विराट कोहली ने किया खुलासा 2012 तक विरोधी टीम को लेकर क्या था उनका लक्ष्य

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विराट कोहली ने किया खुलासा 2012 तक विरोधी टीम को डराना था उनका लक्ष्य 

विराट कोहली ने किया खुलासा 2012 तक विरोधी टीम को डराना था उनका लक्ष्य
Virat Kohli of India walks off the field at the lunch break during day 4 of the 2nd Test between West Indies and India at Sabina Park, Kingston, Jamaica, on September 2, 2019. (Photo by Randy Brooks / AFP)

विराट कोहली यह नाम सुनते ही गेंदबाज को कही न कही दबाव बढ़ जाता है, लेकिन क्या यह खौफ विराट की शुरुआती करियर से थे, जी नहीं, पहले तो विरोधी टीम के सामने उनका खौफ नहीं था, लेकिन यह बात हम नहीं खुद विराट कोहली ने बताया है, कि 2012 से पहले तक क्रिकेट में उनका क्या लक्ष्य था, और वह इस लक्ष्य को पाने में कितना सफल हुए हैं.

विरोधी टीम में बनाना था अपना खौफ

विराट कोहली

कोहली ने स्पोर्ट्स वेब-शो ‘इन डेप्थ विद ग्राहम बेनसिंगर’ में बताया कि कैसे पहले विरोधी खिलाड़ी उनके खेल का सम्मान नहीं करते थे, शायद यही कारण था कि कोहली ने अ[पने खेल में बदलाव जारी रखा तब तक जब तक उन्होंने अपने लक्ष्य को पा नहीं लिया.

उनका लक्ष्य कोई रिकॉर्ड बनाना या तोडना नहीं था, उनका सिर्फ इतना मानना था कि जब वह मैदान पर उतरे तो सामने वाली टीम उनसे खौफ खाए.

विराट ने इस शो में बताया कि

‘ऐसा भी समय था जब मैं बल्लेबाजी के लिये उतरता था तो विपक्षी खेमे में मेरे लिए कोई भय या सम्मान नहीं होता था. मैं मैदान में ऐसे नहीं जाना चाहता कि विपक्षी टीम सोचे कि यह खिलाड़ी इतना खतरनाक नहीं है. मैं चाहता था कि जब मैं मैदान पर खड़ा हूँ तो विपक्षी टीम सोचने को मजबूर हो जाये, कि हमें इस खिलाड़ी को आउट करना चाहिए नहीं तो हम मैच गंवा देंगे.’

इस दौरे के बाद से विराट कोहली ने खुद में किया बदलाव

विराट कोहली ने किया खुलासा 2012 तक विरोधी टीम को डराना था उनका लक्ष्य 1

कोहली ने बताया कि विश्व कप के दौरान हर मैच में उनके  एनर्जी लेवल 120 प्रतिशत था, उन्होंने बताया कि 2012 में ऑस्ट्रेलिया से लौटने के बाद से उन्होंने खुद पर मेहनत की और अपनी बल्लेबाजी को सुधारा, क्योंकि उस सीरीज में उन्होंने भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीम में काफी अंतर देखा.

विराट ने इस वेब सीरीज पर कहा कि,

“मैं जानता हूँ कि जब मैं क्रिकेट में आया था, तब मैं आज वाला विराट नहीं था, लेकिन एक चीज पर मैंने हरदम निरंतरता बनाई रखी, वो थी कि मैं खुद पर काफी मेहनत करता था, यही कारण है मेरी बल्लेबाजी में सुधार का, जब हम 2012 में ऑस्ट्रेलिया से वापस आये थे तो मैंने हममें और ऑस्ट्रेलिया के बीच काफी अंतर देखा. मैंने महसूस किया कि अगर हम अपने खेलने, ट्रेनिंग करने और खाने के तरीके में बदलाव नहीं करते हैं तो हम दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों से नहीं भिड़ सकते.’

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