वसीम जाफर ने एक बार फिर रणजी चैंपियन टीम का बने हिस्सा, बनाया ये रिकॉर्ड

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41 साल की उम्र में भी नहीं थम रहा इस भारतीय खिलाड़ी का बल्ला, विदर्भा की जीत के साथ ही जुड़ा ये रिकॉर्ड 

41 साल की उम्र में भी नहीं थम रहा इस भारतीय खिलाड़ी का बल्ला, विदर्भा की जीत के साथ ही जुड़ा ये रिकॉर्ड

भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी 2018-19 के खिताब को विदर्भ ने अपने नाम कर लिया है। गुरुवार को विदर्भ ने खिताबी मुकाबले में सौराष्ट्र को 78 रनों से हराकर लगातार दूसरी बार रणजी ट्रॉफी अपने नाम की।

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विदर्भ ने सौराष्ट्र को हराकर जीता रणजी खिताब

नागपुर के विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में खेले गए इस मैच में सौराष्ट्र को विदर्भ ने जीत के लिए 206 रनों का लक्ष्य दिया था लेकिन विदर्भ के गेंदबाजों के आगे सौराष्ट्र के बल्लेबाज चल नहीं पाए और पूरी पारी 127 रनों के स्कोर पर ही पैवेलियन लौट गई।

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विदर्भ के लिए स्पिन गेंदबाज आदित्य सरवटे इस जीत के नायक रहे। आदित्य सरवटे ने शानदार गेंदबाजी करते हुए पहली पारी में 5 और दूसरी पारी में 6 विकेट हासिल किए। उन्होंने भारत के स्टार बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा का दोनों ही पारियों में सस्ते में शिकार किया।

वसीम जाफर 10वीं बार बने रणजी ट्रॉफी जीतने वाले खिलाड़ी

इस जीत के साथ ही भारत के घरेलू क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज वसीम जाफर एक बार फिर से रणजी खिताबी जीत का हिस्सा रहने में कामयाब रहे हैं। वसीम जाफर वैसे तो मुंबई के लिए रणजी ट्रॉफी खेलते रहे।

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लेकिन पिछले दो साल से वो विदर्भ के लिए खेल रहे हैं और इन दोनों ही साल विदर्भ को फाइनल जीतने में सफलता मिली। वसीम जाफर अब सबसे ज्यादा बाद रणजी खिताबी जीत का हिस्सा बनने वाले संयुक्त रूप से तीसरे खिलाड़ी बन गए हैं।

वसीम जाफर सबसे ज्यादा बार फाइनल का हिस्सा बनने वाले तीसरे खिलाड़ी

वसीम जाफर के लिए ये 10 रणजी फाइनल खिताबी जीत रही। वो अब तक 10 बार फाइनल जीत का हिस्सा रह चुके हैं। सबसे ज्यादा फाइनल जीत का हिस्सा रहने वाले खिलाड़ियों में अशोक मांकड़ 12 बार और अजित वाडेकर 11 बार रहे हैं। तो वहीं मनोहर हार्दीकर, दिलिप सरदेसाई और वसीम जाफर 10-10 बार खिताबी जीत का हिस्सा रहने वाले खिलाड़ी हैं।

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इस जीत के बाद वसीम जाफर ने बड़ी खुशी जतायी और कहा कि

जाहिर तौर पर ये शानदार अहसास है। दसवां फाइनल खेलना कोई छोटी बात नहीं होती है। दो में दो जीतना बहुत शानदार(विदर्भ के लिए) चन्द्रकांत पंडित मुझे मुंबई से विदर्भ ले आए और उन्होंने मुझे बहुत आत्मविश्वास दिया। मैं केवल क्रिकेट खेलना जानता हूं और मैं इसे जाने नहीं देना चाहता हूं।”

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