशिश तो की लेकिन उन्हें एडमिशन ही नहीं मिला।

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इसके बाद उन्होंने क्रिकेट खेलने की कोशिश को जारी रखा और विदर्भ के जिमखाना मैदान में ट्रायल देने गए जहां उन्हें मौका मिला। उन्होंने पहले ही मैच में 37 रन देकर 3 विकेट लेकर विदर्भ में अपना नाम बना दिया। इसके बाद तो उमेश ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार शानदार प्रदर्शन करते रहे।

विदर्भ की टीम से होते हुए 2011 में मजदूर का बेटा उमेश बना टीम इंडिया में

विदर्भ में अपनी गेंदबाजी की गति से हर किसी को हैरान करने वाले उमेश यादव पर उस समय विदर्भ के कप्तान रहे प्रीतम गांधे का ध्यान गया। प्रीतम गांधे ने उन्हें एयर इंडिया के एक टूर्नामेंट में जगह दिलायी। इसमें अच्छे प्रदर्श के बाद उन्हें विदर्भ की टीम में ही मौका मिल गया और आखिर उन्होंने मध्यप्रदेश के खिलाफ डेब्यू किया। पहली पारी में ही 4 विकेट लेकर उमेश ने सनसनी फैला दी

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घरेलू क्रिकेट में जबरदस्त शुरुआत के बाद तो उमेश यादव की चर्चा होने लगी। साल 2010 में आईपीएल की नीलामी में दिल्ली डेयर डेविल्स ने उन्हें अपने पाले में ले लिया। जिसके बाद तो उन्होंने जबरदस्त प्रदर्शन कर 2011 में भारत के लिए डेब्यू करने में कामयाबी हासिल कर ली और आज ये कोयला खदान में काम करने वाले का बेटा धमाल मचा रहा है।