विराट कोहली को भारतीय नेत्रहीन टीम के अध्यक्ष ने दी उनके खिलाफ खेलने की चुनौती

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विराट कोहली एंड कंपनी को मिला इस भारतीय टीम से खुली चुनौती, आकर कर ले मैदान में सामना पता चल जायेगा कौन है बेहतर! 

विराट कोहली एंड कंपनी को मिला इस भारतीय टीम से खुली चुनौती, आकर कर ले मैदान में सामना पता चल जायेगा कौन है बेहतर!

भारतीय क्रिकेट टीम पिछले कुछ सालों से विराट कोहली एंड कंपनी का प्रदर्शन जबरदस्त रहा है। विराट कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम के प्रदर्शन ने विश्व क्रिकेट की दूसरी टीमों को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है। भारतीय टीम भले ही विश्व क्रिकेट पर अपनी हुकुमत जमा के बैठा हुआ है और सामने आने वाली हर विरोधी टीम को धूल चटाने में कामयाब हो रही है।

नेत्रहीन भारतीय क्रिकेट टीम से मिली भारतीय टीम को चुनौती

लेकिन विराट कोहली की सेना को एक बड़ी चुनौती मिली है। विराट कोहली एंड कंपनी को ये चुनौती किसी ओर देश की टीम से नहीं बल्कि खुध अपने देश की टीम से मिली है। भारतीय क्रिकेट टीम को ये चुनौती मिली है, भारतीय नेत्रहीन क्रिकेट टीम से खेलने और उससे पार पाने की। जी हां, भारतीय नेत्रहीन क्रिकेट टीम एसोसिएशन के सेक्रेटरी जॉन डेविड ने विराट कोहली की टीम को उनके खिलाफ खेलने की चुनौती दी है।

भारतीय टीम नेत्रहीन टीम के सामने कर सकती है संघर्ष

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ ब्लाइंड क्रिकेट इन इंडिया के सेक्रेटरी जॉन डेविड ने एक घटना को याद करते हुए कहा कि एक बार उन्होंने रविन्द्र जडेजा और रोहित शर्मा जैसे भारतीय स्टार खिलाड़ियों को आंखों पर पट्टी बांधने के बाद संघर्ष करते देखा था।

रवि शास्त्री ने भी माना था आंख बंद कर खेलना नहीं होता आसान

जॉन डेविड ने कहा कि

हमारी टीम को 2015 में थोड़ा बहुत भारतीय टीम की मुख्यधारा में खेलना पड़ा। रवि शास्त्री ने तब कहा था कि अगर मेरी आंखों को थोड़ी देर के लिए भी बंद किया जाता है, तो मुझे ये पता नहीं रहता कि मैं कहां हूं। ये उतना आसान नहीं है जैसा नजर आता है।”

रोहित शर्मा और रविन्द्र जडेजा आंखो पर पट्टी बांध नहीं खेल सके

हाल ही में भारतीय टीम ने एक डेमो मैच खेला था। जहां पर भारतीय टीम ने आंखों पर पट्टी बांधी थी। रविन्द्र जडेजा घुटने के नीचे की गेंद को ढूंढते दिखे तो वहीं रोहित शर्मा भी इसी तरह से नजर आए। आप गेंद को ट्रेस नहीं कर सकते। लोग तो ये जानते ही हैं कि बिना आंखो के क्रिकेट खेलना कितना मुश्किल रहता है।”

नेत्रहीन क्रिकेटर करते हैं दैनिक मजदूर की तरह काम

इसके साथ ही जॉन डेविड ने कहा कि

“यहां पर कठिनाई कई है। एक उदाहरण एक विश्वकप के दौरान 50 दिन तक एक साथ थे। कई सारे काम प्रबंध करने होते हैं।  खिलाड़ियों को परिवार को संभालने के साथ ही क्रिकेट पर भी ध्यान देना होता है। एक साधारण तौर पर बात करे तो 2014 के विश्वकप में खेलने वाले हमारी टीम के नेत्रहीन क्रिकेटर एक दैनिक मजदूर की तरह थे। वो एक निर्माण कार्यकर्ता के रूप में काम करता है। वो एक कोने में बैठा रहता है। उन्होंने हमें अपने घर में होने वाली समस्याओं के बारे में बताया। सभी खिलाड़ी मदद में योगदान देते हैं।”

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