विराट कोहली नहीं है टेस्ट को छोटा करने के सपोर्ट में

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आईसीसी के 4 दिन टेस्ट के विरोध में हैं विराट कोहली, ऐसे तो खत्म हो जाएगा अस्तित्व 

आईसीसी के 4 दिन टेस्ट के विरोध में हैं विराट कोहली, ऐसे तो खत्म हो जाएगा अस्तित्व

आईसीसी ने क्रिकेट कैलेंडर के व्यस्त कार्यक्रम को देखते हुए उसे सहज बनाने के लिए टेस्ट क्रिकेट के मैचों के दिनों को घटाकर पांच के बजाय चार दिन करने पर विचार किया जा रहा है. ऐसा 2023 से वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप से हो सकता है. इसके बाद एक के बाद एक खिलाड़ी अपनी प्रतिक्रिया देते नजर आ रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया के कप्तान टिम पेन के बाद अब भारतीय कप्तान विराट कोहली ने भी टेस्ट को छोटा करने पर विरोध किया है.

टेस्ट क्रिकेट में नहीं किया जाना चाहिए फेरबदल

विराट कोहली

भारतीय कप्तान विराट कोहली आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में नंबर-1 पर काबिज हैं. साथ ही उनकी कप्तानी में टीम इंडिया लगातार पिछले 2 सालों से अधिक वक्त से आईसीसी रैंकिंग में टॉप पर बनाए रखा है. 5 दिन के टेस्ट को छोटा करने को लेकर विराट कोहली ने कहा,

मेरे अनुसार, इसे (5-दिवसीय टेस्ट) में फेरबदल नहीं किया जाना चाहिए. जैसा कि मैंने कहा, डे-नाइट टेस्ट क्रिकेट का कॉमर्शियल करने की दिशा में एक और कदम है और आप जानते हैं.

ये उत्साह पैदा करता है, लेकिन इसके साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है. मैं ऐसा नहीं मानता. मेरे हिसाब से डे-नाइट टेस्ट में टेस्ट क्रिकेट में सबसे अधिक बदलाव की जरुरत है.

इस तरह तो एक दिन गायब हो जाएगा टेस्ट क्रिकेट

कप्तान विराट कोहली हमेशा से ही टेस्ट क्रिकेट को खासा पसंद करने वाले खिलाड़ियों में से एक हैं. टेस्ट क्रिकेट को 5 से 4 दिन का करने के सख्त खिलाफ रहे कोहली ने कहा,

आप सभी लोग सिर्फ नंबर्स की और मनोरंजन की बात कर रहे हैं. मुझे नहीं लगता है कि ये सही है, कल को आप कहेंगे कि टेस्ट को तीन दिन का कर दिया जाए. इसे आप कहां ले जाना चाहते हैं. मुझे लगता है कि इस तरह तो एक दिन टेस्ट क्रिकेट गायब ही हो जाएगा.

मैं इसके सपोर्ट में नहीं हूं. मुझे नहीं लगता है कि ये टेस्ट फॉर्मेट के साथ इंसाफ हो रहा है, टेस्ट जब शुरु हुआ है तभी से ये 5 दिनों का खेला जा रहा है.

टेस्ट को 4 दिनों का करना चाहता है आईसीसी

विराट कोहली

टेस्ट फ़ॉर्मेट को छोटा करने के लिए अब आईसीसी उसपर काम करना चाहता है. जिसके बारें में बोलते हुए क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के सीईओ केविन रॉबर्टस ने ईएसपीएनक्रिकइंफो से बात करते हुए कहा कि ये कुछ ऐसा है जिसे हमें लागू करने के बारें में सोचना चाहिए, ये ऐसा है की जिसे इमोशनल होकर नहीं चलाया जा सकता है. इसे तथ्य को सामने रखकर सोचना होगा.

हमें यह देखना होगा कि समय और ओवरों के मामले में पिछले पांच-दस वर्षों में टेस्ट मैचों की औसत लंबाई क्या है. हमें इसे ध्यान से देखने जी जरुरत है. ये आगे भविष्य में काम आ सकता है.

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