विराट कोहली

भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए पहले टेस्ट मैच में भारत को 227 रनों से मिली करारी हार का सामना करना पड़ा। इस मैच में भारतीय गेंदबाजों की खूब पिटाई हुई और भारतीय बल्लेबाजों में निरंतरता नहीं दिखी। बड़ी हार के बाद कप्तान विराट कोहली ने आधिकारिक एसजी गेंद को लेकर नाखुशी जाहिर की है। भारतीय कप्तान कोहली ने ड्यूक बॉल से खेलने की इच्छा जाहिर की है।

भारत में होता है एमजी बॉल का इस्तेमाल

ड्यूक

भारत की टीम इस वक्त भारत दौरे पर है। दोनों टीमों के बीच चार टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जा रही है। पहले मैच के बाद कप्तान विराट कोहली ने बीसीसीआई की आधिकारिक एसजी गेंद की जगह ड्यूक गेंद के इस्तेमाल करने की पैरवी की है। विश्व क्रिकेट में ड्यूक, कुकुबरा और एसजी गेंदों का इस्तेमाल किया जाता है।

इंग्लैंड और वेस्टइंडीज की टीम ड्यूक गेंदों से क्रिकेट खेलती हैं। न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका और पाकिस्तान जैसे देशों में जब क्रिकेट खेला जाता है, तो वहां कूकाबुरा गेंदों से क्रिकेट खेलते हैं। वहीं एसजी गेंदों का इस्तेमाल भारत और बांग्लादेश में होता है।

क्या है ड्यूक गेंद की खासियत?

आईसीसी की आधिकारिक गेंद ड्यूक है। ड्यूक गेंदों के बारे में कहा जाता है कि ये गेंदें इतनी दमदार होती हैं कि इनसे बहुत आराम से 90 ओवरों तक का खेल खेला जा सकता है। इनमें कोई खराबी नहीं आती। लेकिन कूकाबुरा और एसजी बॉल्स को लेकर ऐसा नहीं कहा जा सकता। उनका शेप 40 ओवर के बाद बदलने लगता है।

ड्यूक गेंद की सिलाई, स्विंग और उछाल गेंदबाजों के लिए काफी मददगार साबित होती है। इंग्लैंड में जब बादल छाए हों तो ये ड्यूक गेंद अंदर और बाहर दोनों तरफ स्विंग करती है। ड्यूक गेंद की भारतीय उपमहाद्वीप में भी स्विंग कर सकती है। ड्यूक की एक सिंगल गेंद की सिलाई में तीन से साढ़े तीन घंटे का वक्त लगता है। इस गेंद की दूसरी खासियत यह है कि इसकी चमक भी देर तक बनी रहती है।

कैसे बनती है ड्यूक बॉल?

ड्यूक गेंद की मांग विराट कोहली ने पहली बार नहीं की है। बल्कि वह इससे पहले भी कई बार एमजी गेंद की जगह ड्यूक गेंद का इस्तेमाल पर जोर दे चुके हैं। तो आइए अब जान लेते हैं ये गेंद आखिर बनती कैसे हैं। इस गेंद को बनाने के लिए कंपनी गाय के शरीर की पीठ के खास हिस्से का चमड़ा खरीदती है, क्योंकि वो सबसे मजबूत होता है।

इसकी चार इंच की मोटाई वाले पैनल काटते हैं। पूरी गेंद में एक ही चमड़े का इस्तेमाल होता है। ड्यूक गेंद फोर क्वार्टर की होती है। चमड़े के चार टुकड़ों को सिलकर एक गेंद बनाई जाती है। इस बात का ध्यान रखा जाता है कि  चारों टुकड़े एक ही मोटाई के होते हैं।

इस गेंद के अंदर सही मात्रा में काॅर्क और रबर का इस्तेमाल होता है ताकि नमी को बर्दाश्त कर पाए और मजबूत बनी रहे। इस गेंद को हाथ से सिला जाता है। जबकि कूकाबुरा गेंदों की सिलाई में हाथ और मशीन दोनों का इस्तेमाल होता है जिसका इस्तेमाल ऑस्ट्रेलिया में होता है।

एक भारतीय की है ड्यूक गेंद बनाने वाली कंपनी

विराट कोहली

ड्यूक गेंद को बनाने वाली कंपनी एक भारत की है। ब्रितानी कंपनी फिलहाल 74 वर्षीय दिलीप जजोदिया की है।  जजोदिया बैंगलोर के रहने वाले थे, जिन्होंने 1962 में भारत से इंग्लैंड पहुंचे। वहां उनकी कंपनी क्रिकेट का सामान बनाने लगी। इसके बाद उन्होंने 1760 में स्थापित ड्यूक कंपनी को 1987 में खरीद लिया। ये बात जानकर आपको हैरानी होगी कि जजोदिया टेस्ट क्रिकेटर बनना चाहते थे लेकिन अब वो दुनिया की सबसे बेहतरीन क्रिकेट गेंद बनाने वाली कंपनी के मालिक हैं।